नशीली दवाओं के दुरुपयोग को नियंत्रित करने के लिए सरकार के प्रयास

ट्रिगर वॉर्निंग: निम्नलिखित विषय सूची में ड्रग्स और नशीले पदार्थों के बारे में जानकारी दी जा रही है जो कुछ पाठकों को विचलित कर सकती है।

सरकारी योजनाएं और केंद्र

सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय स्वैच्छिक और दूसरे योग्य संगठनों द्वारा नशे की लत की पहचान परामर्श, उपचार और पुनर्वास के लिए 1985 से शराब और मादक . के सेवन की रोकथाम के लिए सहायता कि एक केंद्रीय क्षेत्र योजना चलाई जा रही है। इस योजना के तहत नशा करने वालों के लिए एकीकृत पुनर्वास केंद्र चलाने और बनाए रखने के लिए स्वैच्छिक संगठनों और पात्र एजेंसियों को आर्थिक सहायता दी जाती है।

मादक द्रव्यों के सेवन की रोकथाम और मादक द्रव्यों की मांग में कमी हेतु सेवाएं देने से संबंधित नीतियों पर सरकार को तकनीकी सहायता देने के लिए राष्ट्रीय सामाजिक सुरक्षा संस्थान द्वारा नशीली दवाओं के दुरुपयोग की रोकथाम के लिए एक राष्ट्रीय केंद्र भी स्थापित किया गया है। यह केंद्र नशामुक्ति केंद्रों के क्षमता निर्माण और प्रशिक्षण कर्मियों के लिए कार्यक्रम भी चलाता है।

नशीले पदार्थों की मांग में कमी के लिए राष्ट्रीय कार्य योजना 

2018-25 की अवधि के लिए सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय ने नशीले पदार्थों की मांग में कमी के लिए एक राष्ट्रीय कार्य योजना तैयार की है। यह योजना इन बातों पर केंद्रित है:

• निवारक शिक्षा

• जागरूकता पैदा करना

• नशीले पदार्थों पर निर्भर व्यक्तियों की पहचान, परामर्श, उपचार और पुनर्वास

• सरकार और गैर सरकारी संगठनों के सहयोगात्मक प्रयासों के माध्यम से सेवा प्रदाताओं का प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण।

इसका उद्देश्य शिक्षा, नशामुक्ति और प्रभावित व्यक्तियों के पुनर्वास द्वारा नशीले पदार्थोंके दुरुपयोग के हानिकारक परिणामों को कम करना है। इस कार्य योजना के बारे में अधिक जानकारी यहां से प्राप्त की जा सकती है।

नशीली दवाओं के दुरुपयोग के नियंत्रण के लिए राष्ट्रीय कोष

कानून को जरूरत है कि सरकार नशीली दवाओं के दुरुपयोग के नियंत्रण के लिए एक राष्ट्रीय कोष स्थापित करें जो निम्नलिखित कार्यों में हुए व्यय की पूर्ति करता हो:

• अवैध तस्करी का सामना करना

• नशीली दवाओं और पदार्थों के दुरुपयोग को नियंत्रित करना

• नशा करने वालों की पहचान करना, उनका इलाज करना और उनका पुनर्वास करना

• नशीली दवाओं के दुरुपयोग को रोकना

• नशीली दवाओं के दुरुपयोग के खिलाफ जनता को शिक्षित करना

• दवाओं की आपूर्ति करना जहां पर चिकित्सकीय जरूरत है

इस फंड के लिए पैसा निम्नलिखित से आता है:

• केंद्र सरकार (संसद में कानून द्वारा इसके लिए विनियोग किए जाने के बाद)

• अवैध संपत्ति के रूप में जब्त की गई किसी भी संपत्ति की बिक्री।

• व्यक्तियों या संस्थाओं द्वारा दिया गया अनुदान

• निधि में जमा राशि के निवेश से आय।

ध्वनि प्रदूषण के लिए सजा

ध्वनि प्रदूषण करना कानून के तहत एक दंडनीय अपराध है, और जिम्मेदार व्यक्ति को निम्नलिखित तरीके से दंडित किया जा सकता है:

