भारत के प्रवासी नागरिक (ओ.सी.आई) या अनिवासी भारतीय (एन.आर.आई) या दूसरे देश में रहने वाले विदेशी नागरिक द्वारा गोद लेने की प्रक्रिया (गैर-धार्मिक कानून के तहत)

आखिरी अपडेट Sep 28, 2026

अगर आप भारतीय प्रवासी नागरिक (ओ.सी.आई), अनिवासी भारतीय (एन.आर.आई) या विदेश में रहने वाले विदेशी नागरिक हैं, तो बच्चे को गोद लेने के लिए नीचे दिए गए चरणों को पूरा करें:

चरण 1:

आप जिस देश में रह रहें हैं, उस देश के प्राधिकरण यानी अधिकृत (जिसको अधिकार हो) विदेशी गोद देने वाली एजेंसी या केंद्रीय प्राधिकरण से बात करें। आप जिस देश में रहते हैं, अगर उस देश में कोई अधिकृत विदेशी गोद देने वाली एजेंसी या केंद्रीय प्राधिकरण नहीं है, तो आपको उस देश में संबंधित सरकारी विभाग से बात करें। अगर आप भारतीय नागरिक हैं, तो  भारतीय दूतावास या उच्चायोग से भी मदद ले सकते हैं। ये संस्था या विभाग आपको होम स्टडी और पंजीकरण प्रक्रिया के बारे में मार्गदर्शन करेंगे। गोद लेने वाली विदेशी एजेंसियों की सूची के लिए यहां देखें।

चरण 2:

आपको जरूरी दस्तावेज जमा करने होंगे। कौन-कौन से दस्तावेज़ देने होंगे, इसकी पूरी जानकारी आपको वही संस्था या विभाग देगा, जिससे आपने संपर्क किया है।

चरण 3:

गोद लेने के लिए आपको दो बच्चों की प्रोफाइल दिखाई जाएंगी। इनमें से आपको 96 घंटे (4 दिन) के अंदर किसी एक बच्चे को चुनना होगा। जैसे ही आप एक बच्चे को चुन लेते हैं, दूसरे बच्चे की प्रोफाइल हटा दी जाएगी।अगर आप ऐसा नहीं कर पाते हैं, तो दोनों बच्चों की प्रोफाइल हटा दी जाएगी। किसी एक बच्चे को चुनने के बाद, आपको तीस दिनों के अन्दर उस बच्चे को गोद लेने के लिए अपनी सहमति देनी होगी। आपको बच्चे की बाल अध्ययन रिपोर्ट (Child Study Report) और मेडिकल जाँच रिपोर्ट पर अपने साइन करने होगा। अगर आप 30 दिनों के अंदर  ऐसा नहीं करते हैं, तो आपका नाम वरीयता सूची में सबसे नीचे चला जाएगा और उस बच्चे की प्रोफाइल भी हटा दी जाएगी।आप बच्चे से व्यक्तिगत रूप से भी मिल सकते हैं, और किसी डॉक्टर से उसकी मेडिकल रिपोर्ट को दिखा सकते हैं।

चरण 4:

गोद लेने की प्रक्रिया के लिए संबंधित संस्था अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) जारी करेगी। इसके बाद यह CARINGS पोर्टल पर भी दिखाई देगा।

चरण 5:

अगर आपको NOC मिल जाता है, तो कोर्ट का आदेश आने तक आप बच्चे को प्री-एडॉप्शन फोस्टर केयर (गोद लेने से पहले बच्चे की कुछ समय के लिए देखभाल) में अपने साथ रख सकते हैं। इसके लिए आपको घोषणा पत्र देना होगा। इसके बाद आपको बच्चे की स्थायी जिम्मेदारी (permanent custody) दे दी जाएगी, जब:

• बच्चे का पासपोर्ट और वीजा जारी हो जाता है।

• कोर्ट गोद लेने का आदेश जारी कर देती है।

चरण 6:

संबंधित संस्था आपकी ओर से वहां के कोर्ट में गोद लेने की अर्जी दाखिल करेगी। इस मामले की सुनवाई बंद कमरे में होगी। गोद लेने की अर्जी दाखिल होने की तारीख से दो महीने के अन्दर कोर्ट इस मामले पर फैसला देने की कोशिश करेगी।  

चरण 7:

गोद लेने का आदेश जारी होने के बाद, आपको दो महीने के अन्दर भारत आकर बच्चे को अपने साथ ले जाना होगा।

इसके बाद आगे की ये प्रक्रियाएँ पूरी की जाएंगी:

• कोर्ट से गोद लेने का आदेश मिलने के बाद, संबंधित संस्था तीन कामकाजी दिनों के अन्दर अनुरूपता प्रमाण-पत्र (Conformity Certificate) जारी कर देती है।

• गोद लेने की प्रक्रिया पूरी होने के बाद, संबंधित संस्था इसकी जानकारी आव्रजन विभाग और दूसरे संबंधित सरकारी विभागों को दे देगी।

• संबंधित संस्था बच्चे के लिए भारतीय पासपोर्ट, जन्म प्रमाण पत्र और ओसीआई कार्ड (अगर जरूरी हो तो) बनवाने में आपकी मदद करेगा।

चरण 8:

संबंधित संस्था बच्चे को गोद देने के बाद उसकी स्थिति की जानकारी लेने के लिए समय-समय पर जांच  करेगी। पहले साल में यह जांच हर तीन महीने में और दूसरे साल में हर छह महीने में की जाएगी। अगर किसी तरह की परेशानी आती है, तो परिवार को सलाह और मदद दी जाएगी। 

अगर बच्चे को गोद लेने के बाद कोई दिक्कत आती है, तो बच्चे को वापस लिया जा सकता है और उस बच्चे को फिर से गोद लेने के लिए कानूनी रूप से उपलब्ध घोषित किया जा सकता है।

 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

क्या आपके पास कोई कानूनी सवाल है जो आप हमारे वकीलों और वालंटियर छात्रों से पूछना चाहते हैं?

Related Resources

अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति के लोगों के खिलाफ क्रूर और अपमानजनक अत्याचार

अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति के लोगों के खिलाफ किए गए निम्न में से किसी भी अपराध को कानून ने अत्याचार माना हैछ
citizen rights icon

उपभोक्ता शिकायतों के प्रकार

उपभोक्ता संरक्षण कानून के तहत प्रत्येक व्यक्ति को निम्नलिखित प्रकार की उपभोक्ता शिकायतें दर्ज करने का अधिकार है |

पीड़ितों और गवाहों के अधिकार

यह विशेष कानून पीड़ितों, उनके आश्रितों और इस कानून के तहत दायर शिकायतों के गवाह के रूप में कार्य करने वालों को कुछ अधिकारों की गारंटी देता है।
citizen rights icon

उपभोक्ता अधिकारों के उल्‍लंघन के लिए दंड

उपभोक्ता अधिकारों के उल्‍लंघन के लिए किसी व्यक्ति या संस्था को दंडित करने की शक्ति केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण के पास होती है।

ई-कॉमर्स प्लैटफॉर्म के खिलाफ उपभोक्ता शिकायतें

खुदरा विक्रेताओं के माध्यम से खरीदे गए डिजिटल और अन्य उत्पादों से जुड़े अनुचित व्यापार व्‍यवहारों के खिलाफ भी शिकायत कर सकते हैं।

उपभोक्ता शिकायत मंच

उपभोक्ता संरक्षण कानून संबद्ध प्राधिकरणों को निर्दिष्‍ट करता है कि कोई उपभोक्ता-अधिकारों का उल्‍लंघन होने पर उनसे संपर्क कर सकता है।