चोरी के प्रकार

केवल निजी सामान चोरी होने पर ही चोरी करना एक अपराध नहीं है। चोरी के कई अन्य रूप हैं और कानून उन लोगों को दंडित करता है, जो स्थिति के आधार पर चोरी करते हैं, और साथ ही वे कौन हैं, इस पर निर्भर करते हैं। विभिन्न प्रकार की चोरी के कुछ उदाहरण नीचे दिए गए हैं:

• चोरी की गई वस्तु

निजी सामान

बिजली

पशु

वाहन

कंप्यूटर से संबंधित डेटा

घोटाला

• स्थिति

यात्रा करते समय

पिक-पॉकेटिंग (जेब काटना) और स्नैचिंग (छीनना)

दुकानों से सामान चोरी करना (शॉपलिफ्टिंग)

घर में चोरी करने के लिए घुसना(हाउस ब्रेक-इन)

चोरी के दौरान हिंसा का सामना करना

• चोरी करने वाला व्यक्ति

बच्चे द्वारा चोरी

सहायक (हेल्प)/नौकर द्वारा चोरी

किसी को चोरी करने में मदद करना

रैगिंग माने जाने वाले कृत्य

छात्रों के अनेक कृत्‍यों को कानून के तहत रैगिंग माना जाता है। रैगिंग के रूप में माने जाने वाले कुछ कृत्‍य हैं-

मानसिक दुर्व्‍यवहार

किसी छात्र को मानसिक क्षति पहुंचाना कानून के तहत रैगिंग माना जाता है। इसमें ये ये शामिल हो सकते हैं-

  • किसी छात्र द्वारा किया गया कोई भी आचरण, चाहे वह लिखित, मौखिक या व्यवहार-संबंधी हो, जो किसी दूसरे छात्र के साथ छेड़छाड़ या क्रूर व्यवहार करता हो। उदाहरण के लिए, किसी छात्र को अपमानजनक नामों से बुलाना।
  • उपद्रवी या अनुशासनहीन व्यवहार जिसके कारण किसी भी छात्र को झुंझलाहट, कठिनाई या मानसिक नुकसान हो सकता है। इसमें ऐसे मानसिक नुकसानों, झुंझलाहट या कष्ट की आशंका या डर भी शामिल हैं। उदाहरण के लिए, एक छात्र की नोटबुक्‍स चोरी करना और फेंक देना।
  • एक छात्र को एक ऐसा काम करने के लिए कहना, जो वह सामान्य रूप से नहीं करेगा, और जिसके कारण उसे शर्म, पीड़ा या शर्मिंदगी महसूस होती है, और उसके मानसिक स्‍वास्‍थ्‍य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। उदाहरण के लिए, भरी कक्षा में किसी छात्र से मजबूरन डांस करवाना।
  • कोई भी काम जो एक छात्र के मानसिक स्वास्थ्य और आत्मविश्वास को प्रतिकूल प्रभावित करता है। उदाहरण के लिए, किसी छात्र से कक्षा के सामने मजबूरन डांस करवाना और उसके लिए उसकी खिल्‍ली उड़ाना।
  • एक ऐसा कृत्‍य या दुर्व्‍यवहार, चाहे वह लिखित हो, मौखिक या ऑनलाइन (ईमेल, पोस्ट आदि), जिसके परिणामस्वरूप एक छात्र असहज हो जाए। इसमें प्रताड़‍ित होने वाले छात्र की कीमत पर इस तरह के कृत्‍य में भागीदारी के द्वारा मजे लेना शामिल है। उदाहरण के लिए, किसी छात्र के बारे में ऑनलाइन प्लेटफार्मों पर अफवाहें फैलाना।

शैक्षणिक क्रि‍याकलाप में व्‍यवधान

रैगिंग किसी छात्र की पढ़ाई-लिखाई में खलल डाल सकती है। यदि कोई भी छात्र किसी अन्य छात्र की नियमित शैक्षणिक गतिविधि को रोकता या बाधित करता है, तो यह रैगिंग है। उदाहरण के लिए, यदि कोई वरिष्ठ छात्र किसी जूनियर छात्र को कक्षा में इतना परेशान करता है कि वह कक्षाओं में जाना बंद कर देता है, तो इसे रैगिंग माना जा सकता है।