सार्वजनिक परेशानी के कारण

जब आपके द्वारा किया गया कोई शोर, जनता को हानि पहुंचाता है, या उसके लिए खतरा या झुंझलाहट का कारण बनता है, तो इस प्रकार से शोर करना सार्वजनिक उपद्रव माना जाता है। उदाहरण के लिए यदि आपका पड़ोसी आधी रात को बहुत जोर से साउंड सिस्टम बजाता है, तो इसे सार्वजनिक उपद्रव माना जायेगा।

इस तरह के उपद्रव के लिए सजा के तौर पर 200 रुपये तक का जुर्माना है। अगर आप कोर्ट द्वारा शोर को रोकने के निर्देश के बाद भी शोरगुल करना जारी रखते हैं तो आपको 6 महीने तक की जेल और जुर्माने की सजा हो सकती है।

पर्यावरण प्रदूषण

चूंकि ध्वनि प्रदूषण पर्यावरण और परिवेश को काफी नुकसान पहुंचाता है, इसलिए इसे कानून के तहत गंभीरता से लिया जाता है। उदाहरण के लिए, यदि किसी भवन के निर्माण से होने वाले शोर के कारण आपके लिए सामान्य जीवन व्यतीत करना मुश्किल हो रहा है, तो यह ध्वनि प्रदूषण का एक रूप है। इस अपराध के लिए पांच साल तक की जेल या 1 लाख रुपये तक का जुर्माना, या फिर दोनों की सजा हो सकती है।

इसके बावजूद भी यदि ध्वनि प्रदूषण जारी रहता है, तो आपको हर दिन 5,000 रुपये का अतिरिक्त जुर्माना भी लग सकता है। अगर शोर बंद करने के आदेश के बावजूद भी एक साल से अधिक समय तक शोर जारी रहता है, तो आपको 7 साल तक की जेल की सजा हो सकती है।

आपको ध्वनि प्रदूषण के खिलाफ शिकायत करने का अधिकार है और ऐसी शिकायत मिलने पर अधिकारी (ऑथोरिटी) जिम्मेदार व्यक्तियों के खिलाफ कार्रवाई करेंगे।

LGBTQ+ व्यक्तियों का मानसिक स्वास्थ्य

यह ज़रूरी नहीं की एक विषमलिंगी (स्ट्रेट /cisgendered) व्यक्ति न होना ही मानसिक बीमारी का आधार है। अन्य शब्दों में, सिर्फ LGBTQ व्यक्ति होने के चलते ही आप मानसिक रूप से बीमार नहीं हो जाते हैं। हालांकि, जब आप जन्म में मिले लिंग और स्वयं-निर्धारित लिंग के बीच के अंतर के कारण भयंकर तनाव का अनुभव करते हैं, तो ऐसी स्थिति में हो सकता है कि आपको ‘ लिंग पहचान विकार (जेंडर आइडेंटिटि डिसऑर्डर -लिंग निर्धारण से जुड़ा एक मानसिक रोग)’ से ग्रसित निदान किया जाय।

भारत में, मानसिक स्वास्थ्य के संबंधित आपके कुछ अधिकार हैं:

  • यदि आप अपने समुदाय के धार्मिक विश्वासों, या नैतिक, सामाजिक, सांस्कृतिक, कार्यनीति या राजनैतिक मूल्यों के अनुरूप नहीं हैं, तो सिर्फ इसके चलते आपको मानसिक रूप से बीमार में वर्गीकृत नहीं किया जा सकता है। उदाहरण के लिए, अगर आप समलैंगिक (गे) हैं तो सिर्फ इसके आधार पर आपको मानसिक रूप से बीमार नहीं कहा जा सकता है। यद्यपि आपका समुदाय समलैंगिकता को स्वीकार नहीं करता है, पर यह फिर भी एक सच है।
  • आपको वे सभी मानसिक स्वास्थ्य सेवाएं लेने का अधिकार है, जो सरकार द्वारा वित्त पोषित / चलाए जाने वाले मानसिक स्वास्थ्य सेवा प्रतिष्ठानों द्वारा दी जाती हैं।
  • जैसा कि ऊपर कहा गया है, स्वास्थ्य सेवाएं को देने से आपको कोई इनकार, आपके यौन, लिंग या यौन अभिविन्यास आदि के आधार पर, नहीं कर सकता है।
  • यदि आपको, अपनी यौन अभिविन्यास या लिंग पहचान के चलते, चिकित्सा, मनोवैज्ञानिक स्वास्थ्य सेवा पाने के दौरान किसी भी भेदभाव का सामना करना पड़ा हैं, तो यहां दिए गए विकल्पों की मदद से आप कार्रवाई कर सकते हैं।

राष्ट्रीय वायु गुणवत्ता निगरानी कार्यक्रम क्या है?

