यह गाइड आपकी कैसे मदद कर सकती है?
न्याया की यह कार्यस्थल गाइड दिव्यांगजनों (पीडब्ल्यूडी) को उनके रोजगार अधिकारों और उससे जुड़े उपायों को समझने में मदद करेगी।
गाइड में किन कानूनों पर चर्चा होगी?
यह गाइड भारत के संविधान, 1950, दिव्यांग व्यक्तियों के अधिकार अधिनियम, 2016 (PwD अधिनियम), दिव्यांग व्यक्तियों के अधिकार नियम, 2017, और आयकर अधिनियम, 1961 में बताए दिव्यांगजनों के अधिकारों पर चर्चा करेगी।
दिव्यांग व्यक्ति कौन है?
कोई भी व्यक्ति जिसे लंबे समय तक शारीरिक, मानसिक, बौद्धिक या सुनने, देखने से जुड़ी समस्या हो और जिसकी वजह से वह समाज में दूसरे लोगों की तरह पूरी तरह से भाग नहीं ले पाता, उसे दिव्यांग/ विकलांग व्यक्ति कहा जाता है।
“बेंचमार्क” दिव्यांगता वाला व्यक्ति कौन है?
बेंचमार्क दिव्यांगता वाला व्यक्ति वह होता है, जिस पर किसी निर्धारित (Specified) विकलांगता का कम से कम 40% प्रभाव हो।
निर्धारित दिव्यांगताओं में शामिल हैं:
-
शारीरिक दिव्यांगता
- चलने-फिरने की दिव्यांगता: चलने-फिरने से जुड़ी गतिविधियों में कठिनाई। इसमें सेरेब्रल पाल्सी, बौनापन , मस्क्युलर डिस्ट्रॉफी, एसिड अटैक सर्वाइवर जैसे व्यक्ति शामिल हैं।
- दृष्टि बाधित: अंधेपन या या कमज़ोर नज़र।
- श्रवण बाधित: बहरापन या सुनने की क्षमता का कम होना
- वाक् और भाषा दिव्यांगता: बोलने या भाषा से जुड़ी स्थायी समस्या।
-
बौद्धिक दिव्यांगता
- बुद्धि से जुड़ी गंभीर सीमाएँ, जैसे तर्क करना, सीखना, समस्या सुलझाना जैसे काम ना कर पाना।
- अनुकूलन क्षमता में कठिनाई, यानी रोज़मर्रा के सामाजिक और व्यावहारिक काम ना कर पाना।
- इसमें कुछ खास सीखने की कठिनाइयाँ और ऑटिज़्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर शामिल हैं।
-
मानसिक रोग
- सोचने, मनोदशा (मूड), समझने, दिशा-बोध या याददाश्त से जुड़ी गंभीर परेशानी ।
- इससे फैसला लेने की क्षमता, व्यवहार, हकीकत पहचानने की शक्ति और सामान्य जीवन की जरूरतों को पूरा करने की क्षमता बुरी तरह प्रभावित होती है।
- इसमें मानसिक मंदता शामिल नहीं है।
4.अन्य कारणों से होने वाली दिव्यांगता
- लंबे समय से तंत्रिका से जुड़ा विकार: मल्टीपल स्क्लेरोसिस, पार्किंसंस बीमारी।
- रक्त संबंधी विकारः हीमोफीलिया, थैलेसीमिया, सिकल सेल बीमारी।
- अन्य दूसरी दिव्यांगता: जो केंद्र सरकार द्वारा अधिसूचित की जाए।
दिव्यांगता प्रमाणपत्र के लिए आवेदन क्यों जरूरी है ?
दिव्यांगता प्रमाणपत्र आपको ये सुविधा देता है कि आप सरकार और सरकार से जुड़ी NGO द्वारा चलाई जाने वाली सुविधाओं, छूट और योजनाओं का फायदा ले सकें। यह प्रमाणपत्र पूरे भारत में मान्य होता है।
दिव्यांगता प्रमाणपत्र के लिए कैसे आवेदन करें ?
सरकार कुछ योग्य और अनुभवी लोगों को प्रमाणित प्राधिकारी (Certifying Authority) नियुक्त करती है, जो विकलांगता प्रमाणपत्र जारी करने के लिए अधिकृत होते हैं। कोई भी व्यक्ति, जिसे निर्धारित दिव्यांगता है, वह Form-IV भरकर आवेदन कर सकता है।)⁵:
आवेदन कहाँ करें?
