हिरासत के दौरान LGBTQ+ व्यक्तियों का पुलिस द्वारा उत्पीड़न

यदि आपको गिरफ्तार किया गया है, तो आप ज्यादा से ज्यादा 24 घंटे के लिए पुलिस स्टेशन की हिरासत में रहेंगे, जब तक वे आपको निकटतम मजिस्ट्रेट (कोर्ट) के पास नहीं ले जाते हैं। मजिस्ट्रेट की अनुमति मिलने पर ही वे आपको और 15 दिन तक रख सकते हैं। आपको कई तरह के उत्पीड़न / हिंसा का सामना करना पड़ सकता है जैसे:

  • पुलिस आपको परेशान कर सकती है, या पुलिस हिरासत में रहते हुए आपको ऐसे अपराध स्वीकार करने के लिए धमका सकती हैं, जो आपने किया ही न हो। यह कानूनन अपराध है, जिसके लिए पुलिस अधिकारियों को जेल की सजा दी सकती है, और जुर्माना लगाया जा सकता है।
  • जब आप हिरासत में हैं तो पुलिस अधिकारी आपको शारीरिक रूप से चोट पहुंचा सकते हैं। आपको इस तरह की घटना की शिकायत अपने वकील से करनी चाहिए, जो आपकी मदद कर सकेंगे।
  • यदि पुलिस आपके साथ यौन उत्पीड़न या बलात्कार करती है, तो आपको पुलिस अधिकारियों के खिलाफ एक प्राथिमिकी (एफआईआर) दर्ज करानी चाहिए क्योंकि यह कानूनन दंडनीय अपराध है, जिसके लिए अधिकारियों को जेल की सजा और जुर्माना लगाया जाएगा। ऐसे मामलों में आपको भारतीय दंड संहिता, 1860 की धारा 376 (2), 376 बी के अंतर्गत एक प्राथिमिकी (एफआईआर) दर्ज करानी चाहिए।

जब आप पुलिस की हिरासत में हैं, उस समय किसी भी प्रकार के उत्पीड़न को रोकने के लिए, या यदि आप पुलिस द्वारा किसी उत्पीड़न का सामना करते हैं, तो आपको निम्नलिखित कदम उठाने चाहिए:

एक वकील की मांग करें

आपके पास गिरफ्तारी के समय से एक वकील के लिए अनुरोध करने का अधिकार है, और जब आप हिरासत में होते हैं तो किसी भी हिंसा को रोकने के लिए, आपके साथ एक वकील मौजूद होना सहायक होगा।

इसकी शिकायत थाने के अधीक्षक से करें

पुलिस अधीक्षक (एसपी) को एक लिखित शिकायत करें, जो मामले को देखेगा। एक अधीक्षक इस मामले को खुद देख सकते हैं।

मजिस्ट्रेट से शिकायत करें

चूंकि पुलिस अधिकारी को गिरफ्तारी के 24 घंटे के भीतर एक मजिस्ट्रेट के पास आपको अनिवार्य रूप से ले जाना होता है, आप अपने वकील की मदद से मजिस्ट्रेट को सीधे अपनी ‘निजी शिकायत’ दर्ज करा सकते हैं। हिरासत में आपके साथ हुए उत्पीड़न और हिंसा के बारे में आप बता सकते हैं।

हाउस हेल्प (घरेलू सहायक) /नौकर द्वारा चोरी

नौकर या घरेलू सहायिका द्वारा चोरी के लिए सामान्य सजा की तुलना में ज्यदा गंभीरता से लिया जाता है और सजा भी ज्यदा होती है। नौकर/सहायक के लिए 7 साल तक की जेल और जुर्माना दोनों हो सकते हैं।

यदि किसी नौकर ने आपके घर में चोरी की है, तो शिकायत करने के लिए आप जो कदम उठा सकते हैं, उन्हें समझने के लिए यहां पढ़ें।

 

झूठी रिपोर्ट या शिकायत करने पर

किसी व्यक्ति के खिलाफ किसी बच्चे को यौन उत्पीड़न की झूठी शिकायत करना गैरकानूनी है अगर वास्तव में उसने ऐसा नहीं किया है। इस झूठी शिकायत करने की सजा, एक साल का जेल, या जुर्माना या दोनों है। अगर किसी को अपमानित करने के इरादे से झूठी शिकायत या रिपोर्ट की गई है, तो वैसे अपराध के लिये, 6 महीने के जेल, या जुर्माना, या दोनों के साथ दंडित किया जा सकता है।

हालांकि, अगर कोई बच्चा एक झूठी शिकायत करता है, तो उसे दंडित नहीं किया जा सकता है।

घरेलू हिंसा के लिए आप किसके खिलाफ शिकायत कर सकते हैं?

