ध्वनि-प्रदूषण की शिकायत दर्ज कराना

आखिरी अपडेट Aug 24, 2022

अगर कोई शोर हो रहा है जिससे आपको झुंझलाहट होती है, या बेचैनी या कोई चोट लगती है, तो आप नीचे दिए गए अधिकारियों के पास शिकायत दर्ज करा सकते हैं। अगर आपको पता है कि शोर का स्तर किसी भी क्षेत्र में तय सीमा यानि कि, ध्वनि-मानक 10 डीबी (ए)/10 dB(A) से अधिक हो गया है या फिर रात के 10:00 बजे से सुबह 6:00 बजे के बीच ध्वनि प्रदूषण होता है, तो भी आप इसके खिलाफ शिकायत दर्ज करा सकते हैं।

पुलिस

अगर आप ध्वनि प्रदूषण को रोकना चाहते हैं तो आप नजदीकी पुलिस स्टेशन में शिकायत कर सकते हैं, 100 नंबर पर कॉल कर सकते हैं या अपने राज्य के पुलिस शिकायत पोर्टल पर ऑनलाइन शिकायत दर्ज करा सकते हैं। पुलिस थाने का प्रभारी/अधिकारी, पुलिस आयुक्त/कमिश्नर या कोई भी अधिकारी (जो पुलिस उपाधीक्षक/डिप्टी एस.पी. के स्तर का हो) निम्न तरीकों से उस शिकायत पर कार्रवाई कर सकते हैं:

• ध्वनि प्रदूषण करने वाले सजो-सामान को जब्त कर सकते है

• माइक्रोफ़ोन या लाउडस्पीकर, आदि के उपयोग को बंद करवा सकते हैं

• प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड में शिकायत दर्ज कराकर ध्वनि प्रदूषण को बंद के लिए लिखित आदेश ला सकते हैं।

केंद्रीय और राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड

केंद्रीय पर्यावरण प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सी.पी.सी.बी.) पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986 के प्रावधानों को लागू कराने के लिए पर्यावरण और वन मंत्रालय को तकनीकी सेवाएं प्रदान करता है। इसका मुख्य काम नदियों, नालों, कुओं आदि में पानी की सफाई को सुनिश्चित करना और जल प्रदूषण को रोकना है। बोर्ड का यह भी कर्तव्य है कि वह वायु और ध्वनि प्रदूषण में कमी लाकर हवा की गुणवत्ता में सुधार करें। CPCB(सी.पी.सी.बी.) का मुख्य कार्यालय नई दिल्ली में स्थित है और विभिन्न राज्यों में उनके कई क्षेत्रीय कार्यालय भी हैं।

भले ही सी.पी.सी.बी. के कार्यालय कुछ ही राज्यों में हैं, लेकिन हर राज्य में एक कार्यालय ऐसा भी है जिसे राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (एस.पी.सी.बी.) के नाम से जाना जाता है। आप शिकायत दर्ज कराने के लिए एस.पी.सी.बी. के इन कार्यालयों में भी संपर्क कर सकते हैं। इन अधिकारियों के पास ध्वनि प्रदूषण को रोकने, प्रतिबंधित करने, नियंत्रित करने या विनियमित करने के लिए लिखित आदेश जारी करने का प्राधिकार (पॉवर) होता है:निम्न प्रकार के यंत्रों पर रोक लग सकता है,

• मुँह से बजने वाला कोई भी संगीत या वाद्य संगीत

• विभिन्न प्रकार के वाद्य यंत्र जिससे तय सीमा से अधिक ध्वनि प्रदूषण या आवाज होता है,

• ऐसे उपकरण जिसमें लाउडस्पीकर, पब्लिक एड्रेस सिस्टम, हॉर्न, निर्माण-कार्य करने वाली मशीनें, सामान या औजार शामिल हैं जो ध्वनि प्रदूषण करने या उत्सर्जन करने में सक्षम हैं

• ध्वनि प्रदूषण करने वाले पटाखों के फोड़ने से होने वाली आवाजें

• व्यवसाय या उद्योग-धंधों से होने वाली आवाजें, उदाहरण के लिए, बर्तनों को बनाने का व्यवसाय/काम, आदि। अधिकारी उस व्यक्ति को अपना बचाव करने का एक मौका दे सकते हैं जिसने शोर मचाया है, और उसको सुनने के बाद फिर से वे उस आदेश को संशोधित भी कर सकते हैं या बदल सकते हैं।