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने 28 राज्यों और 8 केंद्र शासित प्रदेशों में वायु गुणवत्ता को देखने के लिए राष्ट्रीय वायु गुणवत्ता निगरानी कार्यक्रम (एनएएमपी) की स्थापना की। एनएएमपी का मकसद हैः

  • आस-पास की वायु गुणवत्ता की स्थिति और रुझान को तय करना
  • यह देखना कि क्या आस-पास की तय वायु गुणवत्ता मानकों का उल्लंघन तो नहीं हो रहा
  • 5 साल से लगातार राष्ट्रीय परिवेशी वायु गुणवत्ता मानकों (NAAQS) को पूरा नहीं कर रहे शहरों को पहचाना और उन्हें ऐसे शहरों के तौर पर चिह्नित करना
  • निवारक और सुधारात्मक उपायों को विकसित करने के लिए जानकारी और उचित समझ को इकट्ठा करना
  • प्रदूषण के कम होने, फैलाव, हवा आधारित गति, शुष्क जमाव, बारिश और प्रदूषकों के रासायनिक बदलाव के द्वारा पर्यावरण में होने वाली प्राकृतिक सफाई की प्रक्रिया को समझना

एनएएमपी वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) के चार प्रमुख प्रदूषकों सल्फर डाइऑक्साइड, नाइट्रोजन के ऑक्साइड, हवा में मौजूद कण पदार्थ और महीन कण पदार्थ की निगरानी करता है। यह आपेक्षिक नमी और तापमान के साथ-साथ हवा की गति और दिशा की भी जांच करता है।

एनएएमपी केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, प्रदूषण नियंत्रण समितियों और राष्ट्रीय पर्यावरण इंजीनियरिंग अनुसंधान संस्थान (NEERI), नागपुर के संयुक्त प्रयासों से बनाया गया है।

 

वायु प्रदूषण कानून के उल्लंघन की शिकायत किससे कर सकते हैं?

पुलिस

कोई भी व्यक्ति पास के किसी पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कर सकते हैं। आप वायु प्रदूषण के लिए जिम्मेदार प्रतिष्ठान, उद्योग या व्यक्ति के खिलाफ सार्वजनिक उपद्रव1 के तहत एफआईआर भी दर्ज करा सकते हैं।

केंद्रीय और राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) भारत में जल और वायु प्रदूषण को रोकने और उसे नियंत्रित करने के लिए गठित एक निकाय है। यह निकाय पर्यावरण और वन मंत्रालय को तकनीकी सेवाएं देता है। साथ ही प्रदूषण के स्तर को विनियमित करने और कम करने में मदद करने के लिए वायु और जल गुणवत्ता निगरानी कार्यक्रम भी चलाता है। दिल्ली एनसीआर में वायु प्रदूषण की शिकायत करने के लिए यहां जाएं।

आप वायु प्रदूषण की शिकायत अपने राज्य के राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड कार्यालय या उसकी वेबसाइट पर जाकर कर सकते हैं।
राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की शाक्तियां कुछ इस तरह हैंः

  • बोर्ड औद्योगिक संयंत्रों से उत्सर्जन के बारे में जानकारी मांग सकता है, संयत्र के परिसर में प्रवेश और उसका निरीक्षण कर सकता है। औद्योगिक संयंत्रों से उत्सर्जन के नमूने लेकर उन्हें विश्लेषण के लिए भी भेज सकता है।
  • प्रदूषण फैलाने वाले प्रतिष्ठानों को बंद करने का निर्देश दे सकता है, ऐसे प्रतिष्ठानों की पानी या बिजली की आपूर्ति को काट या कम कर सकता है।
  • राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड वायु प्रदूषण फैलाने से रोकने के लिए कोर्ट में जा सकता है।

