एक बच्चे को गोद लेने के लिए कानूनी तौर पर उपलब्ध करने पर ऐसे बच्चों को गैर-धार्मिक कानून के तहत गोद दिया जा सकता है। इसके बाद उस बच्चे का अपने असली माता-पिता के साथ कानूनी रिश्ता ख़त्म हो जाता है।
बाल कल्याण समिति जब एक बच्चे को गोद लेने के लिए उपलब्ध घोषित करने का फैसला लेती है, इसके पहले वह एक जांच करती है, जिसमें कुछ जरूरी बातों को देखा जाता है:
• परिवीक्षा अधिकारी/सामाजिक कार्यकर्ता से मिली एक रिपोर्ट,
• बच्चे की राय या सहमति (अगर वे काफी बड़े हैं),
• जिला बाल संरक्षण इकाई और बाल देखभाल संस्थान या विशेष दत्तक ग्रहण एजेंसी आदि द्वारा दिए गए जरूरी दस्तावेज़ और घोषणा-पत्र।
बच्चों को गोद देने के लिए इन बातों के पूरा होने के बाद ही उन्हें कानूनी रूप से गोद के लिए उपलब्ध घोषित किया जाता है, जैसेः
• अनाथ बच्चे: बिना माता-पिता (असली या सौतेला) या बिना कानूनी अभिभावक के बच्चे, या वे बच्चे जिनके अभिभावक उनकी देखभाल करने के काबिल नहीं हैं या करना नहीं चाहते।
• परित्यक्त बच्चे: ऐसे बच्चे जिन्हें उनके माता-पिता (जैविक या दत्तक) या अभिभावकों ने छोड़ दिया हो और जिन्हें बाल कल्याण समिति ने आधिकारिक तौर पर परित्यक्त/छोड़े गए बच्चे घोषित किया हो।
• खुद की इच्छा से दिए गए/सरेंडर बच्चे: ऐसे बच्चे जिन्हें माता-पिता या अभिभावक ने अपनी इच्छा से छोड़ दिया हो, और जिन्हें बाल कल्याण समिति ने आधिकारिक तौर पर सरेंडर किया हुआ बच्चा घोषित किया हो।
• ऐसे माता-पिता का बच्चा जो मानसिक से कमजोर या जिनकी समझने-समझाने की क्षमता कम है।
• ऐसे बच्चे जो यौन हमले की घटना के कारण पैदा हुए हों