कोर्ट

जिला मजिस्ट्रेट

ध्वनि प्रदूषण के बारे में शिकायत करने के लिए आप किसी वकील की मदद से नजदीकी जिला मजिस्ट्रेट के कोर्ट में जा सकते हैं। कोर्ट के पास ध्वनि प्रदूषण के कारण होने वाले उपद्रव या परेशानी को अस्थायी रूप से रोकने की शक्ति होती है। ध्वनि प्रदूषण करने वाले व्यक्ति के मामलों की सुनवाई करने के बाद कोर्ट निम्नलिखित आदेश जारी कर सकता है:

• कोर्ट शोर (या ध्वनि प्रदूषण) को रोकने के लिए अल्पकालिक आदेश या निषेध आज्ञा जारी कर सकता है

• कोर्ट, शोर को बंद करने या इसे नियंत्रित करने का आदेश दे सकता है

• कोर्ट, शोर या ध्वनि प्रदूषण को बंद करने और शोर को रोकने के लिए स्थायी आदेश पारित कर सकता है

नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल

नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एन.जी.टी)-एक विशेष न्यायिक निकाय है जहां आप ध्वनि प्रदूषण के मामलों सहित अन्य पर्यावरणीय मामलों की शिकायत दर्ज कराने के लिए जा सकते हैं। एन.जी.टी की स्थापना निम्न उद्देश्य से की गई थी:

• पर्यावरण संरक्षण के लिए प्रभावी और शीघ्र उपाय या उपचार सुझाव देना /करवाना,

• वनों और अन्य प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण करना

• पर्यावरण से संबंधित किसी भी कानूनी अधिकार को लागू करना।

ट्रिब्यूनल केंद्र

एन.जी.टी ट्रिब्यूनल के देश में पांच केन्द्र हैं-देश के उत्तर, मध्य, पूर्व, दक्षिण और पश्चिम में स्थित हैं। प्रमुख बेंच उत्तर क्षेत्र में स्थित है, जिसका मुख्यालय दिल्ली में है। सेंट्रल (मध्य) ज़ोन की बेंच भोपाल में, ईस्ट (पूर्वी) ज़ोन की बेंच कोलकाता में, साउथ (दक्षिणी) ज़ोन की बेंच चेन्नई में और वेस्ट (पश्चिमी) ज़ोन की बेंच पुणे में स्थित है। एन.जी.टी का आदेश अनिवार्य (बाध्यकारी) होता है, और इसके पास पीड़ित व्यक्तियों को मुआवजे के रूप में राहत देने की शक्ति होती है।

एन.जी.टी में शिकायत दर्ज कराना

कोई भी व्यक्ति जो पर्यावरणीय नुकसान या वायु प्रदूषण, पर्यावरण प्रदूषण, जल प्रदूषण, आदि विषयों से संबंधित होने वाले प्रदूषण के लिए राहत और मुआवजे की मांग कर रहा है, वह एन.जी.टी में शिकायत दर्ज कर सकता है। एन.जी.टी का फैसला अनिवार्य होता है, और अगर आप इसके फैसले से नाखुश हैं तो आप 90 दिनों के भीतर सर्वोच्च न्यायालय (यानि सुप्रीम कोर्ट) में फैसले के खिलाफ अपील कर सकते हैं।

अगर आप कोई मुकदमा दायर करना चाहते हैं या निचली अदालत के निर्णय के खिलाफ कोर्ट में अपील करना चाहते हैं तो आप किसी वकील की सहायता ले सकते हैं।

Comments

    Hem jain

    March 25, 2023

    हमने ध्वनि प्रदूषण के लिए कई जगह शिकायत कर रखी है सीएम विंडो ,सीपीग्राम, प्रदूषण डिपार्टमेंट ,नगर निगम फरीदाबाद ,प्रेसिडेंट secretariat 6 महीने से ऊपर हो गए हैं पर कहीं कोई निष्कर्ष नहीं निकलता न्याय मिलना बहुत मुश्किल है कोई सरकारी डिपार्टमेंट कुछ नहीं करता सरकारी अधिकारी कोई एक्शन नहीं लेते