- अपने जिले की चिकित्सा प्राधिकरण (Medical Authority) या अन्य सक्षम प्राधिकारी के पास (जैसा कि आपके निवास प्रमाण पत्र में लिखा हो)।
- उस सरकारी अस्पताल के चिकित्सा प्राधिकरण के पास, जहाँ आप अपनी विकलांगता का इलाज करा रहे हैं या पहले करा चुके हैं।
ध्यान रखेंः
कोई कानूनी अभिभावक या संबंधित पंजीकृत संगठन किसी नाबालिग या ऐसे व्यक्ति की ओर से आवेदन कर सकता है जो स्वयं आवेदन करने में असमर्थ हो या जिसके लिए वह अयोग्य हो।
यहाँ संदर्भ अनुभाग में “फॉर्म-IV” देखें।
निकटतम चिकित्सा प्राधिकारी का पता यहाँ लगाएँ।
आवेदन के साथ आवश्यक दस्तावेज क्या हैं?
आवेदन के साथ निम्नलिखित संलग्न करें:
(a) निवास का प्रमाण;
(b) दो हाल की पासपोर्ट साइज फोटोग्राफ; और
(c) आधार संख्या या आधार नामांकन संख्या, अगर कोई हो।
प्राधिकारी का फैसला
अगर अधिकारी मानते हैं कि आप दिव्यांग व्यक्ति हैं, तो वे एक महीने के अंदर दिव्यांग प्रमाणपत्र जारी करेंगे। यह प्रमाणपत्र स्थायी भी हो सकता है। या फिर कुछ समय के लिए मान्य हो सकता है, अगर दिव्यांगता बदलती रहती है। उदाहरण: अगर किसी कर्मचारी का हाथ चोट है और एक साल में ठीक हो सकता है, तो इस स्थिति में एक साल के लिए अस्थायी प्रमाणपत्र दिया जाएगा।अगर अधिकारी को लगता है कि आवेदक पात्र नहीं है, तो वे एक महीने के अंदर लिखित में इसकी सूचना देंगे।
क्या आप प्राधिकरण के फैसले के खिलाफ अपील कर सकते हैं?
हाँ। अगर आपको प्राधिकरण का प्रमाणपत्र न देने का फैसला सही नहीं लगता, तो आप राज्य सरकार द्वारा निर्दिष्ट प्राधिकरण के पास इसके खिलाफ अपील कर सकते हैं।
यूनिक डिसेबिलिटी आईडी (UDID) क्या है?
विशिष्ट दिव्यांगता आईडी एक विशेष पहचान नम्बर है, जो हर दिव्यांग व्यक्ति के लिए अलग से जारी की जाती है।
आप अब यूडीआईडी के लिए स्वावलंबन कार्ड के रूप में आवेदन कर सकते हैं। यूडीआईडी (स्वावलंबन) कार्ड में दिव्यांग व्यक्ति से जुड़ी सभी ज़रूरी जानकारियाँ होती हैं।
यह एक कार्ड ही दस्तावेज़ पहचान और सत्यापन के लिए काम आता है, ताकि आप सभी योजनाओं और सुविधाओं का फायदा ले सकें।
यूडीआईडी ऑनलाइन पोर्टल से आप क्या-2 आवेदन कर सकते हैं:
- दिव्यांगता प्रमाणपत्र और UDID कार्ड के लिए आवेदन
- UDID कार्ड नवीनीकरण
- खोए हुए UDID कार्ड के लिए आवेदन
- ई-डिसेबिलिटी कार्ड और ई-UDID कार्ड डाउनलोड
अगर आपके पास दिव्यांगताप्रमाणपत्र नहीं है, तो UDID कार्ड के लिए कैसे आवेदन करें?
ऑनलाइन आवेदन भरें और सभी ज़रूरी दस्तावेज़ों की फोटो स्कैन कॉपी लगाएं।
आवेदन भरते समय दिव्यांगता विवरण टैब में “दिव्यांगताप्रमाणपत्र है?” के लिए “नहीं” का विकल्प चुनें, और आवेदन जमा करें।
अगर आपके पास दिव्यांगता प्रमाणपत्र है, तो UDID कार्ड के लिए कैसे आवेदन करें?
