चोरी क्या है?

जब कोई व्यक्ति बैमानी के इरादे से आपकी अनुमति के बिना आपकी संपत्ति ले लेता है तो उसे चोरी कहते हैं। चोरी भारत में एक अपराध है और ऐसा करने वाले व्यक्ति को 3 साल तक की जेल और/या जुर्माने से दंडित किया जा सकता है। चोरी एक संज्ञेय (कोग्निजेबल) और गैर-जमानती अपराध है।

निम्न को चोरी कहा जाता है:

आप बेईमानी से किसी की संपत्ति हड़पने की मंशा रखते हैं

बेईमानी से किसी की संपत्ति हड़पने की मंशा होती है, यानी किसी का इरादा किसी और को अवैध नुकसान पहुंचाते हुए खुद को अवैध लाभ पहुंचाना है। उदाहरण के लिए, श्याम राम के घर में घुस जाता है और राम को अवैध नुकसान पहुँचाते हुए खुद को अवैध लाभ पहुँचाने के इरादे से उसके पैसे चोरी करता है। आपने संपत्ति को हटाने के लिए सहमति नहीं ली है संपत्ति को सहमति के बिना ले लेना। उदाहरण के लिए, राम के बगीचेमें, उसका कुत्ता बंधा हुआ था, और श्याम राम से पूछे बिना उसे ले जाता है। हालाँकि, इसमें कुछ शर्तें हैं, जैसे:

• सहमति उस व्यक्ति द्वारा दी जा सकती है जो संपत्ति का मालिक है, या किसी अन्य व्यक्ति द्वारा, जो उस संपत्ति पर अधिकार रखता है

• सहमति स्पष्ट या अस्पष्ट हो सकती है

आप संपत्ति को एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाते हैं

जब किसी जंगम संपत्ति, अर्थात वह वास्तविक है और पृथ्वी से जुड़ी नहीं है, को हटा दिया जाता है, तो इसे चोरी कहा जाता है। इसके कुछ उदाहरण नीचे दिए गए हैं:

• किसी भी संपत्ति को पृथ्वी से अलग करना। उदाहरण के लिए, किसी पाइप फिटिंग को चोरी करना, जो एक कुएं से जुड़ी है।

• कुछ बाधाओं को हटाना, जिससे किसी संपत्ति को हटाया जा सकता है। उदाहरण के लिए, यदि साइकिल का ताला तोड़ दिया जाता है और साइकिल को वहां से ले जाया जाता है।

• अगर किसी संपत्ति को हटाने के लिए एक जानवर का इस्तेमाल किया जाता है। उदाहरण के लिए, यदि एक गधे को माल की गाड़ी से जोड़ा जाता है, और उस माल को चोरी करने के लिए, गधे को ले जाया जाता है।

• इसमें संपत्ति छीनने का वास्तविक कार्य शामिल है केवल निजी सामान चोरी होने पर ही चोरी एक अपराध नहीं है।

चोरी के कई अन्य रूप हैं और कानून उन लोगों को निमंलिखित बातों के आधार पे दंडित करता है:

• चोरी की गई वस्तु

• चोरी की स्थिति

• चोरी करने वाला व्यक्ति

रैगिंग क्या है?

एक शिक्षण संस्थान के किसी अन्य छात्र के खिलाफ एक छात्र द्वारा किये गये किसी भी शारीरिक, मौखिक या मानसिक दुर्व्‍यवहार को रैगिंग कहते हैं। इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि कौन सा छात्र इसे करता है या किस छात्र के साथ यह दुर्व्यवहार किया जाता है (यह एक फ्रेशर / नवागत हो सकता है या एक वरिष्ठ भी हो सकता है)-हर हाल में यह एक रैगिंग का अपराध है। रैगिंग कई कारणों से हो सकती है, जैसे आपकी त्वचा, नस्‍ल, धर्म, जाति, प्रजातीयता, जेंडर, यौनिक रुझान, रूप-रंग, राष्ट्रीयता, क्षेत्रीय मूल, आपकी बोली, जन्म स्थान, गृह स्थान या आर्थिक पृष्‍ठभूमि के कारण।

रैगिंग कई अलग-अलग रूप ले सकती है। उदाहरण के लिए, यदि कोई छात्र किसी अन्य छात्र को उसके काम करने के लिए धौंस दिखाता है या किसी छात्र को कॉलेज समारोह जैसी परिसर की गतिविधियों से बाहर रखा जाता है, तो उसे रैगिंग माना जाता है।

