प्रत्येक राज्य सरकारें, विभिन्न स्थानों को निम्नलिखित क्षेत्रों में वर्गीकृत करती है, जहां भिन्न-भिन्न ध्वनि सीमाओं का पालन किया जाना है:
• औद्योगिक
• व्यावसायिक
• आवासीय
• साइलेंट ज़ोन (ध्वनि वर्जित क्षेत्र)
विकास प्राधिकरणों, स्थानीय निकायों और अन्य प्राधिकरणों को विकास कार्यों की योजना बनाते समय या नगर, राज्य से संबंधित कार्यों को करते समय शोर के खतरे से बचने और ध्वनि मानकों को बनाए रखने की जिम्मेदारी होती है। उदाहरण के लिए, सुप्रीम कोर्ट ने एक मामले में, एक बर्तन निर्माता के कारोबारी से शोर को कम करने और इसे ध्वनि सीमा के भीतर लाने के लिए जवाब माँगा, क्योंकि इससे निकलने वाली आवाज़ आस-पास के शिक्षकों, छात्रों और पड़ोसियों को परेशान कर रही थी।
भारत में ध्वनि सीमा से संबंधित मानक
क्षेत्र या ज़ोन के आधार पर, ध्वनि की सीमाएं (मानक) तय होता है, जिसे बनाए रखने की आवश्यकता होती है। अगर ध्वनि का स्तर इस तय सीमा (मानक) से ऊपर चला जाता है, तो यह ध्वनि प्रदूषण माना जाएगा।
| क्षेत्र या ज़ोन | dB(A) Leq* में तय सीमा (दिन में सुबह 6.00 बजे से रात 10.00 बजे तक का समय) | dB(A) Leq* में तय सीमा (रात में 10.00 बजे से सुबह 6.00 बजे तक का समय) |
| औद्योगिक क्षेत्र | 75 | 70 |
| व्यावसायिक क्षेत्र | 65 | 55 |
| आवासीय क्षेत्र | 55 | 45 |
| साइलेंस जोन/मौन क्षेत्र | 50 | 40 |
अगर आप उपर की तालिका में दी गई इन सीमाओं का उल्लंघन करते हैं, तो आपको कानून के तहत जुर्माना और जेल की सजा होगी।

Siya
November 13, 2023
Humara yaha per patke fod rehe h jis wajah se logo ko jhut jada samasya ho rahi hai kripya karke please hamari request accept ki ye patake na fode es potution se hume problem hori h hum smja rehe h but ye samajh ni rehe hai 🙏🙏🙏 please humri madad kre
Lokesh dhamana
June 22, 2026
Uday ram Nayak bhopaji uski mrji hove us time Saund chlata h or tej awaj m chalata h puri puri rat tak
Pura mohla presan h eska kuch kiya Jaye