अगर आपका डेटा UDID पोर्टल पर माइग्रेट किया गया है, तो “पहले से दिव्यांगता प्रमाणपत्र है” पर क्लिक करें और लाभार्थी आईडी/राज्य आईडी या आधार संख्या (अगर लिंक की गई है), बाकी सभी जानकारी भरकर आवेदन को जमा करें।
अगर आपका डेटा UDID पोर्टल पर माइग्रेट नहीं किया गया है, तो नया आवेदन भरें और “दिव्यांगता प्रमाणपत्र है?” सवाल के लिए “हाँ” विकल्प चुनें। दिव्यांगताविवरण टैब में, बाकी सभी जानकारी भरकर आवेदन को जमा करें।
संविधान के तहत दिव्यांग व्यक्ति के लिए रोजगार से जुड़े अधिकार क्या हैं?
समान अवसर का अधिकार
हर नागरिक को सरकारी नौकरी या रोजगार से जुड़ी बातों में बराबर मौका मिलना चाहिए। सरकार ऐसे वर्गों के लिए सरकारी नौकरियों में आरक्षण का प्रावधान कर सकती है, जो सरकारी नौकरियों में ठीक से प्रतिनिधित्व नहीं पा रहे हैं। ⁸
सरकार की जिम्मेदारी
सरकार को दिव्यांगजनों को रोज़गार देने के लिए प्रभावी प्रावधान करने और सार्वजनिक सहायता देने की भी पूरी कोशिश करनी चाहिए। ⁹
PwD अधिनियम के तहत रोजगार से जुड़े अधिकार क्या हैं?
व्यावसायिक प्रशिक्षण और स्व-रोजगार का अधिकार¹⁰
सरकार द्वारा चलाई गई कई योजनाओं के ज़रिए दिव्यांगजन अपने रोज़गार के लिए कम ब्याज पर लोन ले सकते हैं। यह सहायता खासकर उन लोगों के लिए है, जो कोई हुनर सीखना चाहते हैं या खुद का काम शुरू करना चाहते हैं।
इन योजनाओं का मकसद हैः
- दिव्यांगजनों को सामान्य ट्रेनिंग और कौशल प्रशिक्षण कार्यक्रमों में शामिल करना, ताकि वह भी बाकी लोगों की तरह सीख सकें।
- यह तय करना कि हर दिव्यांग व्यक्ति को ज़रूरी सभी सुविधा और सहयोग मिले, ताकि वह ट्रेनिंग पूरी कर सके।
- खास प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाना — खासकर उन दिव्यांगजनों के लिए जो बाज़ार से जुड़े हों और जिन्हें विकासात्मक, बौद्धिक या एक से ज़्यादा तरह की विकलांगता या ऑटिज़्म हो।
- विकलांग व्यक्तियों द्वारा बनाए गए सामानों और उत्पादों का प्रचार और उनकी बिक्री बढ़ाना।
- आंकड़े तैयार करना — यह जानने के लिए कि कितने लोगों ने ट्रेनिंग ली और कितने स्व-रोज़गार शुरू कर पाए।
भेदभाव के खिलाफ अधिकार¹¹
सरकारी दफ्तरों और संस्थानों को रोजगार में दिव्यांगजनों के साथ किसी भी तरह का भेदभाव नहीं करना चाहिए। अगर किसी काम की प्रकृति ऐसी है जिसमें दिव्यांगजनों की सुरक्षा या काम की गुणवत्ता पर असर पड़ सकता है, तो सरकार कुछ संस्थानों को इस नियम से छूट दे सकती है।
दिव्यांग कर्मचारियों के लिएए सरकारी संस्थाओं को क्या करना चाहिए :
क्या करना चाहिए?
ज़रूरी सभी सुविधाएं और मदद उपलब्ध कराई जानी चाहिए, ताकि वे आसानी से अपना काम कर सकें। इसमें कमरे, रास्ते, दफ्तर और सूचना-सिस्टम ( वेबसाइट, कंप्यूटर) को ऐसा डिजाइन करना शामिल है कि दिव्यांगजन उनका इस्तेमाल आसानी से कर सकें।
क्या नहीं करना चाहिए?
