शिकायत दर्ज करने की प्रक्रिया

आखिरी अपडेट Sep 29, 2022

कोई भी शिकायत एकीकृत शिकायत निवारण तंत्र पोर्टल (आईएनजीआरएएम) पर ऑनलाइन दर्ज की जा सकती है, या फिर उपभोक्ता अधिकारों का हनन के संदर्भ में जिला या राज्य आयोग जैसे उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरणों के साथ ऑफ़लाइन दर्ज की जा सकती है। इसके अलावा हेल्पलाइन के साथ-साथ फोन आधारित ऍप भी हैं जिनका उपयोग शिकायत दर्ज करने के लिए किया जा सकता है। इस सबके बावजूद, शिकायत का समाधान न होने पर, आप उपभोक्ता मंचों से संपर्क हेतु किसी वकील की मदद ले सकते हैं।

शिकायत प्रक्रिया: टेलीफोन 

चरण -1: जांचें कि क्या आप कानून के तहत उपभोक्ता हैं

शिकायतकर्ता एक उपभोक्ता या एक उपभोक्ता-संघ होना चाहिए।

चरण-2: हेल्पलाइन नंबर पर कॉल करें

राष्‍ट्रीय छुट्टियों को छोड़कर, शिकायत दर्ज करने के लिए, उपभोक्ता, राष्‍ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन पर कॉल कर सकते हैं-1800-11-4000 या 14404 पर। या फिर, + 91 8130009809 पर एसएमएस के माध्यम से भी शिकायत दर्ज की जा सकती है।

चरण-3: शिकायत का विवरण दें

शिकायतकर्ता और विक्रेता के नाम, संपर्क विवरण और उनके पतों का पूरा ब्‍योरा, हेल्पलाइन प्राधिकरण / अधिकारी को शिकायत के ब्‍योरे के साथ दिया जाना चाहिए। प्राधिकरण आपकी शिकायत दर्ज करेगा और आपको एक विशिष्‍ट शिकायत आईडी देगा।

चरण -4: अपने आवेदन की प्रगति पर नज़र रखें / ट्रैक करें

आपकी शिकायत फिर संबंधित विक्रेता, कंपनी, नियामक, या प्राधिकरण को कार्रवाई के लिए भेज दी जाती है। प्रत्येक शिकायत के लिए की गयी कार्रवाई को लगातार अपडेट किया जाता है। हेल्पलाइन पर कॉल करके या एकीकृत शिकायत निवारण तंत्र पोर्टल के माध्यम से आपकी शिकायत को आपकी शिकायत आईडी से ट्रैक किया जा सकता है।

चरण-5: शिकायत का समाधान

अगर आपकी शिकायत का समाधान नहीं होता है, तो आप संबंधित उपभोक्ता फोरम से संपर्क करके कानूनी प्रक्रिया शुरू कर सकते हैं। हेल्पलाइन प्राधिकरण कानूनी प्रक्रिया के बारे में आपके किसी भी संदेह को स्पष्ट करने में मदद कर सकता है।

ई-शिकायत प्रक्रिया: इंटरनेट (आईएनजीआरएएम पोर्टल) 

उपभोक्ता मामलों के विभाग ने उपभोक्ताओं, केंद्र और राज्य सरकार की एजेंसियों, निजी कंपनियों, नियामकों, लोकपाल और कॉल सेंटर आदि जैसे सभी हितधारकों को एक मंच पर लाने के लिए एकीकृत शिकायत निवारण तंत्र (आईएनजीआरएएम-INGRAM) के रूप में जाना जाने वाला एक पोर्टल लॉन्च किया है। पोर्टल उपभोक्ताओं के बीच उनके अधिकारों की रक्षा के लिए जागरूकता पैदा करने और उन्हें उनकी जिम्मेदारियों के बारे में सूचित करने में भी मदद करेगा। इस पोर्टल के माध्यम से उपभोक्ता अपनी शिकायत ऑनलाइन दर्ज करा सकते हैं।

चरण -1: जांचें कि क्या आप कानून के तहत उपभोक्ता हैं

शिकायतकर्ता को कानून के तहत एक उपभोक्ता होना चाहिए, जिसका अर्थ है किसी उत्पाद का उपभोक्ता, एक ऍसोसिएशन उपभोक्ता आदि।

चरण -2: INGRAM पोर्टल पर पंजीकरण करें

शिकायतकर्ता को खुद को एक उपभोक्ता के बतौर INGRAM पोर्टल पर पंजीकृत कराना होगा। शिकायतकर्ता को अपनी शिकायत दर्ज करने के लिए आवश्यक विवरण और दस्तावेज़ भरने होंगे, जैसे कि शिकायतकर्ता और विक्रेता का नाम और पता, विवाद के तथ्य और वह राहत जो शिकायतकर्ता चाहता है। शिकायत दर्ज करने के लिए एक बार पंजीकरण आवश्यक है।

पंजीकरण के लिए वेब पोर्टल http://consumerhelpline.gov.in पर जाएं और लॉग-इन लिंक पर क्लिक करें और फिर आवश्यक विवरण देते हुए साइन-अप करें, अपनी ईमेल के माध्यम से सत्यापित करें। यूज़र आईडी और पासवर्ड बनाया जाता है। इस यूज़र आईडी और पासवर्ड का उपयोग करते हुए, पोर्टल में प्रवेश करें और आवश्यक दस्तावेज़ों को संलग्न करते हुए शिकायत के आवश्यक विवरण भरें (यदि उपलब्ध हों)।

चरण-3: शुल्क का भुगतान करें

शिकायतकर्ता को डिजिटल भुगतान मोड के माध्यम से शिकायत पंजीकरण के लिए शुल्क (यदि लागू हो) का भुगतान करना होगा, या भीम ऍप, उमंग ऍप आदि के माध्‍यम से संबंधित उपभोक्ता आयोगों को माल के मूल्य के अनुसार भुगतान करना होगा।

चरण-4: अपने आवेदन पर नज़र रखें / ट्रैक करें

प्रत्येक शिकायत दर्ज की जाती है और उसकी एक विशिष्‍ट शिकायत आईडी जारी की जाती है। शिकायत को कार्रवाई के लिए संबंधित कंपनी, नियामक, प्राधिकरण को अग्रेषित किया जाता है। प्रत्येक शिकायत के बरक्‍स उनके द्वारा की गयी कार्रवाई को अद्यतन किया जाता है। दर्ज की गयी शिकायतों को INGRAM पोर्टल के माध्यम से ट्रैक किया जा सकता है।

उपभोक्ता न्यायालय/मंच 

INGRAM पोर्टल के माध्यम से, यह सुनिश्चित करने का प्रयास किया जाता है कि शिकायत का निवारण संबंधित अधिकारियों के साथ किया जाए, जो कि एक कंपनी, लोकपाल आदि हो सकते हैं। लेकिन, अगर समस्या अभी भी लंबित है, तो उपभोक्ता के पास एक वकील की मदद से उपयुक्त उपभोक्ता अदालत या मंच से संपर्क करने का विकल्प होता है। उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग में सुनवाई के लिए केवल 2 साल के भीतर दायर की गयी शिकायतों को ही सुनवाई के लिए स्वीकार किया जाएगा।

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