आप घरेलू हिंसा के लिए पुरुष और महिला दोनों के खिलाफ शिकायत कर सकते हैं। आप निम्नलिखित के खिलाफ शिकायत कर सकते हैं:

  • आपका परिवार: आप अपने परिवार के बारे में शिकायत कर सकते हैं, यदि वे आपको निम्न परिस्थितियों में घरेलू हिंसा के अधीन कर रहे हैं:
  • यदि आपका उत्पीड़क के साथ खून का रिश्ता है तो आप उनके खिलाफ मामला दर्ज करा सकते हैं। उदाहरण के लिए आपके पिता, भाई आदि।
  • यदि आपका अपने उत्पीड़क के साथ शादी का रिश्ता है तो आप उनके खिलाफ मामला दर्ज करा सकते हैं जैसे कि आपके ससुराल वाले, पति, आदि।
  • यदि आप अपने उत्पीड़क के साथ एक संयुक्त परिवार में रहते हैं तो आप उनके खिलाफ मामला दर्ज करा सकते हैं। उदाहरण के लिए, आपकी दादी, चाचा, दत्तक भाई, आदि। हालांकि, आप केवल उन लोगों के खिलाफ शिकायत कर सकते हैं जो हिंसा में शामिल थे। 1) उदाहरण के लिए, यदि आप दस लोगों के साथ एक संयुक्त परिवार में रहते हैं और केवल आपकी सास और पति ने आपके साथ हिंसा की है तो आप केवल उन्हीं के खिलाफ शिकायत कर सकते हैं।
  • आपका लिव-इन पार्टनर: यदि आपका लिव-इन पार्टनर आपको चोट पहुंचाता है या आपके साथ दुर्व्यवहार करता है तो आप उसके खिलाफ शिकायत दर्ज करा सकते हैं।
  • नाबालिग: आप एक नाबालिग के खिलाफ शिकायत कर सकते हैं जो आपके साथ घरेलू हिंसा करता है।2) उदाहरण के लिए, यदि आपके परिवार में एक 16 वर्ष का लड़का आपको शारीरिक रूप से परेशान कर रहा है तो आप उसके खिलाफ घरेलू हिंसा की शिकायत दर्ज करा सकते हैं।

कोर्ट में जाते समय, ध्यान रखें कि आप जिसके द्वारा घरेलू हिंसा के शिकार हुए, उसके साथ आपने न केवल घरेलू संबंध साझा किया हो बल्कि एक ही घर में साथ भी रहे हों।

अधिक जानकारी के लिए इस सरकारी संसाधन को पढ़ें

LGBTQ+ व्यक्तियों की जमानत

जब आपको गिरफ्तार किया जाता है, तो आपको अपनी लिंग पहचान या अपने यौन अभिविन्यास की परवाह किए बिना जमानत के लिए आवेदन करना चाहिए। आपका यह अधिकार उस अपराध पर निर्भर करता है, जिसके लिए आपको गिरफ्तार किया गया है:

जमानती अपराधों के मामलों में

आपको जिस अपराध के लिए गिरफ्तार किया गया है यदि वह एक जमानती अपराध है, तो आपको न्यायालय में जमानत के लिए आवेदन करना चाहिए और आपको जमानत मिल जाएगी।

गैर-जमानती अपराधों के मामलों में

गैर-जमानती अपराधों के मामलों में, न्यायालय के विवेक पर आपको जमानत दी जा सकती है, और आपको यह केवल विशिष्ट परिस्थितियों में ही दी जाएगी। इस तरह के मामलों में, न्यायालय आपसे उच्चतर जमानत राशि की मांग एक बांड के रूप में कर सकता है।

LGBTQ+ व्यक्तियों के लिए हेल्पलाइन

कई सरकारी हेल्पलाइन हैं, जो न केवल जानकारी देने में आपकी मदद करती हैं, बल्कि कानूनी प्रक्रियाओं के माध्यम से भी आपकी मदद कर सकती हैं और आपको अधिकारियों के संपर्क में रख सकती हैं। निम्नलिखित सूची, भारत भर के राष्ट्रीय हेल्पलाइनों से संपर्क के लिये विस्तृत विवरण देती है, जो नीचे दी गई विभिन्न श्रेणियों के लिए हैं:

हिंसा और उत्पीड़न के लिए

यदि आपको किसी उत्पीड़न या हिंसा का सामना करना पड़ा है, और आप जानते हैं कि यह किस व्यक्ति ने किया है, तो आप निम्नलिखित हेल्पलाइन से संपर्क कर सकते हैं:

  • पुलिस

कोई भी व्यक्ति, अपने लिंग या यौन अभिविन्यास के परे, इस हेल्पलाइन पर कॉल कर सकता है। आप पुलिस से तत्काल मदद मांगने के लिए 100 नम्बर पर भी कॉल कर सकते हैं। आगे की सहायता के लिए, एक पुलिस इकाई, आपके निवास स्थान की पहचान करने के बाद, वहां भेजी जाएगी।