मानसिक चोट, शारीरिक दुर्व्‍यवहार, भेदभाव, शैक्षणिक गतिविधि में व्‍यवधान आदि सहित छात्रों के खिलाफ रैगिंग के विभिन्न रूपों को कानून, दंडित करता है।

रैगिंग पर कानून

रैगिंग पर कानून को उच्च शैक्षणिक संस्थानों में रैगिंग के खतरे को रोकने के लिए यूजीसी विनियमन, 2009 के बतौर जाना जाता है। यह विश्वविद्यालय अनुदान आयोग अधिनियम, 1956 द्वारा मान्‍यता प्राप्‍त, केंद्र सरकार द्वारा घोषित संस्थानों समेत उच्चतर अध्ययन के सभी शैक्षणिक संस्थानों में रैगिंग को प्रतिबंधित करता है। इन सब संस्थानों के भीतर, रैगिंग इस प्रकार से निषिद्ध है-

  • एक शैक्षिक संस्थान में सभी विभाग,
  • परिसर के अंदर या परिसर के बाहर, संस्‍थान के छात्रों द्वारा इस्‍तेमाल किये जाने वाले किसी भी परिवहन सहित।

रैगिंग पर कुछ शिक्षण संस्थानों के अपने नियम हैं। उदाहरण के लिए, ऑल इंडिया काउंसिल फॉर टेक्निकल एजुकेशन के पास रैगिंग पर दिशानिर्देशों की अपनी एक नियमावली है।

राज्य के कानून

कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में रैगिंग को प्रतिबंधित करने व रोकने के लिहाज़ से विभिन्न राज्यों ने कानून पारित किये हैं, जो केवल उन संबंधित राज्यों में ही लागू होते हैं। ये राज्य हैं आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र, कर्नाटक, उत्तर प्रदेश, चंडीगढ़, त्रिपुरा, आदि।

रैगिंग के लिए सज़ा

यदि कोई छात्र रैगिंग में लिप्त पाया जाता है, तो उसे या तो संस्‍थागत स्‍तर पर दंडित किया जा सकता है (उदाहरण के लिए, निलंबन द्वारा) या उसके खिलाफ पुलिस मामला दर्ज कर; भारतीय दंड संहिता, 1860 का उपयोग रैगिंग के अपराध को दंडित करने के लिए किया जा सकता है। आगे और पढ़ें

अधिक जानकारी के लिए इस सरकारी संसाधन को पढ़ें

बाल यौन उत्पीड़न के विभिन्न प्रकार

कानून ने बाल यौन उत्पीड़न के अपराध को दो मानदंडों के आधार पर विभिन्न प्रकार बनाए हैं:

1. विभिन्न प्रकार की कार्रवाई और तरीकों पर, जिसके द्वारा बच्चे का यौन उत्पीड़न किया गया है,

गैर शारीरिक

  • कोई गैर-शारीरिक यौन व्यवहार, जो इशारे, कथन और दृश्यों के माध्यम से किया गया हो।
  • बाल अश्लील चित्रण से संबंधित सृजन, वितरण, संचारण, प्रकाशन या कोई अन्य गतिविधियाँ।

शारीरिक

  • लैंगिक दृष्टि से अनुचित तरीके से बच्चे को छूना।
  • लिंग या किसी अन्य वस्तु का बच्चे के अंदर घुसाने का कृत्य।

 अपराध करने वाले व्यक्ति की विशिष्टता के आधार पर।

  • उस व्यक्ति द्वारा यौन कर्म करना, जिस पर बच्चे का विश्वास हो, या जिसका बच्चे पर अधिकार हो।

यदि आप कोई यौन अपराध करने की कोशिश भी करतेेे हैं, तो कानून के अधीन ऐसा करना भी अपराध है। इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि अपराध वास्तव मेंं किया गया था या अपराधी इस प्रयास में असफल रहा, इस तरह का प्रयास ही आपको इस अपराध के लिए उत्तरदायी ठहराएगा।

घरेलू संबंध

कानून के तहत घरेलू हिंसा से राहत पाने के लिए, आपको यह साबित करने की जरूरत है कि उत्पीड़क के साथ आपके घरेलू संबंध हैं। एक घरेलू संबंध का मतलब है कि आप अपने उत्पीड़क के साथ निम्नलिखित तरीकों में से कोई भी एक से संबंधित हैं:

  • खून द्वारा संबंधित। उदाहरण के लिए, कोई भी रिश्तेदार, जैसे आपके अंकल, आपकी बहन, आपके पिता आदि।
  •  विवाह द्वारा संबंधित। उदाहरण के लिए, आपके पति, आपकी नन्द, आपके बहनोई आदि।
  • रिश्ता जो शादी की प्रकृति के समान है, जैसे आपका लिव-इन पार्टनर
  • गोद लेने द्वारा संबंधित। उदाहरण के लिए, आपके सौतेले पिता, आपके सौतेले भाई आदि।
  • संयुक्त परिवार के रूप में साथ रहने द्वारा संबंधित। उदाहरण के लिए, संयुक्त परिवार में, आप परिवार के सभी सदस्यों जैसे कि आपके पिता, भाई/भाभी, चाचा/चाची, दादा/दादी आदि के खिलाफ शिकायत कर सकते हैं।

अदालत में जाने पर, आपको यह भी साबित करना होगा कि आप और उत्पीड़क एक ही घर में वर्तमान में रहते हैं, या अतीत में रहते थे ।

LGBTQ+ समुदाय में प्रणय और रिश्ते

18 वर्ष की आयु से ऊपर के किसी भी व्यक्ति को प्यार करने का और किसी के साथ भी यौन संबंध रखने का अधिकार है, वह भी किसी लिंग के परे। इसके पहले, एक ही लिंग के दो व्यक्तियों में आपसी सहमति के बाद भी, यौन क्रियाओं में संलग्न होना कानूनन दंडनीय अपराध था, जिसमें जेल की सज़ा और जुर्माना दोनों ही हो सकते थे। सन् 2018 के बाद इस प्रकार की यौन क्रियाएं, भारतीय कानून के तहत, दंडनीय नहीं हैं। अब आपको न कोई परेशान कर सकता है, न चोट पहुंचा सकता है, न पुलिस से शिकायत कर सकता है, ना ही आपको जेल भेजा जा सकता है, प्रताड़ित किया जा सकता है, और ना ही आप पर किसी प्रकार की हिंसा की जा सकती है:

आपके यौन अभिविन्यास के चलते

इसका मतलब यह है कि आपका लैंगिक आकर्षण किसी भी लिंग के व्यक्ति के प्रति होने के चलते आप पर कोई हिंसा नहीं की जा सकती है, चाहे वह व्यक्ति जिसके प्रति आप आकर्षित हैं वह आपके लिंग का हो, या तीसरे लिंग (ट्रांसजेंडर) का। आप निम्नलिखित कार्यों के लिये स्वछंद हैंः

  • आप किसी भी लिंग के साथी के साथ प्यार करें, और उसके साथ रिश्ते में रहें।
  • आप किसी भी लिंग के साथी के साथ, उसकी सहमति से, यौन क्रियाओं में भाग लें।
  • आप अपने साथी के साथ, किसी भी सार्वजनिक स्थान पर, बिना किसी डर के, स्वतंत्र रूप से घूमें।

आपकी अपनी लिंग पहचान

आपको यह अधिकार है कि आप अपने स्वयंनिर्धारित लिंग से पहचाने जाएं। सन् 2014 के बाद, न्यायालय ने यह माना है कि आपको “पुरुष” और “महिला” के अलावा, खुद को “तीसरे लिंग” (ट्रांसजेंडर) की श्रेणी में रखने का, और उसी लिंग से पहचाने जाने का भी अधिकार है। कानून के अनुसार, तीसरे लिंग की श्रेणी में स्वयं को पहचाने जाने के लिए आपको लिंग सकारात्मक चिकित्सा (जेंडर एफर्मेटिव थेरापी) कराने की ज़रूरत नहीं है। उदाहरण के लिए, यदि आप शारीरिक रूप से एक महिला पैदा हुई हैं, लेकिन आप वास्तव में खुद को एक पुरुष मानते हैं तो आपको अपने को इसी लिंग से पहचाने जाने का पूरा अधिकार है।

तीसरे लिंग की श्रेणी के तहत पहचाने जाने के लिए, आप अपना नाम बदल सकते हैं, और नये पहचान दस्तावेज बनवा सकते हैं जो आपके स्वयंनिर्धारित लिंग को दर्शाए।

अगर आपको कोई प्रताड़ित करता है, चाहे वह पुलिस हो, आपके माँ-बाप हों, या कोई और व्यक्ति हो, तो आपको उनके खिलाफ शिकायत दर्ज करनी चाहिए क्यों कि आपको, बिना किसी अन्य के दखलअंदाज़ी के, अपनी ज़िंदगी जीने का अधिकार है।