    Shelly Jain

    February 21, 2024

    आपके ध्वनि प्रदूषण के खिलाफ कई जगहों पर शिकायत कर दी गई है, लेकिन अब तक कोई संतोषजनक निष्कर्ष नहीं निकला है। यह बहुत ही निराशाजनक है कि आपको 6 महीनों से अधिक समय हो गया है, फिर भी कोई सरकारी डिपार्टमेंट या अधिकारी उचित कदम नहीं उठा रहा है। ध्वनि प्रदूषण एक गंभीर समस्या है और इसका समाधान अत्यंत महत्वपूर्ण है। आपको इस मामले में न्याय मिलने के लिए संघर्ष करना जारी रखना चाहिए। आपको विभिन्न सरकारी अधिकारियों के पास पुनः संपर्क करना और उन्हें इस मामले में कार्रवाई करने के लिए प्रेरित करना चाहिए। अतिरिक्त रूप से, आप स्थानीय मीडिया, सामाजिक मीडिया और स्थानीय नेताओं के साथ मिलकर इस मुद्दे को सार्वजनिक कर सकते हैं। इसके अलावा, यदि आपके पास संगठनित तौर पर किसी समुदाय या वाणिज्यिक संगठन का सहारा है, तो आप उनकी मदद ले सकते हैं। ध्वनि प्रदूषण के मुद्दे में संघर्ष करने में साझेदारी का सहारा लेना महत्वपूर्ण हो सकता है और इससे आपके मामले में न्याय मिलने की संभावना बढ़ सकती है।

    Mrs Nisha singh

    April 2, 2023

    So many time ,I had complained,regarding loudspeaker, which is always used.but no one could not stopped it.

    Shelly Jain

    February 21, 2024

    I understand your frustration regarding the loudspeaker issue. Here are some additional steps you can take to address the problem:

    1. Document the Noise: Keep a record of the times and duration when the loudspeaker is being used excessively. Note down any disturbances caused by the noise, such as disruptions to your daily activities or sleep.
    2. Speak with the Organizers: Approach the individuals or organizers responsible for using the loudspeaker and explain the impact it’s having on you and others in the community. They may not be aware of the disturbance they’re causing and might be willing to find a compromise or alternative solution.
    3. Engage with Local Authorities: If speaking directly with the organizers doesn’t resolve the issue, escalate your complaint to local authorities, such as the police or municipal officials responsible for noise control. Provide them with documented evidence of the disturbance caused by the loudspeaker.
    4. Know the Local Noise Regulations: Familiarize yourself with the noise regulations and bylaws in your area. In many places, there are specific restrictions on the use of loudspeakers and amplified sound, especially during certain hours or in residential areas.
    5. Form a Community Group: Consider joining or forming a community group with other residents who are affected by the loudspeaker issue. Together, you can advocate for a collective solution and present a unified voice to local authorities.
    6. Seek Legal Advice: If the issue persists despite your efforts and the noise is significantly impacting your quality of life, consider seeking legal advice. A lawyer specializing in noise pollution or civil law may be able to provide guidance on your rights and options for legal action.
    7. Explore Mediation: In some cases, mediation between the parties involved can help find a mutually acceptable solution. Mediation involves a neutral third party facilitating a discussion to resolve the conflict amicably.

    Remember to remain persistent and respectful in your efforts to address the issue. It may take time and multiple attempts to find a resolution, but by advocating for your rights and working collaboratively with others, you can make progress towards resolving the loudspeaker problem in your community.

    Jetharam

    April 15, 2023

    सेवा मे श्री मान मे जेसलमेर राजस्थान से लिख रहा हूँ वार्ड नं 21पर अवेध तरीके से मेकिनेक दवारा बड़ी गाडीयों की डेनटीग करना वेलडीग करना मोटर साइकिल के ईजन का काम करने से जोर से लोहा पिटने की आवाज आना परदुसण फेल ना जला हुआ आयल पेट्रोल डीजल जुट रोड के ऊपर बिखरा हुआ रहता है जिस से रोड़ पर आम आदमी व जेसलमेर मै आने वाले विदेशी व दैसी परयटक भी ईस गंदगी का समना करना पड़ता है ईस से जेसलमेर की छवि धूमिल हो रही है ईतनी तेज आवाज होती जीसे परयटक होटलों खाली करने पर मजबूर हो जाते हैं मदरसा रोड़ पर कम से कम 50 होटल है वार्ड 21मं