केवल विकलांगता के कारण पदोन्नति / प्रमोशन से इनकार न करें और किसी ऐसे कर्मचारी को बर्खास्त न करें जिसे अपनी नौकरी के दौरान विकलांगता हुई है।
अगर कोई कर्मचारी दिव्यांग होने के बाद पद के लिए उपयुक्त नहीं है, तो नियोक्ता उन्हें समान वेतन और सेवा लाभों वाले किसी दूसरे पद पर ट्रांसफर कर सकता है। अगर कर्मचारी को किसी समान पद पर ट्रांसफर करना संभव नहीं हो रहा है, तो नियोक्ता उन्हें दूसरे पद पर रख सकता है, जब तक उपयुक्त पद उपलब्ध न होए या रिटायरमेंट की आयु तक (जो पहले हो)।
बॉम्बे हाई कोर्ट ने एक सरकारी नियोक्ता को दिव्यांग कर्मचारियों को उनकी सेवाएं बंद होने की तारीख से वैकल्पिक पद देने की तारीख तक बैक वेज का भुगतान करने का आदेश दिया।
रोजगार और पदोन्नति में आरक्षण का अधिकार
हर सरकारी प्रतिष्ठान को हर एक समूह के पदों में कैडर स्ट्रेंथ की कुल रिक्तियों (नौकरियों में) का कम से कम 4% बेंचमार्क दिव्यांगता वाले व्यक्तियों के लिए अलग रखना चाहिए।¹³
हालांकि, कार्य के प्रकार के आधार पर, सरकार किसी प्रतिष्ठान को इस आवश्यकता से छूट दे सकती है।¹⁴
4% में से, 1% प्रत्येक निम्नलिखित श्रेणियों के लिए आरक्षित होना चाहिए:
- अंधापन और कम दृष्टि;
- बहरापन और सुनने में कठिनाई;
- गतिशील दिव्यांगता जिसमें सेरेब्रल पाल्सी, कुष्ठ मुक्त, बौनापन, एसिड अटैक पीड़ित और मस्कुलर डिस्ट्रॉफी शामिल हैं।
- ऑटिज्म, बौद्धिक विकलांगता, विशिष्ट सीखने की दिव्यांगता और मानसिक बीमारी, कई दिव्यांगताएं
अगर किसी साल में भर्ती के लिए उपयुक्त बेंचमार्क दिव्यांगता वाला व्यक्ति उपलब्ध नहीं है, तो नियोक्ता उनकी रिक्ति को अगले भर्ती साल में ले जाएगा। यदि अगले भर्ती साल में भी वे उपलब्ध नहीं हैं, तो नियोक्ता विभिन्न श्रेणियों के बीच इंटरचेंज द्वारा पहले रिक्ति भरने के लिए सरकार की मंजूरी ले सकता है। नियोक्ता केवल तभी दिव्यांग व्यक्ति के अलावा किसी अन्य को नियुक्त करके रिक्ति भर सकता है, अगर उस साल पद के लिए कोई दिव्यांगव्यक्ति उपलब्ध न हो।
पदोन्नति में आरक्षण सरकारी निर्देशों के अनुसार होगा।
विशेष रोजगार एक्सचेंज और बेरोजगारी भत्ता
सरकार कार्यालयों या स्थानों को “विशेष रोजगार एक्सचेंज” के रूप में बनाए रखती है, जो जानकारी एकत्र करने और देने के लिए—
(i) दिव्यांग व्यक्तियों को रोजगार देने वाले नियोक्ताओं के बारे में;
(ii) रोजगार की तलाश में बेंचमार्क विकलांगता वाले व्यक्ति;
(iii) दिव्यांग बेंचमार्क विकलांगताओं वाले व्यक्तियों की तलाश में रिक्तियां।
विशेष रोजगार एक्सचेंज के लिए, सरकार निजी और सरकारी नियोक्ताओं को विकलांग बेंचमार्क दिव्यांगता वाले व्यक्तियों के लिए अपनी रिक्तियों के बारे में जानकारी देने का आदेश दे सकती है।
सरकार विशेष रोजगार एक्सचेंज के साथ दो साल से अधिक समय से पंजीकृत और किसी लाभकारी व्यवसाय में नहीं रखे गए विकलांग व्यक्तियों को बेरोजगारी भत्ता प्रदान करने के लिए योजनाएं बना सकती है।
निजी क्षेत्र में रोजगार
सरकार निजी क्षेत्र के नियोक्ताओं को प्रोत्साहन प्रदान करने का प्रयास करती है ताकि उनकी कार्यबल का कम से कम 5% बेंचमार्क विकलांगता वाले व्यक्तियों से बना हो।
उदाहरण के लिए, एक सरकारी योजना जिसमें नियोक्ताओं को अपने PwD कर्मचारियों के लिए EPF/ESI योगदान जमा करने की आवश्यकता नहीं है।
आयकर कानूनों के तहत दिव्यांग व्यक्ति के लिए क्या अधिकार हैं?