कोर्ट

जिला अधिकारी

कोई भी व्यक्ति वकील की मदद से किसी भी सार्वजनिक उपद्रव के खिलाफ उपाय के लिए दीवानी मुकदमा दायर करने के लिए मजिस्ट्रेट से संपर्क कर सकता है। मजिस्ट्रेट के पास सेक्शन 152 भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 के तहत प्रदूषणकारी गतिविधियों को रोकने के लिए 5 (उपद्रव हटाने का आदेश) नोटिस जारी करने की शक्ति है।

नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल

प्रदूषण से जुड़ी शिकायतें नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल की आधिकारिक वेबसाइट पर दर्ज की जा सकती हैं। ये शिकायतें एक व्यक्ति, अधिवक्ता, कानूनी फर्म या एनजीओ के प्रतिनिधि या भारत सरकार के प्रतिनिधि के तौर पर दायर की जा सकती है।

जब कार्यवाही शुरू होती है, तो एनजीटी राहत और मुआवजा दे सकता है। साथ ही क्षतिग्रस्त संपत्ति और पर्यावरण क्षेत्र की वापसी और बहाली का आदेश दे सकता है। एनजीटी पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाले जिम्मेदार व्यक्ति से मृत्यु, विकलांगता, चोट या बीमारी, मजदूरी के नुकसान और मेडिकल खर्च के लिए मुआवज़ा देने का आदेश भी दे सकता है।

ट्रिब्यूनल के पास अनुदान देने की शक्ति भी है, जैसे-

  • अंतरिम आदेश या स्टे (रोक) देने की शक्ति
  • किसी व्यक्ति को रोकने और छोड़ने का आदेश देने की शक्ति

नशीली दवाओं/ नशीले पदार्थों के प्रयोग के लिए जमानत

ट्रिगर वॉर्निंग: निम्नलिखित विषय सूची में ड्रग्स और नशीले पदार्थों के बारे में जानकारी दी जा रही है जो कुछ पाठकों को विचलित कर सकती है। 

ड्रग्स और पदार्थों के संबंध में किए गए अपराध प्रकृति में संज्ञेय हैं। इसके अनुसार पुलिस को गिरफ्तारी के लिए मजिस्ट्रेट से वारंट की जरूरत नहीं है।

अगर किया गया अपराध मादक द्रव्यों या पदार्थों की कम मात्रा या व्यावसायिक मात्रा से कम मात्रा से जुड़ा है, तो आप जमानत के लिए सीधे पुलिस से आवेदन कर सकते हैं और वही से आपको जमानत मिल जाएगी। यह व्यक्तिगत या अन्य अनुबंध प्रस्तुत करने पर आकस्मिक हो सकता है।

नशीली दवाओं या पदार्थों की व्यावसायिक मात्रा से संबंधित अपराधों को कानून के तहत गैर-जमानती माना जाता है। इसका मतलब यह नहीं है कि आपको जमानत नहीं मिलेगी। आप अदालत में आवेदन कर सकते हैं और यह जज के विवेक पर निर्भर करेगा। आप इसे अधिकार के रूप में नहीं मांग सकते।

ध्वनि प्रदूषण के प्रभाव

‘शोर’ हमारे काम, आराम, नींद और संचार या बातचीत को बाधित कर सकता है। यह हमारी सुनने की क्षमता को नुकसान पहुंचा सकता है और अन्य मनोवैज्ञानिक, और संभवतः रोग संबंधी प्रक्रिया को जन्म दे सकता है। ध्वनि प्रदूषण के स्वास्थ्य पर कुछ बुरे प्रभाव नीचे दिए गए हैं:

बहरापन/ सुनाई न देना

बहरापन कुछ समय के लिए या हमेशा के लिए हो सकता है।

• Noise-Induced Temporary Threshold Shift (NITTS)-एन.आई.टी.टी.एस एक अस्थायी प्रकार का बहरापन है, जो तब होता है जब आप कुछ देर तक ऐसे स्थान पर रहते हैं जहां बहुत शोर हो रहा है।