  • राष्ट्रीय महिला आयोग, पुलिस हेल्पलाइन

इस हेल्पलाइन पर आप कॉल तभी कर सकते हैं जब आप या तो महिला हों या ट्रांसवुमन (पारमहिला) हैं। यहां पर आप यौन अपराधों, घरेलू हिंसा आदि के अलावे किसी भी प्रकार की हिंसा के बारे में शिकायत कर सकते हैं। निम्नलिखित कदम हैं जो आपको उठाने चाहिए:

चरण 1: 1091 पर कॉल करें

चरण 2: आप पर किये गये अपराध का वर्णन विस्तार से करें

चरण 3: अपना ठिकाने का स्थान और संपर्क नंबर दें

पुलिस को आपके ठिकाने पर आपकी सहायता के लिए और उत्पीड़न को रोकने के लिए भेजा जाएगा। यदि आप एक ट्रांसवुमन (पारमहिला) हैं, तो किसी गैर सरकारी संगठन या वकील की सहायता लेना बेहतर होगा, ताकि प्राथिमिकी (एफआईआर) दर्ज कराते समय पुलिस अधिकारी आपको परेशान न करें।

  • लापता व्यक्ति और अपहरण के मामले

पुलिस उपायुक्त (लापता व्यक्ति):

यह हेल्पलाइन, बिना किसी लिंग भेदभाव के, लापता व्यक्तियों को खोजने में मदद करती है। आप निम्नलिखित कदम उठा सकते हैं:

चरण 1: 1094 पर कॉल करें।

चरण 2: वे लापता व्यक्ति का फोन नंबर मांगेंगे।

चरण 3: फोन नंबर की खोज ज़िपनेट (जोनल इंटीग्रेटेड पुलिस नेटवर्क) पर की जायेगी, जहां से वे लापता व्यक्ति के ठिकाने का पता लगाएंगे और वहां की पुलिस से संपर्क करेंगे।

चरण 4: यदि वे लापता व्यक्ति का पता नहीं लगा पाते हैं, तो वे ज़मीनी स्तर पर खोज जारी रखने के लिए पुलिस स्टेशन की मदद लेंगे।

LGBTQ+ व्यक्तियों के लिए सहायता और समर्थन प्राप्त करना

आपके साथ हुई प्रताड़ना या हिंसा की शिकायत करते वक्त, आपको अपनी रक्षा के लिए सहायता और समर्थन प्राप्त करना ज़रूरी है। जिन लोगों से आप संपर्क कर सकते हैं उनमें से कुछ ये हैं:

कानूनी सहायता

आप किसी वकील से संपर्क करना चाहिये यदि आपको शिकायत प्रक्रियाओं से गुज़रना के लिये सहायता चाहिये, और यदि आपको न्यायालय जाना है। यदि आप वकील का खर्चा वहन नहीं कर सकते हैं, तो आप मुफ्त कानूनी सहायता के लिए अपने जिले में ‘जिला कानूनी (विधिक) सेवा प्राधिकरण’ से संपर्क कर सकते हैं।

यदि आप एक वकील नहीं ढूंढ पाते हैं, तो किसी गैर सरकारी संगठन से संपर्क करें जो प्राथिमिकी (एफआईआर) दर्ज कराने में आपकी मदद करेगें, और आपको वकीलों से संपर्क कराएंगे।

संरक्षण और आश्रय की मांग

आप LGBTQ+ अधिकारों के लिए काम करने वाले किसी भी गैर सरकारी संगठन, नागरिक समाज संगठन या संस्था से संपर्क कर सकते हैं। वे निम्नलिखित कार्यों में आपकी मदद कर सकते हैं:

  • यदि आप मुसीबत में हैं, या आपको तत्काल मदद की जरूरत है, तो ये आपकी सहायता करेंगे,
  • आपको आश्रय और रोजगार के अवसर प्रदान करने में, और आपके सामने आने वाली समस्याओं को दूर करने में ये आपको सलाह देंगे,
  • पहचान दस्तावेज़ (आईडी प्रूफ) प्राप्त करने में ये मदद करेंगे।

आप अपने क्षेत्र / निर्वाचन क्षेत्र के विधायक / सांसद से संपर्क कर उनसे मदद की मांग कर सकते हैं। कई मामलों में, वे अधिकारियों को निर्देशित करेंगे कि वे उस क्षेत्र में आपकी मदद करें, जहां आपको परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

रोजगार- संबंधित सहायता

आपको कार्यालय में पंजीकृत ट्रेड यूनियन के पास जाना चाहिये। वे आपके कार्यस्थल पर आपकी शिकायतों के संबंध में आपकी मदद करेंगे।

