रैगिंग विरोधी कानून के तहत नियुक्त अधिकारी

रैगिंग को रोकने के लिए, प्रत्येक कॉलेज और विश्वविद्यालय को निम्नलिखित प्राधिकारणों  का गठन करना चाहिये-

ऍण्‍टी-रैगिंग कमेटी

प्रत्येक कॉलेज के लिए एक ऍण्‍टी-रैगिंग कमेटी का गठन करना अनिवार्य है, जिसमें निम्नलिखित सदस्यों होते हैं-

  • कॉलेज के प्रमुख
  • पुलिस के प्रतिनिधि
  • स्थानीय मीडिया
  • युवाओं के लिए काम करने वाले एन.जी.ओ.
  • अभिभावक प्रतिनिधि
  • संकाय प्रतिनिधि
  • छात्र प्रतिनिधि (फ्रेशर्स और सीनियर्स, दोनों)
  • परा-शिक्षण कर्मचारी

ऍण्‍टी रैगिंग कमेटी के कर्तव्य हैं –

  • सुनिश्चित करें कि संबद्ध कॉलेज, भारत में रैगिंग पर कानून का पालन कर रहा है
  • ऍण्‍टी-रैगिंग दल की गतिविधियों पर नज़र रखें
  • ऍण्‍टी-रैगिंग दल से सिफारिशें प्राप्‍त करें और रैगिंग प्रकरणों पर अंतिम कार्रवाई करें

ऍण्‍टी-रैगिंग दस्‍ता

प्रत्येक कॉलेज के लिए एक ऍण्‍टी-रैगिंग दस्‍ते का गठन करना अनिवार्य है, जो कॉलेज के प्रमुख, जैसे प्रिंसिपल या डीन द्वारा नामज़द होता है। इस दस्ते में कैंपस समुदाय के विभिन्न सदस्य जैसे शिक्षक, छात्र स्वयंसेवक आदि लोगों का प्रतिनिधित्‍व हाते है। पुलिस या मीडिया जैसे बाहरी प्रतिनिधि इस दस्ते का हिस्सा नहीं होते हैं।

ऍण्‍टी-रैगिंग दस्ते के कर्तव्य-

  • रैगिंग की किसी भी घटना की जांच-पड़ताल करना। कॉलेज के प्रमुख, माता-पिता या अभिभावक, संकाय के सदस्य, छात्र आदि सहित कोई भी किसी रैगिंग घटना के बारे में सूचित करने या शिकायत दर्ज करने के लिए ऍण्‍टी-रैगिंग दस्ते से संपर्क कर सकता है।
  • रैगिंग की घटना की जांच रिपोर्ट और अपनी सिफारिशें ऍण्‍टी-रैगिंग कमेटी को भेजें, जो फिर आगे की कार्रवाई करेगी।
  • हॉस्टल जैसे किसी भी स्थान पर जहां रैगिंग होने की संभावना होती है, वहां का औचक दौरा और निरीक्षण आदि करें।

मेंटरिंग / परामर्श सेल / कक्ष

प्रत्येक शैक्षणिक वर्ष के अंत में प्रत्येक कॉलेज के लिए एक मेंटरिंग सेल का गठन करना अनिवार्य है। यह उन छात्रों से बना होता है, जिन्होंने कॉलेज या संस्थान में शामिल होने वाले नये छात्रों के संरक्षक बनने की स्वयं पहल की है।

मेंटरिंग सेल का कर्तव्य, फ्रेशर्स या नये छात्रों को सहायता और मेंटरशिप / परामर्श देना है। कृपया ध्यान दें कि कानून के अनुसार, छह फ्रेशर्स पर एक मेंटर हो सकता है, और अधिक सीनियर स्तर के प्रत्येक मेंटर के मार्गदर्शन में छह संरक्षक होंगे। उदाहरण के लिए, यदि राम द्वितीय वर्ष का छात्र है, जिसमें छह फ्रेशर्स की मेंटरिंग की जानी है और श्याम तृतीय वर्ष का छात्र है, तो श्याम, राम और पांच अन्य ऐसे मेंटरों का मार्गदर्शन करेगा।

रैगिंग पर निगरानी सेल

प्रत्येक विश्वविद्यालय के लिए रैगिंग पर एक निगरानी सेल का गठन करना अनिवार्य है। रैगिंग पर निगरानी सेल के कर्तव्य हैं-

