मुकेश पासवान ने दिल्ली विश्वविद्यालय से बी.कॉम और 2017–2020 के बीच एल.एल.बी. की पढ़ाई की है।
वह बिहार के मुज़फ़्फ़रपुर में वकालत कर रहे हैं और बच्चों, महिलाओं व हाशिए पर रहने वाले समुदायों के अधिकारों से जुड़े मामलों में विशेषज्ञता रखते हैं। 2021 से वह ज़िला अदालत में प्रैक्टिस कर रहे हैं।
मुकेश का अनुभव बाल यौन शोषण, लैंगिक हिंसा और वंचित समुदायों के खिलाफ होने वाले अत्याचार से जुड़े मामलों पर काम करने का रहा है। उन्होंने ईवा फाउंडेशन जैसे संगठनों के साथ मिलकर वंचित समुदायों को कानूनी मदद और जागरूकता पहुँचाने का काम भी किया है।
इन दिनों मुकेश मुसहर समुदाय के ज़मीन के अधिकारों और अनाथ बच्चों से जुड़े यौन शोषण के मामलों पर खास तौर से ध्यान दे रहे हैं।
सुनीता कुमारी ने 2000 में जयप्रकाश विश्वविद्यालय, छपरा से बी.ए., 2008 में एल.एल.बी. और 2013 में एम.ए. किया है।
वह एक अनुभवी वकील हैं, जिन्हें छपरा और पटना में वकालत करते हुए एक दशक से ज़्यादा का अनुभव है। सुनीता जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (DLSA) की पैनल वकील और रिमांड वकील के रूप में काम कर चुकी हैं। सुनीता की समाज सेवा के प्रति गहरी प्रतिबद्धता है।
वह छपरा में भारतीय स्टेट बैंक के रीजनल ब्रांच ऑफिस में आंतरिक शिकायत समिति (POSH) की सदस्य हैं। इसके अलावा, वह बार काउंसिल ऑफ बिहार द्वारा गठित समिति में संयुक्त सचिव रह चुकी हैं और जिला बार एसोसिएशन, छपरा में भी सक्रिय भूमिका निभाती रही हैं। फिलहाल वह छपरा बार एसोसिएशन में सहायक सचिव के पद पर काम कर रही हैं।
अपनी वकालत के साथ-साथ सुनीता कानूनी जागरूकता कार्यक्रम भी चलाती हैं और ज़रूरतमंद लोगों को मुफ़्त कानूनी मदद देती हैं।
अभिषेक कुमार ने 2019 में नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी, ओडिशा (NLUO) से बी.ए. एल.एल.बी. (ऑनर्स) किया है। वह फिलहाल पटना उच्च न्यायालय और पटना सिविल कोर्ट में वकील के तौर पर काम कर रहे हैं।
उनका काम कानूनी जागरूकता बढ़ाने और सामाजिक न्याय तक लोगों की पहुँच सुनिश्चित करने से जुड़ा है। कॉलेज के समय में उन्होंने कानूनी जानकारी लोगों तक पहुँचाने के लिए एक प्लेटफॉर्म की सह-स्थापना की थी और विकलांग बच्चों के शिक्षा के अधिकार पर भी काम किया था।
उन्होंने घरेलू हिंसा और दहेज से जुड़े कई व्यक्तिगत मामलों को संभालने का अनुभव है। इसके अलावा, अभिषेक ने अहमदाबाद की एक स्टार्टअप कंपनी के साथ मिलकर किसानों तक कानूनी मदद पहुँचाने और कंपनी व किसानों के बीच संबंधों को बेहतर ढंग से चलाने के लिए एक कानूनी ढांचा तैयार करने पर भी काम किया है।
अभिषेक सामाजिक मुद्दों के साथ-साथ वह व्यापार, संपत्ति और नगरपालिका चुनाव से जुड़े मामलों पर भी काम करते हैं।
सिंथिया अन्नाम्मा मैथ्यू एक मानवाधिकार वकील और सामाजिक कार्यकर्ता हैं। उन्होंने 2024–2025 में रेनैसेंस यूनिवर्सिटी, इंदौर से एल.एल.एम. किया है और इससे पहले बैंगलोर यूनिवर्सिटी के विवेकानंद कॉलेज ऑफ लॉ से एल.एल.बी. की डिग्री हासिल की है।
उन्होंने पटना उच्च न्यायालय में वकील के तौर पर काम किया है और फिलहाल बक्सर सिविल कोर्ट में प्रैक्टिस कर रही हैं। सिंथिया ज़्यादातर ऐसे मामलों पर काम करती हैं, जिनमें महिलाओं और बच्चों को न्याय तक पहुँचने में मुश्किल होती है।
वह रिमांड होम और किशोर गृह के निरीक्षण के लिए पटना उच्च न्यायालय द्वारा बनाई गई समिति की सदस्य रह चुकी हैं। इसके अलावा, वह चिराग शिक्षा, संस्कृति और स्वास्थ्य जागरूकता केंद्र, बक्सर की सचिव हैं।