आप उन गैर सरकारी संगठनों या संस्थाओं से भी संपर्क कर सकते हैं, जो LGBTQ+ के अधिकारों के क्षेत्र में काम करते हैं। वे आपको रोजगार के अवसर प्रदान करा सकते हैं, या आपको ऐसे लोगों के संपर्क करा सकते हैं, जो ऐसा काम करा सकते हैं।

प्रोटेक्शन ऑफिसर की भूमिका

यदि आप घरेलू हिंसा की शिकायत दर्ज कराना चाहते हैं, तो प्रोटेक्शन ऑफिसर (पी.ओ( सामान्य रूप से आपके लिए संपर्क करने का पहला बिंदु होता है। कोई भी, जिसमें आपका कोई परिचित भी शामिल है, हिंसा के खिलाफ शिकायत करने और सुरक्षा हासिल करने के लिए आपके जिले या किसी निकटवर्ती क्षेत्र के प्रोटेक्शन ऑफिसर से मिल सकता है, कॉल कर सकता है, या लिख सकता है। पी.ओ का पता लगाने के लिए, आपः

  • निकटवर्ती पुलिस स्टेशन जा सकते हैं और उनसे आपको पी.ओ से मिलवाने के लिए कह सकते हैं।
  • अपने जिले के महिला और बाल विकास विभाग को कॉल कर सकते हैं या वहां जा सकते हैं।
  • राष्ट्रीय/राज्य महिला आयोग से संपर्क कर सकते हैं। प्रोटेक्शन ऑफिसर्स की एक राज्यवार सूची यहां दी गई है।
  • किसी एन.जी.ओ या सेवा प्रदाता से संपर्क कर सकते हैं।

आपकी शिकायत पी.ओ द्वारा लिखी जाएगी और आप अपने पास रखने के लिए इस शिकायत की एक मुफ्त कॉपी मांग सकते हैं। प्रोटेक्शन ऑफिसर आपकी मदद करेंगे1):

शिकायत दर्ज करने में

पी.ओ घरेलू घटना की रिपोर्ट 2)(डी.आई.आर) दर्ज करने में आपकी मदद करेगा जो घरेलू हिंसा की मामलों की स्पेशल रिपोर्ट होती है जिसमें उत्पीड़क(ओं) के सभी विवरण, पीड़ित के विवरण इत्यादि होंगे। वे सीधे कोर्ट में शिकायत दर्ज कराने में भी मदद करेंगे और कानूनी समर्थन पाने में आपकी सहायता करेंगे।

पुलिस को जानकारी दें

पी.ओ मेडिकल रिपोर्ट, यदि आपकी चिकित्सा जांच हो चुकी है, की एक कॉपी के साथ ही डी.आई.आर की एक कॉपी, आपने जिस क्षेत्र में हिंसा का सामना किया है, उसके भीतर स्थित पुलिस स्टेशन को भेजेगा। इसके बाद, पुलिस मामले को देखेगी और उत्पीड़क(ओं) की ओर से आपके विरुद्ध हिंसा की किसी क्रिया को होने से रोकेगी 3)

त्वरित संरक्षण और सहायता प्रदान करें

पी.ओ मदद करेगाः

  • आपके लिए एक सुरक्षा योजना तैयार करने में जिसमें आपकी सुरक्षा के लिए आवश्यक उपायों, और अदालत से आपके द्वारा मांगे गए आदेशों का विस्तृत विवरण होगा।
  • यदि आप घायल हैं, तो किसी चिकित्सालय से आपको और/या आपके बच्चे को चिकित्सा सहायता दिलाने में।
  • आपको सेवा प्रदाता से मिलवाएगा जो कानूनी मदद, परामर्श, चिकित्सा सुविधा, आश्रय घर इत्यादि में आपकी सहायता करेगा।

आपको आपके कानूनी अधिकार से अवगत करवाएगा

पी.ओ आपके साथ घरेलू हिंसा के विभिन्न प्रकारों के बारे में बात करेगा ताकि वह यह समझ सके कि आप किन परिस्थितियों से होकर गुजरे हैं। इसे डी.आई.आर में रिकॉर्ड किया जाएगा। तत्पश्चात, शिकायत दर्ज कराने के बाद पी.ओ आपको उन अधिकारों और उपचारों की जानकारी देगा जिसके लिए आप क़ानून के तहत पात्र हैं।

न्यायालय की कार्यवाहियों द्वारा आपकी सहायता

प्रोटेक्शन ऑफिसरः

  • ज़िला कानूनी सहायता सेवा प्राधिकरण के माध्यम से आपको दुबारा निःशुल्क कानूनी सहायता तक पहुँच प्रदान करेगा।

.     सुनिश्चित करेगा कि अदालती कार्यवाहियों के दौरान आप और आपके बच्चे उत्पीड़क के द्वारा उत्पीड़ित किए या दबाए न जाएं