लेन-देन /दहेज देना या लेना

कोई भी व्यक्ति जो:

  • दहेज देता है या
  • दहेज लेता है, और
  • कोई भी जो दहेज के लेन-देन में मदद करता है।

उसको कानून के तहत सजा दी जाएगी।

उदाहरण के लिए,
राज (दूल्हा) और सिमरन (दुल्हन) की शादी हो रही है। सिमरन के पिता अमरीश राज के पिता अनुपम को दहेज में 10 लाख रुपये और एक कार देते हैं।

कहानी 1: दहेज लेने में बिचौलिया/ब्रोकर शामिल हो: अगर यश (जो एक बिचाौलिया/ब्रोकर है) के द्वारा दहेज के लेने-देन की बात हो रही है और अमरीश शिकायत दर्ज करते हैं, तो इस कानून के तहत अनुपम और यश दोनों को सजा मिलेगी।

कहानी 2: जब दूल्हा दहेज लेने में शामिल हो: अगर राज दहेज मांगने की बातचीत में शामिल है, तो शिकायत दर्ज होने पर उस पर भी मुकदमा चलाया जाएगा।

कहानी 3: जब दहेज की शिकायत किसी और द्वारा की जाती है: अगर शिकायत किसी और द्वारा की जाती है, या अधिकारियों को पता चलता है कि दहेज दिया या लिया जा रहा है। इस स्थिति में, तीनों पक्ष यानी अनुपम, यश और अमरीश को सजा दी जाएगी। अगर दहेज की चर्चा में राज भी शामिल था, तो उसे भी सजा हो सकती है।

सजा में कम से कम पांच साल तक की जेल हो सकती है। अगर दहेज के पैसे 15,000 से कम है, तो जुर्माना 15,000 रुपये का होगा। वहीं अगर जुर्माना 15,000 रुपये से ज्यादा है, तो जुर्माना दहेज के पैसों के बराबर होगा।
उदाहरण के लिए, अगर दहेज के पैसे 30,00,000 है, तो जुर्माना 30,00,000 रुपये ही होगा।

सहमति क्या है?

सहमति किसी व्यक्ति द्वारा अपनी मर्जी और साफतौर पर समझ कर राजी होना है, जो किसी खास यौन गतिविधि में भाग लेने की इच्छा को बताता हो। महिला को यह समझना चाहिए कि वह किस बात के लिए सहमत है और अगर वह यौन क्रिया के लिए सहमत होती है, तो उसके परिणाम क्या होंगे। यहां तक ​​​​कि अगर वह शारीरिक रूप से संभोग का विरोध नहीं करती है, तो इसका मतलब यह नहीं है कि उसने यौन गतिविधि के लिए सहमति दी है।

निम्नलिखित परिस्थितियों में, किसी पुरुष को बलात्कारी माना जाता है, भले ही महिला ने इसके लिए अपनी सहमति दी होः

  • अगर उसकी सहमति उसे नुकसान पहुँचाने की धमकी देकर या उसके जीवन या उसके प्रियजनों के जीवन को नुकसान पहुंचाने के डर से जबरन ली गई हो।
  • अगर पुरुष जानता है कि वह उस महिला का पति नहीं है और महिला ने अपनी सहमति केवल इसलिए दी है, क्योंकि वह सोचती है कि वह पुरुष उसका पति है।
  • अगर महिला मानसिक अस्वस्थता, नशे या पुरुष या किसी दूसरे व्यक्ति द्वारा दिए गए किसी नशे के प्रभाव के कारण कृत्य/काम की प्रकृति और परिणामों को समझने में असमर्थ होते हुए सहमति देती है।
  • अगर महिला की उम्र 18 साल से कम हो।

कानून किस की सुरक्षा करता है?

ट्रिगर वॉर्निंग: निम्नलिखित विषय में शारीरिक हिंसा पर जानकारियां दी गई है, जिससे कुछ पाठकों को असहज महसूस हो सकता है। 

कानून सभी व्यक्तियों को एसिड अटैक से सुरक्षा प्रदान करता है, चाहे उनका लिंग कुछ भी हो। इसके अलावा, सर्वाइवर की उम्र को लेकर कानून में कोई विशेष प्रावधान नहीं है। इसलिए, एसिड अटैक, चाहे वह किसी भी उम्र के व्यक्ति पर किया गया हो, कानून के तहत दंडनीय है। कानून उन विदेशियों को भी सुरक्षा प्रदान करता है, जिनके ऊपर भारत में रहने के दौरान एसिड हमले हुए और वे ज़िंदा बच गए।

 

 

निजता पर आक्रमण कैसे एक यौन अपराध है?