धारा 80 DD के तहत, भारत में निवासी किसी व्यक्ति या हिंदू अविभाजित परिवार द्वारा दिव्यांग आश्रितों के चिकित्सा उपचार (नर्सिंग सहित), प्रशिक्षण और पुनर्वास आदि के खर्च पर Rs. 75,000 तक, या गंभीर विकलांगता (80%) के मामले में Rs. 125,000 तक कटौती की जा सकती है, ।
धारा 80U के तहत, भारत में निवासी दिव्यांग व्यक्ति Rs. 75,000 तक या गंभीर विकलांगता (80%) के मामले में Rs. 125,000 की कटौती का दावा कर सकता है।
अधिकारों के उल्लंघन पर शिकायत कैसे करें?
जो कोई महसूस करता है कि कोई सरकारी प्रतिष्ठान दिव्यांग व्यक्तियों के खिलाफ भेदभाव कर रहा है, वह शिकायत निवारण अधिकारी (GRO) (हर सरकारी प्रतिष्ठान में नियुक्त) के पास शिकायत दर्ज कर सकता है।¹⁶
GRO दो सप्ताह के भीतर मुद्दे की जांच करेंगेऔर सुधारात्मक कार्रवाई के लिए सरकारी प्रतिष्ठान से बात करेंगे। GRO शिकायतों का रजिस्टर भी बनाकर रखेंगे।
अगर कोई अपनी शिकायत पर की गई कार्रवाई से संतुष्ट नहीं है, तो वे जिला-स्तरीय दिव्यांगता समिति से संपर्क कर सकते हैं।
कानून का उल्लंघन करने पर सजा क्या है?
अपराध | सजा
PwD अधिनियम या नियमों के किसी प्रावधान का उल्लंघन | पहला अपराध – दस हजार रुपये तक जुर्माना। बाद के अपराध के लिए – पचास हजार से पांच लाख रुपये तक जुर्माना
बेंचमार्क दिव्यांगताओं वाले व्यक्तियों के लिए लाभ को धोखे से से लेने पर, दो साल तक की कैद और/ या एक लाख रुपये तक जुर्माना
अत्याचार जैसे:
- दिव्यांग व्यक्ति को सार्वजनिक रूप से अपमानित करने के लिए जानबूझकर अपमान या धमकी देना
- दिव्यांग व्यक्ति पर हमला करके उन्हें अपमानित करना, या विकलांग महिला की मर्यादा का हनन
- अपनी स्थिति का उपयोग करके विकलांग बच्चे या महिला की इच्छा पर हावी होना या यौन शोषण करना
- दिव्यांग व्यक्ति के किसी अंग या इंद्रिय या सहायक उपकरण के उपयोग में स्वेच्छा से चोट पहुंचाना, क्षति पहुंचाना या हस्तक्षेप करना
छह महीने से पांच साल तक की कैद और जुर्माना
संसाधन
योजनाएं
- दिव्यांगजन स्वावलंबन योजना: आय-उत्पादन शुरू करने, व्यावसायिक या कौशल विकास करने आदि के लिए रियायती क्रेडिट प्रदान करना।
- प्रेरणा: दिव्यांग व्यक्तियों द्वारा बनाए गए उत्पादों के लिए विपणन सहायता
- राज्य-वार योजनाएं यहां
जानकारी का स्रोत
दिव्यांग व्यक्तियों के अधिकार अधिनियम, 2016
दिव्यांग व्यक्तियों के अधिकार नियम, 2017
http://www.swavlambancard.gov.in/
http://disabilityaffairs.gov.in/content/
शब्दावली शब्द
दिव्यांग व्यक्ति: कोई भी व्यक्ति जिसे लंबे समय तक शारीरिक, मानसिक, बौद्धिक या सुनने, देखने से जुड़ी समस्या हो और जिसकी वजह से वह समाज में दूसरों लोगों की तरह पूरी तरह से भाग नहीं ले पाता, उसे दिव्यांग व्यक्ति कहा जाता है।
नमूना फॉर्म
दिव्यांगता प्रमाणपत्र के लिए आवेदन करने के लिए फॉर्म IV
