अमान्य दत्तक ग्रहण के मामले में, गोद लिए गए बच्चे को दत्तक परिवार में कोई अधिकार प्राप्त नहीं होता है और वह किसी भी ऐसे अधिकार को नहीं छोड़ता है जिसका वह बच्चा अपने जैविक परिवार में हकदार था।

गोद लेने के प्रभाव

आखिरी अपडेट Aug 18, 2022

गोद लेने के निम्नलिखित प्रभाव हैं, भले ही आपने किस भी कानून के तहत बच्चे को अपनाया हो:

दत्तक माता-पिता का बच्चा: वह गोद लेने वाले (सौतेले) माता-पिता का बच्चा बन जाता है, और वे माता-पिता बच्चे के असली माता-पिता की तरह बन जाते हैं जैसे कि बच्चा उनकी ही सभी इच्छाओं से पैदा हुआ था।

बच्चे का पारिवारिक संबंध: बच्चे का जन्म जिस परिवार में हुआ है, उस परिवार के साथ संबंध टूट जाते हैं और गोद लेने वाले परिवार (दत्तक परिवार) के साथ नये संबंध बनते हैं। हालाँकि, हिंदू कानून के तहत गोद लेने पर, जिस परिवार में बच्चा जन्म लिया था, और उस परिवार ने जिस किसी भी व्यक्ति के साथ बच्चे की शादी के लिए मना किया हो, तो गोद लिया हुआ बच्चा अभी भी उस व्यक्ति से शादी नहीं कर सकता।

बच्चे के संपत्ति का अधिकार: गोद लेने से पहले भी अगर बच्चे की स्वामित्व वाली कोई भी संपत्ति है, तो वह संपत्ति के साथ लगाए गए अनुबंध-पत्र के साथ (असली परिवार में रिश्तेदारों को बनाए रखने के दायित्व सहित) वह बच्चे की ही संपत्ति बनी रहेगी।

इसके अलावा, हिंदू कानून के तहत गोद लेने पर, बच्चे के गोद लेने के लिए दिए गए आदेश को प्रभावी होने की तारीख से:

बच्चे के संपत्ति का अधिकार: व्यक्ति (दत्तक माता-पिता) के पास गोद लेने से पहले की जो संपत्ति थी,उस संपत्ति पर गोद लिया हुआ बच्चा स्वामित्व का दावा नहीं कर सकता और ना ही उस संपत्ति को छीन सकता है। वह बच्चा दत्तक माता/पिता को अपने जीवनकाल के दौरान अपनी संपत्ति को बेचने से भी नहीं रोक सकता है, और ना ही किसी को देने या दान करने से रोक सकता है।

एक वैध दत्तक ग्रहण को रद्द करना: एक वैध दत्तक ग्रहण को दत्तक(गोद लिया हुआ या सौतेला) माता-पिता या किसी अन्य व्यक्ति द्वारा रद्द नहीं किया जा सकता है। एक बार गोद लेने के बाद, बच्चे को वह अस्वीकार नहीं कर सकता और न उसे वापस कर सकता है जिस परिवार में बच्चा जन्म लिया था।

Comments

    नाम सोनाझारी कुमारी

    April 5, 2023

    नमस्कार सर मैं बात कर रहा हूं एक महिला का जो 20 साल पहले अपने मौसा मौसी के घर पली-बढ़ी और उसका गार्जियन मौसा मौसी ही बने और शादी विवाह भी की है पढ़ाई लिखाई का भी उन्हीं के द्वारा संपन्न कराया गया उस महिला के पास प्राइमरी से लेकर ग्रेजुएशन तक का डॉक्यूमेंट है जिस पर माता-पिता वही दोनों व्यक्ति बने हुए हैं लेकिन कोर्ट से उसका दत्तक ग्रहण का प्रमाण पत्र नहीं बनवाए हैं और अब अपने संपत्ति में उसे हक देने से भी मना कर रहे हैं तो क्या उस व्यक्ति के संपत्ति में उस महिला को हक मिलेगी या अथवा नहीं

    Alka Manral

    June 10, 2024

    अभिभावकत्व, माता-पिता का स्थान नहीं है।

    जब तक कोई बच्चा गोद लिया नहीं जाता, यह नहीं कहा जा सकता कि बच्चा माता-पिता या मृतक से विरासत में प्राप्त करेगा।

    समस्त तथ्यों का गहन विचार कर, न्यायालय से बालक या बालिका को दत्तक संतान के रूप में घोषित कराना श्रेयस्कर होगा, जिससे समस्त वैधानिक परिणामों का अनुसरण सुनिश्चित हो सके

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