सिंथिया न्याय और शांति के लिए धार्मिक मंच, भारत की सदस्य हैं, साथ ही AMRAT (Asian Movement of Religious Women Against Human Trafficking) और Prison Ministry India (PMI) से भी जुड़ी हैं, जो कैदियों के कल्याण के लिए काम करने वाला एक स्वैच्छिक संगठन है।
वह स्थानीय प्रशासन द्वारा बनाई गई कई जिला स्तरीय समितियों जैसे रोगी कल्याण समिति और एससी/एसटी समिति की सदस्य भी हैं।
इसके अलावा, सिंथिया ने संयुक्त राष्ट्र (UN) में छह साल तक एक एनजीओ प्रतिनिधि के रूप में काम किया है, जहाँ उन्होंने समाज के सबसे हाशिए पर रहने वाले लोगों — खासकर महिलाओं और लड़कियों — के अधिकारों की वकालत की है।
शुभम शिवांश एक युवा और समर्पित वकील हैं, जो मोतिहारी जिला न्यायालय और पटना उच्च न्यायालय में सक्रिय रूप से वकालत कर रहे हैं। उन्होंने 2022 में नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी, ओडिशा (NLUO) से बी.ए. एल.एल.बी. (ऑनर्स) किया है।
न्याय को आम लोगों तक पहुँचाने के इरादे से वह फौजदारी, दीवानी और संवैधानिक मामलों में बेहतरीन तरीके से पैरवी करते हैं। इसके अलावा, वह कानूनी जागरूकता फैलाने और समाज के आख़िरी व्यक्ति तक न्याय और कानूनी मदद पहुँचाने के लिए लगातार कोशिश में जुटे रहते हैं।
प्रशांत ने 2020 में दिल्ली विश्वविद्यालय के लॉ सेंटर-II, फैकल्टी ऑफ लॉ से एल.एल.बी. किया है। उससे पहले उन्होंने 2017 में दिल्ली विश्वविद्यालय के सोशल वर्क विभाग से एम.एस.डब्ल्यू. (मास्टर ऑफ सोशल वर्क) और 2013 में उत्तर प्रदेश टेक्निकल यूनिवर्सिटी से बी.टेक. किया था।
अभी वह पटना उच्च न्यायालय में मानवाधिकार वकील के तौर पर काम कर रहे हैं। उन्होंने अपनी वकालत की शुरुआत दिल्ली स्थित मानवाधिकार संस्था HRLN (Human Rights Law Network) से की, जहाँ उन्होंने दिल्ली की कई अदालतों में काम किया और कानूनी जागरूकता फैलाने से जुड़े कार्यक्रमों में भी हिस्सा लिया।
इसके बाद उन्होंने छत्तीसगढ़ के बिलासपुर ज़िला न्यायालय में ज़िला विधिक सेवा प्राधिकरण (DLSA) के तहत असिस्टेंट लीगल एड डिफ़ेन्स काउंसल के तौर पर काम किया। वहाँ उन्होंने जेलों में, रिमांड के दौरान और मुकदमों के समय कानूनी मदद दी। साथ ही, DLSA के प्रशिक्षण कार्यक्रमों, लोक अदालतों और जागरूकता शिविरों में भी सक्रिय भूमिका निभाई।
अब वह पटना में रहकर बिहार के अलग-अलग हिस्सों में हाशिए पर रहने वाले लोगों के अधिकारों की रक्षा के लिए काम कर रहे हैं। उनकी खास रुचि सामाजिक कल्याण कानूनों जैसे कि दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम (2016), फुटपाथ विक्रेता अधिनियम (2014), मानसिक स्वास्थ्य देखरेख अधिनियम (2017), वरिष्ठ नागरिक कल्याण अधिनियम (2007) और किशोर न्याय अधिनियम (2015) आदि को ज़मीन पर सही से लागू करवाने में है।
आनंद रंजना ने 2003 में मगध यूनिवर्सिटी से अर्थशास्त्र में ग्रेजुएशन, 2008 में वीर कुंवर सिंह यूनिवर्सिटी से एल.एल.बी. और 2012 में इग्नू से एम.ए. (रूरल डेवलपमेंट) किया है। वह एक वकील और सामाजिक कार्यकर्ता हैं। अभी वह बक्सर व्यवहार न्यायालय में प्रैक्टिस करती हैं। स्थायी लोक अदालत की सदस्य रहते हुए उन्हें कई पारिवारिक और ज़मीनी विवादों को सुलझाने का अनुभव है।
वह मूक-बधिर, दिव्यांग बच्चों, महिलाओं, पुरुषों और बुजुर्गों को सरकारी योजनाओं का फायदा दिलाने के लिए लगातार काम कर रही हैं। सीनियर सिटिज़न्स के हक़, भरण-पोषण और हेल्थ से जुड़ी ज़रूरतों के लिए एसडीएम बक्सर और बुनियाद केंद्र से मदद दिलवाती हैं।