फॉर्म- IV form IV.pdf फॉर्म को डाउनलोड करने के लिए यहाँ क्लिक करें।
दिव्यांग व्यक्तियों द्वारा विकलांगता प्रमाणपत्र प्राप्त करने के लिए आवेदन
[नियम 17(1) देखें]
(1) नाम : ____________________ (उपनाम) (प्रथम नाम) (मध्य नाम)
(2) पिता का नाम : ____________________ माता का नाम: ____________________
(3) जन्म तिथि : ________ / ________ / ________ (तिथि) (माह) (वर्ष)
(4) आवेदन के समय आयु : ________ वर्ष
(5) लिंग: पुरुष/महिला/ट्रांसजेंडर ____________________
(6) पता:
(a) स्थायी पता (b) वर्तमान पता (यानी संचार के लिए)
(c) वर्तमान पते पर रहने की अवधि ____________________
(7) शैक्षिक स्थिति (कृपया लागू होने पर टिक करें)
(i) स्नातकोत्तर
(ii) स्नातक
(iii) डिप्लोमा
(iv) उच्च माध्यमिक
(v) हाई स्कूल
(vi) मिडिल
(vii) प्राथमिक
(viii) निरक्षर
(8) व्यवसाय ____________________
(9) पहचान चिह्न (i) ____________________ (ii) ____________________
(10) दिव्यांगता की प्रकृति : ____________________
(11) दिव्यांग होने की अवधि: जन्म से/वर्ष से ____________________
(12) (i) क्या आपने कभी दिव्यांगता प्रमाणपत्र जारी करने के लिए आवेदन किया ___ हाँ/नहीं
(ii) यदि हाँ, विवरण:
(a) किस प्राधिकारी को और किस जिले में आवेदन किया ________
(b) आवेदन का परिणाम
(13) क्या आपको कभी दिव्यांगता प्रमाणपत्र जारी किया गया है? यदि हाँ, कृपया सच्ची प्रति संलग्न करें।
घोषणा: मैं hereby घोषणा करता हूं कि ऊपर दिए गए सभी विवरण मेरी जानकारी और विश्वास के अनुसार सत्य हैं, और कोई महत्वपूर्ण जानकारी छिपाई या गलत बताई नहीं गई है। मैं आगे कहता हूं कि यदि आवेदन में कोई अशुद्धि पाई जाती है, तो मैं प्राप्त लाभों की जब्ती और कानून के अनुसार अन्य कार्रवाई के लिए उत्तरदायी रहूंगा।
(दिव्यांग व्यक्ति का हस्ताक्षर या बायां अंगूठा छाप, या बौद्धिक दिव्यांगता, ऑटिज्म, सेरेब्रल पाल्सी और बहु विकलांगताओं वाले व्यक्तियों के मामले में उनके कानूनी अभिभावक का)
तिथि :
स्थान :
संलग्नक:
- निवास का प्रमाण (कृपया लागू होने पर टिक करें)।
(a) राशन कार्ड,
(b) मतदाता पहचान पत्र,
(c) ड्राइविंग लाइसेंस,
(d) बैंक पासबुक,
(e) पैन कार्ड,
(f) पासपोर्ट,
(g) टेलीफोन, बिजली, पानी और कोई अन्य उपयोगिता बिल जो आवेदक का पता दर्शाता हो,
(h) पंचायत, नगरपालिका, छावनी बोर्ड, किसी राजपत्रित अधिकारी, या संबंधित पटवारी या सरकारी स्कूल के प्रधानाध्यापक द्वारा जारी निवास प्रमाणपत्र,
(i) दिव्यांग व्यक्तियों, निराश्रित, मानसिक रूप से बीमार और अन्य दिव्यांगता वाले आवासीय संस्थान के निवासी के मामले में, ऐसी संस्थान के प्रमुख से निवास प्रमाणपत्र।
- दो हाल की पासपोर्ट साइज फोटोग्राफ
(केवल कार्यालय उपयोग के लिए)
तिथि :
स्थान :
जारी करने वाले प्राधिकारी के हस्ताक्षर
स्टैम्प