    Shelly Jain

    February 21, 2024

    यदि आप किसी आवासीय क्षेत्र में रह रहे हैं और वहां वेल्डिंग का काम किया जा रहा है जिससे आपको परेशानी हो रही है, तो आप इस संबंध में नगर निगम से संपर्क कर सकते हैं। उन्हें एक पत्र लिखकर बताएं कि दुकान किस तरह का उपद्रव पैदा कर रही है, और बताएं कि यह उस क्षेत्र में पर्यटकों को कैसे प्रभावित करता है। आप उस क्षेत्र में अधिकार क्षेत्र वाली पुलिस से भी संपर्क कर सकते हैं और सार्वजनिक उपद्रव के लिए शिकायत दर्ज कर सकते हैं।

    Narayan Mulchandani

    June 21, 2023

    श्रीमान अधिकारी साहब, मेरा मकान अहमदाबाद के नेहरू नगर, कुबेर नगर, विस्तार में है जहां पर ज्यादा तर मजदूर बस्ती रहती है लेकिन आए दिन हमारे यहां की बस्ती में विवाह समारोह होता रहता है लेकिन उसकी वजह से रात देर तक 12 बजे यां एक दो बजे तक भी तेज आवाज में गाना बजाने का शोर होता रहता है जिससे साधारण लोगों का जीना हराम हो जाता है, कोई बीमार व्यक्ति 8 घंटे का आराम भी नहीं कर पाता कृपा कर के एक pcr वैन रोज 11_12 के आस पास नेहरू नगर में राउंड पे भेजी जाए ता की ऐसी आवाजे बंद कराई जा सकें।आपका बहुत बहुत धन्यवाद

    Shelly Jain

    February 21, 2024

    ऐसे परिदृश्य में, आपको अपने इलाके के अन्य सदस्यों तक पहुंचना चाहिए जो इसी तरह की समस्या का सामना कर रहे हैं। और फिर आपको सामूहिक रूप से विवाह समारोह अधिकारियों से संपर्क करना चाहिए ताकि वे आपको अधिक गंभीरता से लें। फिर भी यदि वे आपका सहयोग नहीं करते हैं तो आपको अपने मोहल्ले के लोगों के साथ मिलकर पुलिस के पास जाना चाहिए। आप इनके खिलाफ पब्लिक न्यूसेंस के तहत शिकायत दर्ज करा सकते हैं. भारत में रात 10 बजे से सुबह 6 बजे तक लाउड स्पीकर का इस्तेमाल प्रतिबंधित है। 55 डेसिबल (दिन के दौरान) और 45 डेसिबल (रात के दौरान) से ऊपर किसी भी शोर की अनुमति नहीं है। आप ऐप स्टोर/प्ले स्टोर से एक ऐप डाउनलोड कर सकते हैं जो आपको सुबह बजने वाले लाउडस्पीकर का डेसिबल जानने में मदद कर सकता है और इसे सबूत के तौर पर इस्तेमाल कर सकते हैं। आप ‘शोर रजिस्टर’ नामक ऑनलाइन फॉर्म भी भर सकते हैं और अपनी शिकायत दर्ज कर सकते हैं।
    यदि यह बहुत समस्या उत्पन्न कर रहा है, तो आप 112 पर पुलिस को कॉल कर सकते हैं और वे आएंगे।

    Afsana iqubal

    October 1, 2023

    Main sound pollution se padeshan hoon subah 9se shaan 6baje tat box factory chalti hai mere bachhe padh nhi pate meri problem ko solve kren

    Shelly Jain

    February 21, 2024

    Aap kisi box factory se dhvani pradooshan ka anubhav kar rahe hain jo aapko aur aapake bachchon ki dhyaan kendrit karne kee kshamata ko prabhaavit kar raha hai jisse bache pads nahi paa rahe, to samasya ke samaadhaan ke lie aap kayi kaanooni kadam uthaane par vichaar kar sakate hain. Apne area mein sthaaneey shor niyamon aur adhyaadeshon se khud ko parichit karen. kayi nyaayaalayon mein sveekaary shor star aur shor gatividhiyon ke lie anumat ghanton ke sambandh mein vishisht niyam hain. Yadi box factory in niyamon ka ullanghan kar rahi hai, to aap kaanooni kaarravayi kar sakate hain. Samasya ki report sthaaneey adhikaariyon, jaise paryaavaran ya shor niyantran kaaryaalay, ya sthaaneey police ko karen. Ve sthiti kee jaanch karane aur shor niyamon ko laagu karane mein saksham ho sakte hain. Yadi dhvani pradooshan gambheer hai aur aapakee adhyayan karne ki kshamata ko baadhit kar raha hai, to aap box factory ke khilaaph nirodhak aadesh ya nishedhaagya praapt karne ki sambhaavana talaash sakte hain, jiske tahat kaanooni taur par unhen vishisht ghanton ke dauraan shor ke star ko kam karane ki aavashyakata hogi.