किसी छात्र का उपयोग करना या उसका शोषण करना

रैगिंग दूसरे छात्र के शोषण का रूप ले सकती है। उदाहरण के लिए, यदि कोई छात्र अपना होमवर्क किसी और छात्र से करवाता है, तो उसे रैगिंग माना जा सकता है। निम्नलिखित को रैगिंग के रूप में माना जाता है-

  • किसी व्यक्ति / समूह को सौंपे गए शैक्षणिक कार्यों को पूरा करने के लिए किसी भी छात्र का शोषण करना। उदाहरण के लिए, एक छात्र द्वारा कुछ अन्य छात्रों के होमवर्क असाइनमेंट करवाना।
  • पैसे की जबरन वसूली या किसी भी छात्र से जबरन खर्च करवाना। उदाहरण के लिए, एक छात्र से दूसरे छात्र/छात्रों के खर्चों का भुगतान करवाना।

शारीरिक शोषण

रैगिंग शारीरिक शोषण और हिंसा का रूप ले सकती है। निम्नलिखित को रैगिंग के रूप में माना जाता है-

  • उपद्रवी या अनुशासनहीन व्यवहार, जिसके कारण किसी भी छात्र को शारीरिक नुकसान होने की संभावना है, या कोई भी ऐसा काम जो किसी को शारीरिक नुकसान पहुंचाता है या पहुंचा सकता है या ऐसा डर पैदा कर सकता है। उदाहरण के लिए, एक छात्र को पीटने की धमकी देना।
  • किसी छात्र को एक ऐसा काम करने के लिए कहना, जो वह सामान्य रूप से नहीं करेगा, और जिसके कारण उसे शर्म, पीड़ा या शर्मिंदगी महसूस होती है, और उसके शारीरिक हाल-चाल पर बुरा असर पड़ता है। उदाहरण के लिए, एक छात्र की पिटाई करना क्योंकि उसने किसी काम को करने के लिए वरिष्ठ के आदेशों का पालन नहीं किया था।
  • मारपीट, कपड़े उतरवाने, जबरन अश्लील और भद्दी हरकतें या इशारे आदि समेत यौन शोषण। उदाहरण के लिए, एक महिला छात्रा को जबरन कपड़े उतारने के लिए कहना।
  • कोई भी ऐसा काम जो किसी छात्र को शारीरिक नुकसान या किसी अन्य खतरे का कारण बनता है। मसलन, एक छात्र के भोजन में जुलाब डालना।

किसी अन्‍य छात्र के साथ भेदभाव करना

रैगिंग दूसरे छात्र के खिलाफ भेदभाव और पूर्वाग्रह का रूप ले सकती है। आपकी त्वचा, जाति, धर्म, जाति, नस्ल, लिंग, यौनिक रुझान, रंग-रूप, राष्ट्रीयता, क्षेत्रीय मूल, भाषाई पहचान, जन्म स्थान, निवास स्थान या आर्थिक पृष्ठभूमि के आधार पर किसी भी दुर्व्‍यवहार को रैगिंग के रूप में माना जाता है। उदाहरण के लिए, यदि किसी छात्रा को उसके क्षेत्रीय मूल के आधार पर लगातार छेड़ा जाता है और उसे अपशब्‍द कहे जाते हैं, या उसका उपहास किया जाता है क्योंकि वह अन्य छात्रों की तुलना में कमतर सामाजिक-आर्थिक स्‍तर से आती है, तो इसे रैगिंग माना जा सकता है।

रैगिंग के पीछे की मंशा कोई मायने नहीं रखती; भले ही यह मज़े के लिए किया गया हो, या खुशी हासिल करने के लिए, या अधिकार या श्रेष्ठता जतलाने के लिए-भारतीय कानून के तहत रैगिंग एक अपराध है।

यदि आपकी रैगिंग की जा रही है, तो आप कॉलेज के अधिकारियों या पुलिस से शिकायत कर सकते हैं।

अधिक जानकारी के लिए इस सरकारी संसाधन को पढ़ें

‘सहमति’ (कनसेन्ट)