  • रैगिंग को रोकने के लिए विश्वविद्यालय से संबद्ध सभी कॉलेजों की गतिविधियों का समन्वय करें।
  • मेंटरिंग सेल, ऍण्‍टी-रैगिंग स्क्वॅड और कॉलेजों के प्रमुखों से ऍण्‍टी-रैगिंग समिति की गतिविधियों पर रिपोर्ट प्राप्‍त करें।
  • रैगिंग विरोधी उपायों को प्रचारित करने के लिए कॉलेजों के प्रयासों की समीक्षा करें।
  • माता-पिता और छात्रों से रैगिंग जैसे कृत्‍यों में शामिल न होने, और रैगिंग में शामिल पाये जाने पर सज़ा भुुगतने के लिए तैयार रहने हेतु हस्ताक्षरित शपथपत्र प्राप्‍त करें।
  • ऍण्‍टी-रैगिंग उपायों के कार्यान्वयन को सुनिश्चित करने के लिहाज़ से विश्वविद्यालय के किसी भी उपनियम या अध्यादेश में संशोधन करें।
अधिक जानकारी के लिए इस सरकारी संसाधन को पढ़ें

एक बच्चे के साथ यौन स्पर्श

एक बच्चे के साथ किसी भी तरह का यौन स्पर्श, कानून के द्वारा यौन आक्रमण (सेक्सुअल असॉल्ट) के रूप में माना जाता है।

एक व्यक्ति एक बच्चे पर यौन आक्रमण कर रहा है अगर वह:

  • किसी भी बच्चे के शरीर को यौन के उद्देश्य से स्पर्श करता है। किसी भी बच्चे की योनि, लिंग, गुदा, या स्तन को स्पर्श करना, उसके यौन के उद्देश्य को दर्शाता है।
  • किसी बच्चे को अपने या किसी और की योनि, लिंग, गुदा, स्तन को छूने के लिए मजबूर करता है।

इसके लिए सजा, जुर्माना के साथ साथ, 3-5 साल से लेकर आजीवन कारावास भी हो सकता है।

LGBTQ+ व्यक्तियों को चोट पहुंचाना या उन्हें घायल करना

यदि आपको ऐसी किसी भी हिंसा का सामना करना पड़ा है, जिसमें आप घायल या आहत हुए हैं, तो आपको अपने लिंग या यौन अभिविन्यास की परवाह किए बिना, पुलिस के पास जाकर शिकायत करने और प्राथमिकी दर्ज करने का अधिकार है। आप किसी भी लिंग के क्यों न हों, आप किसी के भी खिलाफ शिकायत दर्ज कर सकते हैं। आप निम्नलिखित लिंग-तटस्थ कानूनों का उपयोग करने के लिये, पुलिस स्टेशन जा सकते हैं:

आपको शारीरिक तौर पर आहत करना

आपको चोट पहुंचाना

यदि कोई आपको चोट पहुंचाता है, या वे जानते हैं कि उनके कुछ काम आपको चोट पहुंचा सकते हैं, तो यह कानूनन एक अपराध है।

आपको भारतीय दंड संहिता, 1860 की धारा 321/350 के तहत प्राथिमिकी (एफआईआर) दर्ज करानी चाहिए।

विशेष प्रकार की चोटें

अगर कोई जानबूझकर आपको चोट पहुंचाता है, या ऐसा काम करता है जिसके परिणामस्वरूप आपको चोट पहुंचती हैं, जो नीचे दिये गए प्रकार के हैं तो यह कानूनन एक अपराध है। इस प्रकार के कुछ विशेष चोटें ये हैं:

  • निपुंसक बनाना
  • आपको स्थायी रूप से अंधा या किसी भी कान से बहरा बना देना।
  • आपके किसी जोड़ों को, या आपके शरीर के ढ़ांचे को नुकसान पहुंचाना।
  • आपके सिर या चेहरे को स्थायी रूप से विकृत कर देना।
  • आपकी किन्हीं हड्डियों या आपके किसी दांतों का विस्थापन या फ्रैक्चर कर देना।
  • आपके जीवन को खतरे में डाल देना, या आप पर गंभीर शारीरिक चोट पहुंचाना, जिसके चलते आप किसी भी कार्य करने के लिये पंगु बन जाएं।
  • आपको चोट पहुंचाने के लिए अम्ल (एसिड) का उपयोग करना, जिसके परिणामस्वरूप आपको, ऊपर दी गई किसी भी प्रकार की चोट पहुंचे। तब आपको भारतीय दंड संहिता, 1860 की धारा 326 बी की मदद से प्राथिमिकी (एफआईआर) दर्ज करानी चाहिए।

यदि आपको ऊपर दी गई किसी भी प्रकार के चोट का सामना करना पड़ा है, तो आपको भारतीय दंड संहिता, 1860 की धारा 320/322 की मदद से एक प्राथिमिकी (एफआईआर) दर्ज करानी चाहिए।