[जारी चेतावनी: इस लेख में शारीरिक हिंसा, यौन हिंसा, दुर्व्यवहार और गाली-गलौज के बारे में जानकारी है जो कुछ पाठकों को विचलित कर सकती है। 

सभी व्यक्तियों को निजता का अधिकार है। इसका मतलब यह है कि कोई भी व्यक्ति कुछ भी कर सकता है, यौन क्रिया या कुछ और, यह सोचकर कि उन्हें कोई नहीं देख रहा है (बशर्ते कि यह अवैध/गैरकानूनी न हो)। कानून के तहत किसी व्यक्ति को केवल अपराध के लिए ही दंडित किया जा सकता है।

किसी के द्वारा ताक-झाँक करने पर, 

अगर कोई व्यक्ति निजी कार्य या यौन कार्य कर रहा हो, और वे यह कार्य तब कर रहें हो जब उन्हें लगता है कि वे तो पूरी तरह से अकेले हैं या फिर अपनी सहमति से किसी विशेष व्यक्ति के साथ कर रहें हो, तो अगर कोई व्यक्ति उस स्थिति में किसी को देखने की कोशिश करता है, तो इसे कानून के तहत अपराध समझा जाएगा। इस अपराध को आमतौर पर दृश्यरतिकता के रूप में जाना जाता है। इस तरह के मामलों का कुछ उदाहरण इस प्रकार है:

• किसी महिला को किसी दूसरे व्यक्ति द्वारा देखा जाना, जब वह अकेली होती है। उदाहरण के लिए, जब वह शौचालय का उपयोग कर रही हो।

• किसी व्यक्ति के बेडरूम में अवैध रूप से कैमरा लगा देना या उसे अपने निजी स्थान में देखने के लिए उसके वेबकैम को हैक कर लेना।

प्राइवेट फोटो खींचना,

यदि किसी व्यक्ति की अनुमति के बिना ही उसकी तस्वीरें, वीडियो या ऑडियो रिकॉर्डिंग की जाती है, तो ऐसा करना एक अपराध है।

किसी को उसकी जानकारी या सहमति के बिना कैप्चर करने पर या देखने पर कम से कम तीन साल या अधिकतम सात साल तक की जेल की सजा है और साथ ही जुर्माना भी है।

प्राइवेट फोटो और वीडियो को सार्वजनिक करना 

कोई भी व्यक्ति तब तक किसी की निजी तस्वीरें या वीडियो को रिकॉर्ड या वितरित नहीं कर सकता, जब तक कि वे सहमति नहीं देते। उदाहरण के लिए, यदि कोई व्यक्ति केवल अपने प्रियजन के साथ यौन क्रिया को रिकॉर्ड करने की सहमति देता है, लेकिन उसे अन्य लोगों में डिस्ट्रीब्यूट करने की अनुमति नहीं देता है, और अगर वह रिकॉर्डिंग डिस्ट्रीब्यूट की जाती है, तो ऐसा करना एक अपराध है।

प्राइवेट फोटो या ऑडियो के वितरण करने पर दंड/जुर्माना के साथ कम से कम तीन साल या अधिकतम सात साल की जेल की सजा है।

 

 

प्रसव पूर्व निदान प्रक्रियाएं कौन-कौन सी हैं?

प्रसव पूर्व निदान प्रक्रियाओं में गर्भधारण से पहले या बाद में लिंग चयन के लिए कोई प्रसवपूर्व निदान परीक्षण करने हेतु किसी भी स्त्री रोग संबंधी, प्रसूति या चिकित्सा प्रक्रियाओं जैसे अल्ट्रासोनोग्राफी, एमनियोटिक द्रव, रक्त या किसी अन्य ऊतक या किसी व्यक्ति के तरल पदार्थ के सैंपल लेना या निकालना शामिल है।

इन प्रक्रियाओं का उद्देश्य प्रसव से पूर्व निदान परीक्षण करने के लिए सामग्री प्राप्त करना है ताकि किसी विशेष लिंग का भ्रूण प्राप्त करने की संभावना बढ़ सके।