एक वयस्क और एक बच्चे के बीच

वयस्क = उम्र 18 साल और उससे ज्यादा

बच्चा = उम्र 18 साल से कम

कानून यह नहीं मानता कि बच्चे में यौन संबंध करने के लिए सहमति देने की क्षमता है। इसका मतलब यह है कि यदि कोई वयस्क किसी बच्चे को किसी भी प्रकार की यौन गतिविधि में शामिल होने के लिए कहता है, और बच्चे ने यदि स्पष्ट रूप से हाँ कहा, या यह संकेत दिया कि इसमें उसकी सहमति हैं, तो भी इस गतिविधि को बाल यौन उत्पीड़न के रूप में माना जाएगा।

बच्चों के बीच यौन संबंध

यदि दो बच्चे यौन गतिविधियों में स्वेच्छा से शामिल होते हैं, तो भी इसे अवैध माना जाता है। लड़कियों और लड़कों, दोनो के लिए यौन गतिविधि के लिये सहमति देने की न्यूनतम उम्र 18 साल है।

यदि 16 वर्ष से अधिक उम्र का कोई लड़का, 18 साल से कम उम्र की लड़की के साथ किसी भी यौन गतिविधि में संलग्न/लिप्त होता है तो उसे अपराध माना जाता है, और यदि इस गतिविधि की रिपोर्ट की जाती है, तो लड़के पर कानून के तहत मुकदमा चलाया जा सकता है।

LGBTQ+ व्यक्ति को उत्पीड़न और हिंसा की संभावनाएं

आपको निम्नलिखित कारणों के चलते कई तरह के उत्पीड़न या हिंसा का सामना करना पड़ सकता है:

  • अपनी लिंग पहचान के लिए, जब आपको विशेष रूप से, जन्म में मिले लिंग से अलग स्वयंनिर्धारित लिंग से पहचाने जाने के चलते तंग किया जाएः उदाहरण के लिए, पुलिस द्वारा तीसरे लिंग के (ट्रांसजेंडर) व्यक्तियों को गिरफ्तार करने और उन्हें परेशान करने के लिए, बहुत बार भिखारी विरोधी कानूनों का उपयोग किया जाता है।
  • अपने यौन अभिविन्यास के अनुरूप, आपकी यौन प्राथमिकता और आपके साथी के चयन विकल्प के चलते, हो सकता है आपको तंग किया जाए। उदाहरण के लिए, बहुत से विचित्रलिंगी (क्वीर) व्यक्ति अपने यौन अभिविन्यास के सार्वजनिक होने पर सहज महसूस नहीं करते हैं, और ऐसे मामलों में कुछ लोग उनके लिंग को गुप्त रखने के बदले उनसे पैसे के लिए ब्लैकमेल कर सकते हैं।
  • यदि आप इस तरह के उत्पीड़न या हिंसा का सामना करते हैं, तो आपको शिकायत करने और सुरक्षा प्राप्त करने का अधिकार है, भले ही वो व्यक्ति जो आपको परेशान कर रहा है या चोट पहुंचा रहा है, आपके परिवार का ही सदस्य है, या शिक्षक है, या कोई और। तत्काल सुरक्षा के लिए, आप सरकारी हेल्पलाइन पर कॉल कर सकते हैं, जो आपको सलाह देगी कि आपको क्या कदम उठाने चाहिये, और आपके निवास स्थान पर आपकी सहायता करने के लिये पुलिस को भी भेज सकती है।

हिंसा के वे प्रकार, जिसका आपको सामना करना पड़ सकता हैं वे इस रूप में हो सकते हैं:

  • यौन हिंसा, जैसे बलात्कार या अन्य यौन अपराध, जैसे अनुचित स्पर्श, पीछा करना आदि। आपको विभिन्न प्रकार की ऑनलाइन यौन हिंसा का भी सामना करना पड़ सकता है।
  • शारीरिक हिंसा, जैसे कोई आपको घायल कर दे, चोट पहुंचा दे, या आपको घर में बंद रक्खे, आदि।
  • मनोवैज्ञानिक हिंसा, जैसे कोई व्यक्ति आपको चोट पहुंचाने की धमकी दे, आपको सहायता करने के नाम पर, या धन आदि के लिए ब्लैकमेल करे। यह आपके साथ ऑनलाइन भी हो सकता है।
  • यदि आप प्राथमिकी (प्रथम सूचना रिपोर्ट) दर्ज कराने के लिए पुलिस स्टेशन जाने का निर्णय लेते हैं, तो जाने से पहले आप में आत्मविश्वास होना, और कानून की पूरी जानकारी होना बहुत ज़रूरी है, क्योंकि ऐसी स्थितियां भी हो सकती हैं, जहां आप पुलिस अधिकारियों द्वारा प्रताड़ित किए जाएं। उदाहरण के लिए, पुलिस अधिकारी आपकी बात सुनने से इंकार कर दे, क्योंकि आप तीसरे लिंग (ट्रांसजेंडर) के एक व्यक्ति हैं, इसलिए यह आपके लिये महत्वपूर्ण है कि आप उस कानून को जानें, जिसके तहत आप शिकायत दर्ज कर सकते हैं।

दहेज की मांग की शिकायत

आप इस कानून के तहत शिकायत कब दर्ज कर सकते हैं, इसकी कोई समय सीमा नहीं है। आप शादी के बाद कभी भी दहेज की शिकायत दर्ज करा सकती हैं। हालांकि, आप तलाक के बाद दहेज की शिकायत दर्ज नहीं करा सकती हैं।

दहेज लेने, देने, मांगने और इसका विज्ञापन देना अवैध है। अगर आपको अपनी शादी के समय दहेज देना पड़ा है या आपके परिवार के किसी व्यक्ति ने आपकी ओर से दहेज दिया है या आप व्यक्तिगत रूप से किसी ऐसे व्यक्ति को जानते हैं, जिसे शादी के लिए दहेज देना पड़ा है। निम्न विकल्पों में से किसी भी विकल्प से आप शिकायत दर्ज कर सकते हैं:

  • स्थानीय थाने में एफआईआरदर्ज करें।
  • अपने जिले के दहेज निषेध अधिकारी से शिकायत करें।
  • दहेज के मामले के लिए उपयुक्त न्यायिक प्राधिकरण (मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट या न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी) को लिखें।
  • सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त किसी भी सामाजिक कल्याण संस्थान या मान्यता प्राप्त कल्याण संगठन से संपर्क करें और उनके माध्यम से अपनी शिकायत पर कार्रवाई करें।
    अगर आपको दहेज देने के लिए मजबूर किया गया है तब भी आप अपराधियों के खिलाफ शिकायत दर्ज करा सकती हैं।

अगर आपको दहेज देने के लिए मजबूर किया गया है और आपने पुलिस में शिकायत की तो दहेज के अपराध का आरोप आपके खिलाफ नहीं लगाया जाएगा।

नाबालिग की सहमति

18 साल से कम उम्र की लड़की (नाबालिग) के साथ संभोग (सेक्स ) को बलात्कार माना जाता है, भले ही लड़की संभोग के लिए सहमत हो। 

उदाहरण के लिए, अगर कोई पुरुष 17 साल की लड़की के साथ इसकी सहमति से यौन संबंध बनाता है, तो इसे बलात्कार माना जाता है, भले ही लड़की इसके लिए सहमत हो।

इस कानून के तहत किसी व्यक्ति के क्या-क्या अधिकार हैं?

ट्रिगर वॉर्निंग: निम्नलिखित विषय में शारीरिक हिंसा पर जानकारियां दी गई है, जिससे कुछ पाठकों को असहज महसूस हो सकता है। 

एसिड अटैक के सर्वाइवर को कानून के तहत निम्नलिखित अधिकार प्राप्त हैं:

चिकित्सा उपचार लेने का अधिकार 

एसिड अटैक के सर्वाइवर को सरकारी और प्राईवेट अस्पतालों में इलाज कराने का अधिकार है। सुप्रीम कोर्ट ने एसिड अटैक अपराधों के लिए दिशा-निर्देश जारी किए हैं, जहां उन्होंने कहा है कि:

• कोई भी अस्पताल या क्लिनिक विशेष सुविधाओं की कमी का बहाना देते हुए एसिड अटैक सर्वाइवर के इलाज से इनकार नहीं कर सकता।

• सरकारी और प्राइवेट अस्पतालों को सर्वाइवर को प्राथमिक चिकित्सा और चिकित्सा उपचार निःशुल्क उपलब्ध कराना होगा।

कोर्ट ने पीड़ितों के इलाज और पुनर्वास की जिम्मेदारी राज्य सरकार को दी है। इसके अतिरिक्त, कोर्ट राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से उन अस्पतालों के खिलाफ कार्रवाई करने की अपेक्षा करता है, जो एसिड अटैक सर्वाइवर का इलाज करने से इनकार करते हैं।

शिकायत दर्ज करने का अधिकार 

एसिड अटैक सर्वाइवर को भी अपराधी के खिलाफ शिकायत दर्ज करने का अधिकार है। सर्वाइवर के रिश्तेदार, दोस्त या परिचित, कोई भी व्यक्ति जिसने अपराध देखा है, या कोई भी व्यक्ति जिसे अपराध के बारे में पता चलता है, शिकायत दर्ज कर सकता है। अन्य व्यक्तियों की सूची देखने के लिए जो शिकायत दर्ज कर सकते हैं, यहां देखें।

दर्ज की गई शिकायत को प्रथम सूचना रिपोर्ट (“एफआईआर”) के रूप में जाना जाता है। एफआईआर एक दस्तावेज है जिसमें वह जानकारी होती है जिसे एक पुलिस अधिकारी अपराध की सूचना मिलने पर भरता है। एफआईआर दर्ज करने का तरीका जानने के लिए, आप हमारे एक दूसरे लेख ‘एफआईआर कैसे दर्ज करें’ को पढ़ सकते हैं।

किसी भी पुलिस स्टेशन में एफआईआर दर्ज की जा सकती है, भले ही वह जगह जहां अपराध हुआ है उसके अधिकार क्षेत्र में आती हो या नहीं। इसके बाद यह जानकारी अपेक्षित क्षेत्राधिकार वाले पुलिस स्टेशन को स्थानांतरित(ट्रांसफर) कर दी जाएगी। इस अवधारणा को आम तौर पर एक शून्य प्राथमिकी या जीरो एफआईआर के रूप में जाना जाता है। जीरो एफआईआर के बारे में अधिक समझने के लिए, आप ‘एफआईआर कहां दर्ज की जा सकती है’ पर हमारे लेख को पढ़ सकते हैं।

मुआवजे का अधिकार 

एसिड अटैक सर्वाइवर को राज्य सरकार से मुआवजे की मांग करने का अधिकार है। पीड़ित मुआवजा योजना को 2018 में सर्वोच्च न्यायालय द्वारा अनुमोदित किया गया था, इसे राष्ट्रीय कानूनी सेवा प्राधिकरण द्वारा तैयार किया गया था। यह योजना एसिड अटैक सर्वाइवर के साथ-साथ यौन उत्पीड़न, हत्या, अपहरण आदि सहित यौन अपराधों के लिए अनिवार्य मुआवजे का प्रावधान करती है। मुआवजे के अलावा, इस योजना के तहत, सर्वाइवर को न्यायालय द्वारा लगाये जुर्माने की राशि प्राप्त होती है, जिसका अपराधी अपराध करने के लिए भुगतान करता है।

विभिन्न राज्य सरकारों ने एसिड अटैक सर्वाइवर के लिए पीड़ित मुआवजा योजनाएं बनाई हैं। यह ध्यान में रखते हुए कि राज्य की योजनाओं में एकरूपता की कमी है, और इनमें से अधिकांश योजनाओं में निर्दिष्ट मुआवजे की राशि बहुत कम है, सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि:

• प्रत्येक सर्वाइवर को राज्य सरकार द्वारा न्यूनतम 3 लाख रुपये की राशि प्रदान की जानी चाहिए। यह न्यूनतम राशि है, और जहां आवश्यक हो, राज्य सरकार अधिक राशि प्रदान कर सकती है।