खतरनाक हथियारों का उपयोग करना

आप पर खतरनाक हथियारों का इस्तेमाल करना, या आम वस्तुओं या जानवरों का जिसे खतरनाक तरीके से इस्तेमाल किया जा

सकता है, इस्तेमाल करना एक अपराध है, जैसे:

खतरनाक हथियार

  • छूरा घोंपने या काटने की वस्तुएं, जैसे चाकू, कैंची इत्यादि।
  • गोली मारने के हथियार, जैसे बंदूक आदि।
  • किसी विस्फोटक पदार्थ का उपयोग करना, जैसे पटाखों आदि।
  • वे वस्तुएं जिससे आग निकलती है, या कोई गर्म वस्तु, या वे चीजें जो आग उगलती (टार्च ब्लोअर) हैं, आदि।
  • कोई भी जहर, संक्षारक पदार्थ या सामग्री जो खतरनाक हो सकते हैं।

सामान्य वस्तुएं, जिन्हें हथियार के रूप में उपयोग किया जा सकता है।

  • ऐसा कोई घरेलू उत्पाद, जैसे फिनाइल, जिसको उपभोग करने के लिए आपको मजबूर किया जाए।
  • कोई वस्तु, जैसे सिगरेट लाइटर, जिसका उपयोग आपको चोट पहुंचाने के लिए किया जाए।
  • आपको चोट पहुंचाने के लिए किसी जानवर का इस्तेमाल करना, जैसे कुत्तों से आप पर हमला करवाना, आदि।

यदि आपको चोट लगी है, या घायल हो गये हैं, या ऐसी वस्तुओं जिससे आपकी मृत्यु हो सकती है, तो आपको भारतीय दंड संहिता, 1860 की धारा 324/326 के तहत एक प्राथिमिकी (एफआईआर) दर्ज करानी चाहिए।

आपको चोट पहुंचाने की धमकी देना

आपको चोट पहुंचाने के लिये, कोई भी इशारा करना या तैयारी करके धमकी देना, एक अपराध है। आपको भारतीय दंड संहिता, 1860 की धारा 350/351 के तहत एक प्राथिमिकी (एफआईआर) दर्ज करानी चाहिए।

उदाहरण के लिए, यदि कोई आपकी ओर चाकू लहराता है और आपको चोट पहुंचाने की धमकी देता है, तो वे आपको ऐसे इशारे कर रहे हैं, जो आपको चोट पहुंचा सकते हैं, या आपको डरा सकते हैं।

उदाहरण के लिए, यदि कोई आपके कार्यालय से निकलने का इंतजार करता है ताकि वे आपको लाठी से मार सकें, तो वे आपको चोट पहुंचाने की तैयारी कर रहे हैं।

क्या मेहर दहेज नहीं है?

मुस्लिम विवाह के दौरान दिया जाने वाला मेहर दहेज नहीं है, क्योंकि मेहर का लेन-देन धार्मिक और चली आ रही प्रथा के तौर पर होता है और यह कानूनी भी है।

बलात्कार की सजा

चेतावनीः दी गई जानकारी शारीरिक हिंसा और यौन हिंसा के बारे में जानकारी है, जो कुछ पाठकों को परेशान और विचलित कर सकती है।

बलात्कार के जुर्म के लिए 10 साल से लेकर उम्र कैद (आजीवन कारावास) तक की सजा और जुर्माना का नियम है। 1

भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) में दो तरह की कारावास (जेल) का प्रावधान हैः एक साधारण कारावास और कठोर कारावास।

कठोर कारावास साधारण कारावास की तुलना में ज्यादा कठोर सज़ा है, जिसमें कठोर श्रम शामिल होता है, और आमतौर पर गंभीर अपराधों के लिए ये दिया जाता है। 

नीचे बताई गई परिस्थितियों में कठोर सजा दी जाती है:

जब सर्वाइवर की उम्र 16 साल से कम हो। 

अगर सर्वाइवर की उम्र 16 साल से कम है, तो सजा 20 साल से उम्रकैद की सजा (व्यक्ति के बचे हुए जीवन भर की जेल की सजा ) के साथ जुर्माना है।2

अगर सर्वाइवर की उम्र 12 साल से कम है, तो अपराधी को मौत की सजा हो सकती है।3

इन  मामले में, ऐसा जुर्माना लगाया जाता है, जिससे कि सर्वाइवर के इलाज और पुनर्वास का खर्च निकल सके। यह जुर्माना सर्वाइवर को दिया जाता है।

जब बलात्कार के कारण, किसी महिला की मौत हो जाए या वह निष्क्रिय (कोमा की स्थिति) हो जाए। 

अगर बलात्कार के कारण ऐसी चोट लगती है, जो महिला की मौत का कारण बनती है या उसे हमेशा के लिए निष्क्रिय (कोमा) अवस्था में डाल देती है। तो इस स्थिति में, अपराधी को 20 साल की जेल से लेकर उम्रकैद, जुर्माना या मौत की सजा हो सकती है।4

इस कानून के तहत कौन-कौन से अपराध और दंड आते हैं?