    Narendra Kumar

    October 28, 2023

    Ghar ke pass mein bahut jyada awaaz aati hai factory ki

    Shelly Jain

    February 21, 2024

    The tort of a private nuisance has been committed for which the aggrieved party should send a legal notice stating the grievances, if it is not acknowledged by neighbours then we can file a civil suit and claim damages for mental distress suffered and we can plead an order of injunction from the recognized court. Further, they should be instructed by the higher authority about the decibel limit and reasonable time one should adopt for carrying out such acts.

    आर. पी.शर्मा (वरिष्ठ नागरिक)

    November 9, 2023

    प्लास्टिक उत्पादों का मजदूरी पर निर्माण कार्य (भारी मशीनों द्वारा) से उत्पन्न ध्वनि के कारण सर दर्द और दैनिक कार्य संपन्न करने में परेशानी।

    Shelly Jain

    February 21, 2024

    इस स्थिति में, प्लास्टिक उत्पादों के निर्माण कार्य से उत्पन्न होने वाली ध्वनि प्रदूषण विशेष रूप से कठिनाइयों का कारण बनती है जो मजदूरों को रोजमर्रा के कार्यों को निष्पादित करने में सरदर्द और परेशानी पहुंचाती है। निर्माण कार्य के दौरान इस प्रकार की ध्वनि प्रदूषण के कानूनी प्रावधानों की बड़ी प्रभाविता होती है। कार्यकर्ताओं के स्वास्थ्य और सुरक्षा के नियमों के तहत, कामकाजी को अपने कर्मचारियों के लिए एक सुरक्षित कार्यालय प्रदान करने की अपेक्षा की जाती है, जिसमें ध्वनि के प्रकोप से संबंधित जोखिमों को कम करना शामिल है। ध्वनि प्रदूषण को उचित रूप से संबोधित करने की असफलता कामकाजी के लिए उत्तरदायीता का कारण बन सकती है, जिसमें ग़लती के लिए धनराशि या मुक़दमा का ख़तरा शामिल है। इसके अलावा, स्थानीय पर्यावरणीय कानून भी मामले में शामिल हो सकते हैं, जिसमें प्राधिकृत अधिकारी ध्वनि स्तर नियमों का पालन करने और अवहेलना के लिए दंड देने का अधिकार रखते हैं। इसलिए, ऐसी गतिविधियों में शामिल कंपनियों के लिए ध्वनि प्रदूषण को कम करने और उनके कर्मचारियों का कल्याण सुनिश्चित करने के लिए प्रोत्साहक उपाय अधिकारियों को उठाने की ज़रूरत है।

    Ravi Kashyap

    November 16, 2023

    शोर हमारे काम, आराम, नींद और संचार को बाधित कर सकता है। यह एक पर्यावरण प्रदूषक है जो हमारी सुनवाई को नुकसान पहुंचा सकता है और अन्य मनोवैज्ञानिक, और संभवतः रोग संबंधी प्रतिक्रियाओं का कारण बन सकता है।

    Shelly Jain

    February 21, 2024

    पुलिस स्टेशन का प्रभारी अधिकारी, पुलिस आयुक्त या कोई भी अधिकारी (पुलिस उपाधीक्षक के पद से नीचे का नहीं) निम्नलिखित कार्रवाई कर सकता है: ध्वनि उपकरण जब्त करना, माइक्रोफोन या लाउडस्पीकर का उपयोग बंद करना, आदि। जरूरत पड़ने पर नियंत्रण बोर्ड और शोर पर रोक लगाने के लिए लिखित आदेश प्राप्त करना भी अगला कदम हो सकता हैI

    आर. पी.शर्मा (वरिष्ठ नागरिक)