• कोई भी मुआवज़ा राशि न केवल सर्वाइवर की शारीरिक चोटों बल्कि पूर्ण रूप से जीवन जीने में उनकी अक्षमता को भी ध्यान में रखकर तय होना चाहिए। 17

• संबंधित राज्य/संघ राज्य क्षेत्र के मुख्य सचिव/प्रशासक को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि इस राशि का भुगतान किया जा चुका है।

सर्वाइवर्स ऑफ वॉयलेंस के लिए विभिन्न राज्यों की योजनाओं, वन-स्टॉप सेंटरों, सुरक्षा अधिकारियों और हेल्पलाइन नंबरों के संपर्क आदि ज़रूरी जानकारी के बारे में अधिक जानने के लिए, सर्वाइवर्स ऑफ वॉयलेंस के बारे में के लिए न्याया मैप को देखें।

भारत में राज्य पीड़ित मुआवजा योजनाओं की सूची नीचे दी गई है:

राज्य  योजना का नाम 
अरुणाचल प्रदेश अरुणाचल प्रदेश पीड़ित मुआवजा योजना, 2011
असम असम पीड़ित मुआवजा योजना, 2012
बिहार बिहार पीड़ित मुआवजा योजना, 2011
छत्तीसगढ़ छत्तीसगढ़ पीड़ित मुआवजा योजना, 2011
चंडीगढ़ चंडीगढ़ पीड़ित सहायता योजना, 2012
दादरा और नगर हवेली दादरा और नगर हवेली पीड़ित सहायता योजना, 2012
दमन और दीव दमन और दीव पीड़ित सहायता योजना, 2012
दिल्ली दिल्ली पीड़ित मुआवजा योजना, 2015
गोवा गोवा पीड़ित मुआवजा योजना, 2012
गुजरात गुजरात पीड़ित मुआवजा योजना, 2013
हरियाणा हरियाणा पीड़ित मुआवजा योजना, 2013
हिमाचल प्रदेश हिमाचल प्रदेश (अपराध का शिकार) मुआवजा योजना, 2012
जम्मू और कश्मीर जम्मू और कश्मीर पीड़ित मुआवजा योजना, 2013
झारखंड झारखंड पीड़ित मुआवजा योजना, 2012
कर्नाटक कर्नाटक पीड़ित मुआवजा योजना, 2011
केरल केरल पीड़ित मुआवजा योजना, 2014
लक्षद्वीप लक्षद्वीप पीड़ित सहायता योजना, 2012
मणिपुर मणिपुर पीड़ित मुआवजा योजना, 2011
मेघालय मेघालय पीड़ित मुआवजा योजना, 2014
मिजोरम मिजोरम पीड़ित मुआवजा योजना, 2011
महाराष्ट्र महाराष्ट्र पीड़ित मुआवजा योजना, 2014
मध्य प्रदेश मध्य प्रदेश पीड़ित मुआवजा योजना, 2015
नगालैंड नागालैंड पीड़ित मुआवजा योजना, 2012
उड़ीसा ओडिशा पीड़ित मुआवजा योजना, 2012
पुडुचेरी पुडुचेरी पीड़ित सहायता योजना, 2012
पंजाब पंजाब पीड़ित मुआवजा योजना, 2017
राजस्थान राजस्थान पीड़ित मुआवजा योजना, 2011
सिक्किम सिक्किम पीड़ितों को या उनके आश्रितों को मुआवजा योजना, 2011
तमिलनाडु तमिलनाडु महिला पीड़ितों / यौन उत्पीड़न / अन्य अपराधों से बचे लोगों के लिए पीड़ित मुआवजा योजना, 2018
त्रिपुरा त्रिपुरा पीड़ित मुआवजा योजना, 2012
उतार प्रदेश उत्तर प्रदेश पीड़ित मुआवजा योजना, 2014
उत्तराखंड उत्तराखंड अपराध से पीड़ित सहायता योजना, 2013
पश्चिम बंगाल पश्चिम बंगाल पीड़ित मुआवजा योजना, 2012

 

बलपूर्वक यौन व्यवहार क्या है?