ट्रांसजेंडर समुदाय के उत्थान, इलाज और सरकारी सुविधाएं दिलाने के लिए भी सक्रिय हैं। बक्सर की सेक्स वर्करों के लिए वह लगातार काम करती हैं ताकि उन्हें सही इलाज, राशन कार्ड, आयुष्मान कार्ड और दूसरी ज़रूरी सुविधाएं मिल सकें।
एचआईवी पॉजिटिव और ड्रग्स यूज़र्स के लिए जांच और जागरूकता प्रोग्राम चलाकर उन्हें सही दिशा और सलाह देती हैं। वंचित और दबे-कुचले तबके के लोगों के हक़ के लिए प्रखंड, जिला अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों से लगातार जुड़ी रहती हैं।
जेल में बंद कैदियों के लिए “हक हमारा है” योजना के तहत भी उन्होंने कई अच्छे काम किए हैं।
कुमारी अदिति ने 2020 में चाणक्य नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी से बी.ए. एल.एल.बी. (ऑनर्स) किया है। वह फिलहाल पटना उच्च न्यायालय और सिविल कोर्ट में वकील के तौर पर काम करती हैं। पिछले कुछ सालों से वह मानवाधिकार से जुड़े मुद्दों पर लगातार काम कर रही हैं। उन्होंने स्तर पर लोगों के साथ मिलकर काम किया है और कई पीड़ितों के पुनर्वास में अहम भूमिका निभाई है।
अदिति ने जनहित के मामलों में कई एनजीओ के साथ मिलकर काम किया है। इसके अलावा, वह कानूनी जागरूकता, महिला सशक्तिकरण और लीगल एड से जुड़ी कई प्रशिक्षण सत्रों में हिस्सा ले चुकी हैं और खुद भी उन्होंने ऐसे सत्र लिए हैं।
धर्म किशोर एक वकील और जाने- माने मानवाधिकार कार्यकर्ता व समाजसेवी हैं। उन्होंने एल.एल.बी की पढ़ाई सेंट जोसेफ कॉलेज ऑफ लॉ, बेंगलुरु से की है और एल.एल.एम रेनेसां लॉ यूनिवर्सिटी, इंदौर से किया है।
अभी वह पटना उच्च न्यायालय में वकील के तौर पर काम कर रहे हैं। वह खास तौर पर गरीब और वंचित लोगों के केस लड़ते हैं, जो वकील रखने में सक्षम नहीं हैं। साथ ही, धर्म किशोर जेल मंत्रालय से भी जुड़े हैं और अंडर ट्रायल कैदियों के मामलों पर काम करते हैं।
इनकी विशेषज्ञता भूमि विवाद, एससी/एसटी एक्ट, पॉक्सो एक्ट, पाॅश एक्ट, घरेलू हिंसा और पारिवारिक विवाद जैसे मामलों में है। धर्म किशोर का मकसद है कि न्याय समाज के आख़िरी व्यक्ति तक पहुँचे और कानूनी मदद हर किसी के लिए आसानी से उपलब्ध हो। धर्म किशोर अपनी प्रभावशाली बात करने की शैली और मुवक्किलों के साथ सौम्य व्यवहार के लिए जाने जाते हैं।
प्रीति चौधरी बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय की पुरानी छात्रा हैं।अपने करियर के शुरू के चार सालों में उन्होंने कोलकाता उच्च न्यायालय, दिल्ली उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय में वकालत की। अभी वह पटना उच्च न्यायालय में वकील के तौर पर काम कर रही हैं।
प्रीति को जिला न्यायालय से लेकर सर्वोच्च न्यायालय तक अलग-अलग स्तरों पर केस संभालने का अनुभव है। वह खास तौर पर महिलाओं और बच्चों के अधिकारों से जुड़े मामलों पर काम करना पसंद करती हैं। उनके काम में लोगों तक कानूनी जानकारी पहुँचाना और आम लोगों के लिए न्याय को आसान बनाना शामिल है।
कॉलेज के दौरान उन्होंने लीगल एड सेल के जरिए घरेलू हिंसा, दहेज उत्पीड़न और दूसरे पारिवारिक मामलों में काम किया। सर्वोच्च न्यायालय में भी वह महिलाओं के हक़ के लिए काम किया है और इसके अलावा, उन्होंने मजदूरों, बच्चों के अधिकारों के लिए भी काम किया है।।
सामाजिक कार्यों के अलावा, प्रीति बैंकिंग, व्यापार, ज़मीन-जायदाद और नौकरी से जुड़े कानूनों पर भी काम करती हैं। बिहार में , वह अपने कानूनी अनुभव और कानूनी ज्ञान का इस्तेमाल राज्य के वंचित लोगों के लिए करना चाहती हैं, ताकि न्याय और बराबरी सभी तक पहुँच सके।