    November 17, 2023

    कृपया समस्या के समाधान का उपाय बताने की कृपा करे।धन्यवाद।

    Shelly Jain

    February 21, 2024

    पुलिस स्टेशन का प्रभारी अधिकारी, पुलिस आयुक्त या कोई भी अधिकारी (पुलिस उपाधीक्षक के पद से नीचे का नहीं) निम्नलिखित कार्रवाई कर सकता है: ध्वनि उपकरण जब्त करना, माइक्रोफोन या लाउडस्पीकर का उपयोग बंद करना, आदि। जरूरत पड़ने पर नियंत्रण बोर्ड और शोर पर रोक लगाने के लिए लिखित आदेश प्राप्त करना भी अगला कदम हो सकता हैI

    raju

    November 18, 2023

    Bahut jyada hi shor ho raha hai

    Shelly Jain

    February 21, 2024

    पुलिस स्टेशन का प्रभारी अधिकारी, पुलिस आयुक्त या कोई भी अधिकारी (पुलिस उपाधीक्षक के पद से नीचे का नहीं) निम्नलिखित कार्रवाई कर सकता है: ध्वनि उपकरण जब्त करना, माइक्रोफोन या लाउडस्पीकर का उपयोग बंद करना, आदि। जरूरत पड़ने पर नियंत्रण बोर्ड और शोर पर रोक लगाने के लिए लिखित आदेश प्राप्त करना भी अगला कदम हो सकता हैI

    Subhana

    December 3, 2023

    हमारे पास वकील के लिए पैसे नहीं h तो कहा siqayat kre

    Shelly Jain

    February 21, 2024

    किसी व्यक्ति ने जब कानूनी सहायता की आवश्यकता महसूस की होती है, तो उसकी कुछ निर्धारित आय सीमा के तहत ही उसे कानूनी सहायता मिल सकती है, जो राज्य के आधार पर भिन्न होती है। निम्नलिखित राज्यों के लिए आय सीमा दी गई है:

    1. रुपए 3,00,000: आंध्र प्रदेश, असम, गोवा, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, झारखंड, केरला, महाराष्ट्र, मणिपुर, ओडिशा, पंजाब, सिक्किम, तमिलनाडु, उत्तराखंड, अंडमान और निकोबार द्वीप, चंडीगढ़ यूटी
    2. रुपए 1,50,000: बिहार, छत्तीसगढ़, राजस्थान, त्रिपुरा
    3. रुपए 1,00,000: अरुणाचल प्रदेश, गुजरात, जम्मू और कश्मीर, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, मेघालय, नागालैंड, तेलंगाना, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, दमन और दीव, पुडुचेरी
    4. रुपए 25,000: मिज़ोरम
    5. रुपए 15,000: दादर और नगर हवेली यूटी
    6. रुपए 9,000: लक्षद्वीप
    7. सामान्य – रुपए 1,00,000, वरिष्ठ नागरिक – रुपए 2,00,000, त्रान्सजेंडर – रुपए 2,00,000: दिल्ली

    कानूनी सहायता प्राप्त करने के लिए आप निम्नलिखित प्राधिकृतियों के पास जा सकते हैं:
    1. आपके तालुक की लीगल सर्विसेस कमेटी, जो उस तालुक की न्यायालय की परिसर में है।
    2. जिला लीगल सर्विसेस अथॉरिटी (डीएलएसए) जो जिले के मुख्यालय की परिसर में है।
    3. संबंधित राज्य लीगल सर्विसेस अथॉरिटी (एसएलएसए) (जिनके केस का पैनल स्थानीय स्तर पर बनाए जाते हैं)।
    4. संबंधित उच्च न्यायालय लीगल सर्विसेस कमेटी जो संबंधित उच्च न्यायालय की परिसर में है।
    5. सर्वोच्च न्यायालय

    Mukesh Verma

    December 10, 2023

    There is a religious meeting near our house every Sunday from 10 am to 3 pm and those people shout very loudly. Due to which our children cannot study and we cannot sit on our terrace. Please take action on this, so that we too can spend our Sunday peacefully.

    Shelly Jain

    February 21, 2024

    We are deeply sorry to hear that the religious meetings near your house are disrupting your children’s progress. Nyaaya endeavors to provide you with legal information, solutions and advice to resolve your pertinent issues. However, we are not authorized to act on the behalf of any individual or group of individuals. We advise you to check in if the noise levels of this activity exceed the zonal noise limits set by your respective State Government, so that you can take appropriate action against such disruptive meetings.

    In the case that it exceeds the zonal noise standards by 10 dB(A), you may complain to the nearest police station, call 100 or file an online complaint with your State’s police complaint portal. You may also file the complaint with the Central or State Pollution Control Board. These authorities have the power to issue a written order for preventing, prohibiting, controlling or regulating such disruptive noises.

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