प्रोबेट की प्रक्रिया

आखिरी अपडेट Jul 12, 2022

कुछ मामलों में आपको, एक वसीयत के लाभार्थी के रूप में अपना अधिकार स्थापित करने के लिए, उस वसीयत के ‘प्रोबेट’ को प्राप्त करना आवश्यक है। आपको प्रोबेट के लिए, अदालत में आवेदन करना होगा। यह वसीयत के निष्पादन के लिये, उसकी वास्तविकता और वैधता का, अदालत के द्वारा दिया गया प्रमाण पत्र है। ‘प्रोबेट’ प्राप्त करने का यह मतलब नहीं है कि संपत्ति पर आपका अधिकार स्थापित हो गया। पर यह निश्चित रूप से, मृतक की संपत्ति को प्रबंधित करने के लिये निर्वाहक के अधिकार का आधिकारिक प्रमाण है। हालांकि आपके लिये, प्रोबेट प्राप्त करने की कोई अधिकारिक समय सीमा नहीं है, फिर भी आपको इसमें देरी नहीं करनी चाहिए।

चेन्नै और मुंबई में रहने वाले हिंदुओं, बौद्धों, जैनों और सिखों की वसीयतों के लिए ‘प्रोबेट’ अनिवार्य है, या उस स्थिति में प्रोबेट अनिवार्य है यदि उनकी संपत्ति चेन्नै और मुंबई में है। यह कानून केरल के बाहर के ईसाइयों और कोलकाता, चेन्नै तथा मुंबई में रहने वाले पारसियों के लिये (जिनकी मृत्यु 1962 के बाद हुई हो) के मामले में लागू है। आपको वसीयत के लिए ‘प्रोबेट’ प्राप्त करने की आवश्यकता है या नहीं, इसकी पुष्टि किसी वकील से कर लें।

Comments

    संघप्रिय सदानशिवकर

    March 17, 2026

    अनुसुचित जाती के सोसायटी में किरायेदार(जो अनुसुचित जाती का नही है) उसने अनुसुचित जाती को बेच दिया तो इसमें क्या लिगल एक्शन ले सकते है

    Sikha

    July 18, 2026

    अगर किसी Scheduled Castes के लिए बनी सोसायटी/आवास योजना में ऐसा व्यक्ति, जो अनुसूचित जाति का नहीं है, पहले किरायेदार था और उसने बाद में वह मकान/प्लॉट किसी SC व्यक्ति को बेच दिया, तो सबसे पहले यह देखना जरूरी होगा कि:

    * वह व्यक्ति असली मालिक था या सिर्फ किरायेदार?
    * सोसायटी के नियम क्या कहते हैं?
    * जमीन/मकान सरकार द्वारा SC वर्ग के लिए आरक्षित योजना के तहत मिला था या सामान्य property थी?

    अगर वह सिर्फ किरायेदार था और मालिक नहीं था, तो उसे बेचने का अधिकार ही नहीं था। ऐसी स्थिति में:

    * बिक्री अवैध मानी जा सकती है,
    * धोखाधड़ी (cheating/fraud) का मामला बन सकता है,
    * सोसायटी और असली मालिक कार्रवाई कर सकते हैं।

    आप ये legal action ले सकते हैं:

    1. सोसायटी में लिखित शिकायत दें
    मांग करें कि:

    * transfer documents की जांच हो,
    * membership cancel की जाए,
    * illegal sale रोकी जाए।

    2. Sub-Registrar Office में शिकायत करें
    यदि गलत तरीके से registry हुई है।

    3. Civil Court में केस

    * sale deed cancel कराने,
    * कब्जा हटाने,
    * injunction लेने के लिए।

    4. Police Complaint
    अगर फर्जी दस्तावेज, गलत जानकारी या धोखाधड़ी हुई हो।

    5. SC welfare / Housing authority में शिकायत
    यदि मकान SC reserved scheme के तहत allot हुआ था।

    महत्वपूर्ण बात:
    अगर buyer वास्तव में SC category का है, तब भी sale तभी वैध होगी जब seller के पास बेचने का कानूनी अधिकार था। सिर्फ SC को बेच देने से transaction अपने-आप legal नहीं हो जाती।

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विल का पंजीकृत करना अनिवार्य नहीं है।

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वसीयत के लिये एक निष्पादक (Executor) की नियुक्ति

जिस व्यक्ति को आप अपनी मृत्यु के बाद, वसीयत में दिए गए अनुदेशों को निष्पादित करने अथार्त लागू करने का दायित्व सौंपते हैं, उसे आपकी विल का निष्पादक कहा जाता है।

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