• Noise-Induced Permanent Threshold Shift (NIPTS) एन.आई.पी.टी.एस एक स्थायी बहरापन है जो अपरिवर्तनीय हानि है। यह लंबे समय तक अत्यधिक शोरगुल वाले स्थान पर रहने के कारण होता है। एन.आई.पी.टी.एस.(NIPTS) आमतौर पर हाई फ्रीक्वेंसी रेडियो तरंगो के कारण होता है, सामान्य तौर बेहद खतरनाक होता है, यह लगभग 4000 हर्ट्ज़ (Hz) वाले तरंगों से होता है।

ये दोनों प्रकार के नुकसान कई बार प्रेसबायक्यूसिस के साथ हो सकते हैं। प्रेसबायक्यूसिस एक स्थायी बहरापन है जो हमारी उम्र बढ़ने की प्रक्रिया के साथ होती है।

संवाद (बातचीत) में बाधक

शोरगुल हमारे ‘बातचीत’ में भी हस्तक्षेप करता है। अगर शोरगुल और बातचीत दोनों एक साथ हों, तो दोनों में से कोई एक ध्वनि हमें सुनाई नहीं देती है। कई महत्वपूर्ण परिस्थितियों में शोरगुल बातचीत में बाधा डाल सकती है:

• व्यावसायिक स्थानों पर जहाँ कामगारों को चेतावनी के संकेत या चिल्लाने की आवाज़ न सुन पाने के कारण चोट लग सकती है।

• कार्यालयों, स्कूलों और घरों में जहाँ शोरगुल झुंझलाहट/परेशानी का एक प्रमुख कारण है।

नींद में खलल पड़ना

शोरगुल नींद में दखल दे सकता है और सो रहे लोगों को जगा सकता है, खासकर नवजात शिशुओं, वृद्ध आदि लोगों को।

झुंझलाहट

शोरगुल से होने वाली झुंझलाहट को उससे उत्पन्न होने वाली नाराजगी की भावना के रूप में परिभाषित किया जा सकता है। शोर से होने वाली झुंझलाहट शोर के शुरुआत होने के कुछ समय के बाद भी हो सकती है। उदाहरण के लिए, अगर कोई लाउडस्पीकर आपके घर के पास 1 महीने से भी अधिक समय तक बजता है, तो एक समय के बाद आपको झुंझलाहट हो सकती है। हालांकि, हरेक व्यक्ति को शोर से होने वाली झुंझलाहट अलग-अलग कारणों पर निर्भर होता है, जैसे शोर के प्रति संवेदनशीलता या उसे सहन करने की क्षमता, आदि। उदाहरण के लिए, आप अपने घर के पास एक स्पीकर से आने वाले शोर या आवाज़ को तो सहन कर सकते हैं, लेकिन आपके बुजुर्ग दादा-दादी उसे शायद सहन नहीं कर सकते हैं।

काम-काज पर असर

शोर किसी व्यक्ति के ध्यानपूर्वक कार्य करने की क्षमता (अलर्टनेश) में बाधक हो सकता है और उसकी कार्य-क्षमता को बढ़ा या घटा सकता है। उदाहरण के लिए, चौकन्ना होकर कार्य करना, सूचना-संग्रह और विश्लेषण जैसी मानसिक गतिविधियाँ शोरगुल से प्रभावित हो सकती हैं।

शारीरिक क्रियाओं पर पड़ने वाला प्रभाव

‘रक्त वाहिकाओं’ पर शोर का अच्छा-खासा प्रभाव पड़ता है, खासकर छोटी वाली वाहिकाएं जिसे प्रिकैपिलियरी वेसेल्स कहते हैं। कुल मिलाकर, शोर इन रक्त वाहिकाओं को संकरा बना देता है। शोर के कारण पैर की उंगलियों, हाथ की उंगलियों, त्वचा और पेट के अंगों में जाने वाली रक्त वाहिकाएं (पेरिफेरल बल्ड वेसेल्स) सिकुड़ जाती हैं, जिससे शरीर के इन अंगों में सामान्य रूप से आपूर्ति की जाने वाली खून की मात्रा कम हो जाती है। रक्त वाहिकाएं जो मस्तिष्क को खून पहुँचाती है वह शोर के कारण फैलकर चौड़ी हो जाती हैं। यही कारण है कि लगातार तेज आवाज सुनने से सिरदर्द होता है। इन सबसे होने वाली कुछ स्वास्थ्य समस्याएं इस प्रकार हैं:

