सेंट्रल एडॉप्शन रिसोर्स अथॉरिटी के आंकड़ों के मुताबिक, अप्रैल 2021 से मार्च 2022 तक कुल 3,405 एडॉप्शन हुए हैं।

गोद लेना किसे कहते हैं?

आखिरी अपडेट Aug 18, 2022

‘गोद लेना’ वह प्रक्रिया है जिसके माध्यम से गोद लेने वाले भावी माता-पिता कानूनी रूप से बच्चे की जिम्मेदारी लेते हैं, जिसमें बच्चे को पहले से ही दिए गए सभी अधिकार, विशेषाधिकार और जिम्मेदारियां शामिल हैं। गोद लेने की कानूनी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद, बच्चे को उनके असली माता-पिता से स्थायी रूप से अलग कर दिया जाता है और उन्हें गोद लेने वाले माता-पिता का बच्चा माना जाता है।

भारत में, गोद लेने के कानून माता-पिता और बच्चे के धर्म पर आधारित हैं। आप नीचे दिए गए विकल्पों में से चुन सकते हैं कि कौन सा कानून आप पर लागू होता है।

अगर आप हिंदू, बौद्ध, जैन और सिख हैं

अगर आप एक हिंदू, बौद्ध, जैन या सिख हैं (सामूहिक रूप से हिंदू के रूप में संदर्भित) तो आपके पास हिंदू दत्तक कानून के तहत गोद लेने का विकल्प है, जिसे हिंदू दत्तक तथा भरण-पोषण अधिनियम,1956/हिन्दू एडॉप्शन एंड मेंटेनेंस एक्ट,1956 (HAMA) कहा जाता है। इसमें हिंदू बच्चों को गोद लेने का प्रावधान है। यदि आप मुस्लिम, ईसाई, पारसी या यहूदी या अनुसूचित जनजाति से हैं तो आप इस कानून के तहत गोद नहीं ले सकते।

अन्य सभी धर्मों के लिए

अगर आप किसी धार्मिक कानून के तहत गोद नहीं लेना चाहते हैं या फिर आप उस कानून के तहत गोद नहीं ले सकते, तो आपके पास किशोर न्याय (बच्चों की देखभाल और संरक्षण) अधिनियम, 2015 (JJ Act) के तहत गोद लेने का विकल्प है, जो एक सामान्य दत्तक कानून है जिसके तहत किसी भी धर्म के कोई भी व्यक्ति हिंदू, अनुसूचित जनजाति आदि सहित किसी भी धर्म के बच्चों को गोद ले सकते हैं। इस कानून के तहत गोद लेने की प्रक्रिया कैसे काम करती है, इसे समझने के लिए और पढ़ें। अगर आप समझना चाहते हैं कि आपको किस कानून के तहत गोद लेना चाहिए तो नीचे दी गई तालिका देखें:

हिन्दू एडॉप्शन एंड मेंटेनेंस एक्ट, 1956 (HAMA)

(हिंदू कानून)

किशोर न्याय (बच्चों की देखभाल और संरक्षण) अधिनियम, 2015

(गैर-धार्मिक कानून)

गोद लेने वाले माता-पिता केवल हिंदू, बौद्ध, जैन या सिख हो सकते हैं। अगर आप मुस्लिम, ईसाई, पारसी या यहूदी हैं या अनुसूचित जनजाति से हैं तो आप इस कानून के तहत गोद नहीं ले सकते। गोद लेने वाले माता-पिता किसी भी धर्म, जाति या जनजाति के हो सकते हैं।
केवल हिंदू बच्चों को ही गोद लिया जा सकता है।  किसी भी धर्म के बच्चे को गोद लिया जा सकता है।
15 साल तक के बच्चों को गोद लिया जा सकता है। 18 साल तक के बच्चों को गोद लिया जा सकता है।
गोद लेने की प्रक्रिया को विस्तार से नहीं दिया गया है, आमतौर पर बच्चे को गोद लेने के लिए एक पत्र पर हस्ताक्षर किया जाता है। विभिन्न श्रेणियों के लिए गोद लेने की प्रक्रिया अलग-अलग है, और यह इस पर निर्भर करता है कि आप कौन हैं:

भारतीय निवासी द्वारा गोद लेना (भारत में रहने वाले लोग)।

भारतीय नागरिकों द्वारा किसी दूसरे देश के बच्चे को गोद लेने की प्रक्रिया (गैर-धार्मिक कानून)

भारत के प्रवासी नागरिक (ओ.सी.आई) या भारत में रहने वाला एक विदेशी नागरिक द्वारा गोद लेने की प्रक्रिया (गैर-धार्मिक कानून)

ओ.सी.आई या अनिवासी भारतीय (एन.आर.आई) या किसी दूसरे देश में रहने वाले विदेशी नागरिक (गैर-धार्मिक कानून) द्वारा गोद लेना

सौतेले माता-पिता द्वारा गोद लेने की प्रक्रिया (गैर-धार्मिक कानून)

• रिश्तेदारों द्वारा गोद लेने की प्रक्रिया (गैर-धार्मिक कानून)

 

 

 

 

 

 

 

 

 

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Related Resources

कौन गोद ले सकता है?

गैर-धार्मिक कानून के तहत गोद लेने के लिए, आपको एक भावी माता-पिता के रूप में माने जाने के लिए निम्नलिखित शर्तों को पूरा करना होगा |

शिकायत/ सहायता और समर्थन

नीचे पोर्टल और हेल्पलाइन नंबर दिए गए हैं, जिनका उपयोग आप शिकायत दर्ज करने, उनका निदान करने, पूछताछ करने, और समर्थन मांगने के लिए कर सकते हैं।

एलजीबीटी व्यक्तियों के लिए राशन कार्ड

राशन कार्ड तब सहायक होते हैं, जब आप सरकार द्वारा स्थापित दुकानों से कम रियायती मूल्य पर आवश्यक चीजें, जैसे चावल, अनाज आदि लेना चाहते हैं।

गोद लेने के प्रकार

नीचे दिए गए गोद लेने के प्रकार केवल आप पर तभी लागू होते हैं जब आप गोद लेने से संबंधित गैर-धार्मिक कानून का पालन करने का निर्णय लेते हैं।

रिश्तेदारों द्वारा गोद लेने की प्रक्रिया (गैर-धार्मिक कानून)

एक बच्चे के रिश्तेदार के तौर पर, गोद लेने के लिए गैर-धार्मिक कानून का पालन करते हुए, आप भारत के भीतर और भारत के बाहर (अंतर्देशीय दत्तक) भी बच्चे को गोद ले सकते हैं। भारत के भीतर दत्तक ग्रहण या गोद लेना (अंतरादेशीय दत्तक ग्रहण) अंतरादेशीय दत्तक ग्रहण यानी भारत के भीतर ही रिश्तेदारों द्वारा […]

न्यायालयों की भूमिका

गोद लेने की प्रक्रिया के दौरान कोर्ट बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। कोर्ट द्वारा निभाई गई कुछ महत्वपूर्ण भूमिकाएं नीचे दी गई हैं |