शोरगुल रोजमर्रा की जिंदगी में सामान्य है, लेकिन जब यह एक निश्चित सीमा से ऊपर चला जाता है, तो इसे ध्वनि प्रदूषण के साथ-साथ सार्वजनिक परेशानी के रूप में भी देखा जाता है। उंचे स्तर का शोरगुल मनुष्य, जीव-जन्तुओं, पेड़-पौधों, और पर्यावरण के लिए हानिकारक हो सकता है। ध्वनि प्रदूषण के सामान्य स्रोतों में उद्योग-धंधे, निर्माण कार्य, जनरेटर सेट आदि शामिल हैं। ध्वनि प्रदूषण (विनियमन और नियंत्रण) नियम, 2000 का कानून भारत में ध्वनि प्रदूषण को नियमित और नियंत्रित करता है।
बिना शोरगुल के शांति से रहने का अधिकार
भारत के संविधान, 1950 के अनुच्छेद 21 के तहत सभी को अपने घर में शांति, आराम और चैन से रहने का अधिकार है, और शोरगुल/हल्ला-गुल्ला से बचने और उसको रोकने का अधिकार है। कोई भी यहां तक कि अपने घर में भी शोरगुल पैदा करने के अधिकार का दावा नहीं कर सकता है जिसके कारण अड़ोस-पड़ोस या अन्य लोगों को परेशानी होती हो। इसलिए किसी भी प्रकार का शोर/आवाज़ जो किसी व्यक्ति के जीवन की सामान्य सुख-शांति में बाधा डालता, उसे भी उपद्रव माना जाता है।
शोर का अर्थ
‘शोर’ शब्द की चर्चा किसी भी कानून में नहीं की गई है, लेकिन भारत में शोर को पर्यावरणीय प्रदूषक माना गया है और इसे पर्यावरण प्रदूषण के मुख्य कारणों में से एक माना जाता है।
नॉइज़ (यानि शोर) लैटिन शब्द ‘NAUSEA’ से लिया गया है। कोर्ट ने शोर को ‘अवांछित ध्वनि के रूप में परिभाषित किया है, जो स्वास्थ्य और संचार के लिए जोखिम भरा है, जो सुनाई पड़ने वाली आवाज़ के रूप में, स्वास्थ्य पर होने प्रतिकूल असर की परवाह किये बिना हमारे पर्यावरण में डंप किया जाता है। ‘ उदाहरण के लिए, हॉर्न से होने वाली कर्कश ध्वनि अवांछित शोर का कारण बनता है लेकिन जो ध्वनि सुनने में अच्छा लगे, वह संगीत है, उसे शोर नहीं कहा जाता है।
ध्वनि प्रदूषण के कारण
शोर के मापने की इकाई को डेसिबल कहा जाता है। आप जिस क्षेत्र में रहते हैं उसके आधार पर आपको ध्वनि सीमा का पालन करना होगा। शोर (नॉइज़) को मापने के लिए वैज्ञानिक उपकरणों (जैसे ध्वनि मीटर) की आवश्यकता होती है, क्योंकि आपके पास हमेशा यह यंत्र उपलब्ध नहीं होता तो हर समय आपको यह जानकारी नहीं होती है कि आप किसी विशेष क्षेत्र के लिए निर्धारित ध्वनि सीमा को पार कर रहे हैं या नहीं। ऐसे मामलों में, आपको:
• यह सुनिश्चित करना चाहिए कि आप जो भी करते हैं या आप जिस किसी भी उपकरण का इस्तेमाल करते हैं, वह शोरगुल और दूसरों के लिए परेशानी का कारण न बने। उदाहरण के लिए, यदि आप किसी पार्टी के दौरान गाना बजा रहे हैं, तो रात के समय जब लोग सो रहे हों, तब आवाज़ कम रखने की कोशिश करें।
• अपने पड़ोसियों या अपने आस-पास के लोगों द्वारा पुलिस में शिकायत दर्ज कराने की प्रतीक्षा नहीं करनी चाहिए। अगर वे कहते हैं कि आपके शोरगुल से उन्हें परेशानी हो रही है, तो शोर को कम करने का प्रयास करें।
कृपया ध्यान रखें कि इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि आपने अनजाने में या जानबूझकर शोर किया है; केवल यह मायने रखता है कि क्या आपने बहुत अधिक शोर मचाया है।
ध्वनि प्रदूषण के खिलाफ शिकायत
यदि किसी शोर से आपको झुंझलाहट, अशांति या कोई क्षति होती है, तो आप पुलिस या अपने राज्य के ‘प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड’ में शिकायत दर्ज करा सकते हैं। अगर आपको लगता है कि शोर का स्तर आपको परेशान कर रहा है या यह रात के 10:00 बजे से सुबह 6:00 बजे के बीच होता है, तो आप इसकी शिकायत भी कर सकते हैं।

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December 18, 2025
दाल मिल ढूंढ प्रदूषण शिकायत हेतु हमारे घर और दुकान में ढूंढ प्रदूषण घुस रहा है 4 साल से परेशान है 4 साल से परेशान है यस पप्सेस इंडस्ट्री 24E lAs industrial area chikhali out kalamna road Nagpur 440 035