• गल्वानिक स्किन रेस्पोंस (GSR)-यह पसीने की ग्रंथियों से उत्पन्न होने वाला एक प्रकार का शारीरिक परिवर्तन है जो भावनात्मक स्थिति की तीव्रता को दर्शाता है। यह भावनात्मक स्थिति ध्वनि प्रदूषण के कारण भी संभव है।

• अल्सर से संबंधित गतिविधि में वृद्धि। लंबे समय तक चलने वाला शोर पेट में अल्सर की संभावना को बढ़ा सकता है, क्योंकि ध्वनि प्रदूषण गैस्ट्रिक जूस के प्रवाह को कम कर सकता है और पेट की अम्लता (एसिडिटी) को बदल सकता है।

• आंतों की गतिशीलता (मूवमेंट) में बदलाव आना जो कि पाचन तंत्र और उसके भीतर के भोज्य पदार्थों के चाल में कमी।

• कंकाल पेशी में तनाव का बदल जाना। दूसरे शब्दों में, मांसपेशियों के संकुचन/सिकुड़न से होने वाले दबाव में परिवर्तन होता है।

• ऊँची आवाज़ से संबंधित व्यक्तिपरक प्रतिक्रिया और चिड़चिड़ापन की धारणा

• सुगर, कोलेस्ट्रॉल और एड्रिनेलिन का बढ़ जाना

• हृदय गति में परिवर्तन होना

• रक्तचाप (बी.पी.) का बढ़ जाना

• वाहिकासंकीर्णन/रक्त वाहिकाओं में सिकुड़न। दूसरे शब्दों में, रक्त वाहिकाओं का सिकुड़ जाना जिससे शरीर का रक्तचाप (ब्लड प्रेशर) बढ़ जाता है। शोरगुल न केवल जागते समय सेहत के लिए हानिकारक होता है, बल्कि सोते समय या अचेतन स्थिति में भी शरीर पर इसका प्रभाव पड़ सकता है।

तनाव

शोर कई तरह से तनाव पैदा कर सकता है, जिसमें सिरदर्द, चिड़चिड़ापन, अनिद्रा, पाचन विकार, और मनोवैज्ञानिक विकार शामिल हैं। उदाहरण के लिए, लगातार तेज आवाज़ या शोरगुल में रहने से आपको थकान हो सकता है।

अजन्मे शिशुओं और बच्चों पर प्रभाव

पेट में पलने वाला बच्चा शोरगुल से पूरी तरह सुरक्षित नहीं होता है। शोर से बच्चे के विकास को जोखिम हो सकता है, जैसे कि जन्म के समय बच्चे का वजन कम होना या ज्यादा होना। शोरगुल वयस्कों या युवाओं को उतना प्रभावित नहीं करता है, लेकिन बच्चों पर इसका खासा प्रभाव पर सकता है, क्योंकि बच्चे अधिक संवेदनशील होते हैं। ध्वनि प्रदूषण के कारण बच्चों की पढ़ने की क्षमता, बोलने की क्षमता, भाषा और भाषा संबंधी कौशल प्रभावित हो सकता है।

सार्वजनिक स्थान पर धूम्रपान करना

सार्वजनिक स्थानों पर धूम्रपान करना एक अपराध है। यदि आप किसी सार्वजनिक स्थान पर धूम्रपान करते हुए पकड़े जाते हैं, तो कोई भी पुलिस अधिकारी आपको हिरासत में रोक सकता है, और अधिकतम 200 रुपये. का जुर्माना लगा सकता है।

आप निम्न स्थानों पर धूम्रपान नहीं कर सकते हैं:

  • होटलों में
  • रिफ्रेशमेंट रूम, दावत खाना (बैंक्वेट हॉल), डिस्कोथेक, कैंटीन, कॉफी हाउस, पब, बार, हवाई अड्डे (एयरपोर्ट) का लाउंज, आदि में
  • कार्यस्थलों में
  • शॉपिंग मॉल में
  • सिनेमा हॉल में
  • सभागारों (ऑडिटोरियम) में
  • अस्पताल भवनों और स्वास्थ्य सेवा संस्थानों में
  • रेलवे प्रतीक्षालय में
  • मनोरंजन केंद्रों में
  • सार्वजनिक कार्यालयों में
  • न्यायालयों के भवनों में
  • शिक्षण संस्थानों में
  • पुस्तकालयों में
  • सार्वजनिक सुविधाओं में