[जारी चेतावनी: इस लेख में शारीरिक हिंसा, यौन हिंसा, दुर्व्यवहार और गाली-गलौज के बारे में जानकारी है जो कुछ पाठकों को विचलित कर सकती है।

बलपूर्वक यौन व्यवहार के कई रूप हैं जिनसे एक महिला का सामना हो सकता है । जैसे:

बलपूर्वक कपड़े उतारना। 

जब भी कोई व्यक्ति किसी महिला के कपड़े बलपूर्वक उतारता है या हटाने की कोशिश करता है तो यह अपराध है। यहां तक ​​कि अगर किसी अपराधी का ऐसा कोई इरादा या व्यवहार है जिससे लगता है कि वह किसी को चोट पहुंचाकर उसके कपड़े उतार सकता है, तो यह भी एक अपराध है। उदाहरण के लिए यदि कोई किसी सूनसान जगह पर किसी महिला के कपड़े जबरदस्ती उतारने की कोशिश करता है तो यह अपराध है।

इस अपराध को आमतौर पर डिसरोबिंग (नग्न कर देना) के रूप में जाना जाता है। कानून के तहत केवल पुरुष को ही इस अपराध के लिए दंडित किया जा सकता है। किसी महिला के कपड़े बलपूर्वक निकालने की सजा न्यूनतम तीन साल और अधिकतम पांच साल तक की जेल की सजा है।

बलात्कार 

रेप एक जबरदस्ती की गई हरकत है जब एक अपराधी किसी महिला के साथ बलपूर्वक यौन सम्बन्ध बनाता है या किसी के शरीर के अंगों को अपना मुंह लगाता है। इस अपराध के बारे में अधिक जानकारी बलात्कार पर लिखे हमारे इस लेख में उपलब्ध है। बलात्कार करने पर दस साल से लेकर आजीवन कारावास तक की सजा है और साथ ही जुर्माना भी है। अगर कोई व्यक्ति 14 साल से कम उम्र के बच्ची का बलात्कार करता है, तो उसे मौत की सजा दी जा सकती है।

भारत में वैवाहिक बलात्कार कोई अपराध नहीं है और अगर पति ने पत्नी के साथ बलात्कार किया है तो वह पत्नी अपने पति के खिलाफ शिकायत दर्ज नहीं करा सकती है। हालाँकि, एक पत्नी, घरेलू हिंसा के लिए पति के खिलाफ शिकायत दर्ज करा सकती है और अपने या अपने बच्चों के लिए तत्काल सुरक्षा की मांग कर सकती है। घरेलू हिंसा के बारे में हमारे इस लेख में और भी जानकारी उपलब्ध हैं।

यह कानून किस पर लागू होता है?

यह कानून किसी को भी लैंगिक चयन प्रक्रिया करने या अनुमति देने से रोकता है। यह प्रत्येक व्यक्ति पर लागू होता है जो लैंगिक चयन की प्रक्रिया में शामिल हो सकता है, जिसमें निम्नलिखित शामिल हैंः

• गर्भवती महिला;

• महिला का पति;

• महिला के रिश्तेदार;

• चिकित्सक या चिकित्सा व्यावसायिक, जो प्रसव से पूर्व निदान की प्रक्रिया का संचालन करता है; और

• अस्पताल/चिकित्सा सुविधा/प्रयोगशाला जहां प्रसव से पूर्व निदान की प्रक्रिया संचालित की जाती है।

निजी सामान की चोरी

कभी-कभी, आपका व्यक्तिगत सामान जैसे आपका फोन, महंगे गैजेट्स, बैग, वॉलेट आदि चोरी हो सकते हैं। यह कानून के तहत एक अपराध है, और चोर को 3 साल तक की जेल और/या जुर्माने के साथ दंडित किया जा सकता है।

इसके अलावा, यदि चोरी के दौरान घर में तोड़-फोड़ जैसी अन्य चीजें होती हैं, तो इसके लिए अलग-अलग दंड लागू होंगे।

यदि आपका कोई निजी सामानचोरी हो गया है, तो शिकायत करने के लिए आप जो कदम उठा सकते हैं, उन्हें समझने के लिए यहां पढ़ें।