आप निर्धारित धूम्रपान क्षेत्रों में जैसे, 30 से अधिक कमरों वाले होटलों, हवाई अड्डों, या रेस्तराओं (जिनमें 30 से ज्‍़यादा लोग बैठ सकते हैं) में धूम्रपान कर सकते हैं।

आप पूरी तरह से खुले स्थानों पर, जैसे सड़कों या पार्कों में धूम्रपान कर सकते हैं। हालांकि बस स्टॉपों, रेलवे स्टेशनों या खुले सभागारों (ऑडिटोरियम) जैसी जगहों पर धूम्रपान करना अभी भी निषिद्ध है। यदि आप किसी सार्वजनिक स्थान के मालिक हैं, तो आप यहां पढ़ें कि आपकी कानूनी जिम्मेदारियां क्या हैं।

अधिक जानकारी के लिए इस सरकारी संसाधन को पढ़ें

LGBTQ+ व्यक्तियों का यौन स्वास्थ्य

यदि आप यौन क्रिया में सक्रिय हैं, तो यौन से फैलने वाले संक्रमण / रोग (सेक्सुअली ट्रांसमिटेड इन्फेक्शन-STI / डिज़ीज-STD), जैसे गोनोरिया, सिफिलिस, एड्स, आदि के होने का खतरा हो सकता है। यदि आप कुछ खास श्रेणियों के लोग में आते हैं, तो आपको इन बीमारियों के होने का खतरा अधिक रहता है। उदाहरण के लिए, ‘नेशनल एड्स कंट्रोल प्रोग्राम’ की एक रिपोर्ट के आधार पर, ऐसा पता चला है कि जो पुरुष, पुरुषों के साथ यौन संबंध (मेन हैविंग सेक्स विथ मेन-MSM) या तीसरे लिंग (ट्रांसजेंडर) के व्यक्तियों के साथ यौन संबंध रखते हैं, उनको एचआईवी (HIV) / एड्स होने का खतरा ज़्यादा रहता है।

यदि आप यौन क्रिया में सक्रिय हैं, तो आपको अपने डॉक्टर से यौन से फैलने वाले संक्रमण (एसटीआई) की रोकथाम, प्रस्तावित अनुवीक्षण (स्क्रीनिंग) जांच आदि के बारे में बात करनी चाहिए।

सरकारी सहायता प्राप्त योजनाएं और क्लिनिक

सरकार, यौन से फैलने वाले संक्रमण (एसटीआई) से पीड़ित लोगों की मदद के लिए कई योजनाएं बनाई है, जो आपके लिंग पहचान और यौन से अभिविन्यास से परे है। ऐसे व्यक्तियों को मुफ्त सेवाएं प्रदान करने वाले क्लीनिकों की सूची, राज्यों के आधार पर, कृपया यहां देखें।

यदि आपको, अपने लिंग पहचान या यौन अभिविन्यास के चलते, चिकित्सा या मनोवैज्ञानिक स्वास्थ्य सेवा पाने में किसी तरह के भेदभाव का सामना करना पड़ा हैं, तो यहां दिए गए विकल्पों के आधार पर आप कार्रवाई कर सकते हैं।

वायु प्रदूषण कानूनों के तहत होने वाले अपराध और उनकी सजा

वायु प्रदूषण कानूनों के तहत होने वाले अपराध और उनकी सजा

अपराध कानून       सजा
 

वायु गुणवत्ता सीमा से ज्यादा वायु प्रदूषण करना

कानून, उद्योगों को राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा तय सीमा से ज्यादा वायु प्रदूषक को छोड़ने पर प्रतिबंध लगाता है। अगर वे ऐसा करते हैं, तो उद्योग के मालिक को जल्द ही राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को सूचित और इसके लिए भुगतान करना होगा। एजेंसियां ​​हानिकारक उत्सर्जन के प्रभाव को कम करने के लिए कोई भी सुधारात्मक उपाय प्रदूषक भुगतान सिद्धांत के हिसाब से करती हैं।   

उस राज्य का राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड अपराधी को वायु प्रदूषण के उत्सर्जन से रोकने के लिए कोर्ट (मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट या प्रथम श्रेणी के न्यायिक मजिस्ट्रेट) में आवेदन कर सकता है।

प्रदूषण करने वाले व्यक्ति या उद्योग को प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए राज्य विभागों द्वारा दी जाने वाली लागत ब्याज के साथ देनी होगी।

 

एक औद्योगिक संयंत्र को बिना उचित अनुमति के स्थापित करना या चलाना

राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से बिना अनुमति लिए किसी औद्योगिक संयंत्र को स्थापित या संचालित करना एक अपराध है। कोई भी तय उत्सर्जन सीमा या उचित प्रदूषण नियंत्रण उपकरण से ज्यादा प्रदूषण करने पर अपराधी माना जाएगा।   

 

 

 

इसमें जुर्माने के साथ डेढ़ साल से छह साल तक की जेल की सजा है। अगर उल्लंघन जारी रहता है, तो जुर्माना की रकम बढ़ सकती है, जो इसे जारी रखने वाले हर दिन के लिए 5,000 रूपये (अधिकतम) लगाई जा सकती है।

अगर प्रदूषण एक साल से ज्यादा समय तक जारी रहता है, तो अपराधी को जुर्माने के साथ दो से सात साल तक की जेल भी हो सकती है।

 

असुरक्षित स्थिति में वाहन (गाड़ी) का  इस्तेमाल

अगर कोई ऐसा वाहन सार्वजनिक जगह पर चलाया जाता है, जो ध्वनि और वायु प्रदूषण के निर्धारित मानकों का उल्लंघन करता है, तो यह एक दंडनीय अपराध है।    पहली बार के अपराध के लिए 1,000 रुपये का जुर्माना होगा। वहीं दूसरे बार के अपराध के लिए 2,000 रुपये का जुर्माना होगा।
 

पीयूसी (प्रदूषण नियंत्रण में) प्रमाणपत्र का उल्लंघन

 

मोटर वाहन का इस्तेमाल करने वाला व्यक्ति अगर मंत्रालय द्वारा जारी वैध पीयूसी (प्रदूषण नियंत्रण) प्रमाण पत्र नहीं ले रहा हैं, तो उस पर जुर्माना लगाया जाएगा। 

इसकी सजा 10,000 रुपये का जुर्माना है। 
 

पर्यावरण प्रदूषण: वायु, जल या भूमि का प्रदूषण

पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986 के किसी भी प्रावधान का उल्लंघन यानी वायु, जल या भूमि का प्रदूषण या पर्यावरण को कोई नुकसान पहुंचाना अपराध है।  

सजा 5 साल तक की जेल के साथ जुर्माना है, जो 1,00,000 रुपये तक बढ़ सकता है। कानून का लगातार उल्लंघन होने पर 5,000 रुपये का हर दिन के लिए अतिरिक्त जुर्माना लगेगा। 

 

पर्यावरण में हानिकारक प्रदूषकों को छोड़ना 

 

 

पर्यावरण में हानिकारक प्रदूषकों को छोड़ना सार्वजनिक उपद्रव वाला अपराध है, क्योंकि ये प्रदूषक हवा को जहरीला बनाते हैं और स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हैं। यहां तक ​​कि सार्वजनिक जगहों पर धूम्रपान करना भी सार्वजनिक उपद्रव माना जाता है।  

सजा 500 रुपये का जुर्माना है। 
 

ऐसी गतिविधियों में शामिल होना, जो समुदाय के स्वास्थ्य और शारीरिक आराम के लिए खतरनाक हो

 

ऐसे उद्योगों और दूसरे ऐसी प्रक्रियाएं, जो वायु प्रदूषकों को हवा में छोड़ती हैं और हानिकारक स्वास्थ्य समस्याओं के साथ लोगों को असुविधा पहुंचाती हैं, वह अपराध है। इसमें ऐसे व्यापार या व्यवसाय भी शामिल है, जो हानिकारक है और लोगों के स्वास्थ्य के लिए खतरा है और उनकी शारीरिक परेशानी के लिए खतरा हो। 

ऐसे उपद्रव (नुकसान पहुंचाने वाले काम) को रोकने के लिए मजिस्ट्रेट आदेश पारित कर सकता है।