ट्रिगर वॉर्निंग: निम्नलिखित विषय में शारीरिक हिंसा पर जानकारियां दी गई है, जिससे कुछ पाठकों को असहज महसूस हो सकता है। 

एसिड अटैक से संबंधित अपराधों को भारतीय दंड संहिता, 1860 और आपराधिक दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 के तहत निर्दिष्ट किया गया है। नीचे दिए गए अपराधों के लिए किसी को भी दंडित किया जा सकता है, चाहे उनका लिंग कुछ भी हो। जो कि निम्नलिखित हैं:

एसिड फेंकना या एसिड फेंकने का प्रयास करना 

किसी व्यक्ति पर एसिड फेंकना और उसे चोट पहुंचाना अपराध है। एसिड फेंकने की सजा कम से कम 10 साल की जेल है, जिसे आजीवन कारावास तक बढ़ाया जा सकता है और साथ ही जुर्माना भी लगाया जा सकता है, जिससे एसिड अटैक सर्वाइवर के चिकित्सा खर्चों को पूरा किया जा सके।

साथ ही किसी व्यक्ति पर एसिड फेंकना या फेंकने का प्रयास करना भी अपराध है। इस अपराध के लिए कम से कम 5 साल की जेल जिसे 7 साल तक बढ़ाया जा सकता है और साथ ही जुर्माना भी लगाया जा सकता है।

एसिड फेंकने में किसी की मदद करना 

किसी को एसिड फेंकने में मदद करना भी अपराध है। किसी को अपराध करने में मदद करना कानून के तहत उकसाने के रूप में जाना जाता है। उकसाने की सजा वही है जो एसिड फेंकने या किसी अन्य व्यक्ति पर एसिड फेंकने का प्रयास करने की सजा है।

एसिड अटैक सर्वाइवर का इलाज करने या मुफ्त तत्काल उपचार प्रदान करने से इनकार करना 

एसिड अटैक सर्वाइवर को चिकित्सा उपचार का अधिकार है और इस तरह का उपचार प्रदान करने से इनकार करने वाला अस्पताल इस कानून के तहत अपराधी है। सर्वाइवर का इलाज करने से इंकार करने वाले व्यक्ति के खिलाफ पुलिस के समक्ष शिकायत दर्ज की जा सकती है।

भारतीय दंड संहिता, 1860 में विशिष्ट एसिड अटैक अपराधों के अलावा, अन्य अपराधों को भी एसिड हमलों के मामले में पुलिस द्वारा एफआईआर या चार्जशीट में सम्मिलित या लिखा जा सकता है। इनमें हत्या, हत्या का प्रयास, खतरनाक हथियारों से किसी को चोट पहुंचाना, और गंभीर चोट पहुंचाना शामिल हैं।

यौन टिप्पणी करना और धमकी देना क्या है?

[जारी चेतावनी: इस लेख में शारीरिक हिंसा, यौन हिंसा, दुर्व्यवहार और गाली-गलौज के बारे में जानकारी है जो कुछ पाठकों को विचलित कर सकती है। 

अगर कोई किसी महिला को यौन या सेक्सुअल रूप से धमकी देने वाली कोई बात कहता है, तो यह कानून के तहत अपराध है। कानून के तहत केवल पुरुष को ही इस तरह के अपराध के लिए दंडित किया जा सकता है।

यौन टिप्पणियों के कुछ उदाहरण इस प्रकार है:

• कोई टिप्पणी या बयान जो किसी महिला को सेक्सुअल महसूस होता है।

• कोई सामान्य टिप्पणी जो बिल्कुल सेक्सुअल प्रकृति की नहीं है, लेकिन इसका सेक्सुअल निहितार्थ है। उदाहरण के लिए, ऐसे शब्द कहना जिनके कई अर्थ हो या इशारे करना।

यौन धमकी मौखिक, हावभाव से या लिखित हो सकती है। ऐसे कृत्यों के लिए और अधिक सजा का प्रावधान है। ऐसा बयान देना या व्यवहार करना एक यौन धमकी है यदि:

• यह सेक्सुअल है और इसका उद्देश्य किसी महिला को डराना, चोट पहुंचाना या परेशान करना है।

• यह किसी महिला को अनुचित स्पर्श या किसी जबरदस्ती यौन क्रिया के बारे में चेतावनी देने के लिए बनाया गया है जो होने वाला होता है।

यौन धमकी या टिप्पणी करने पर न्यूनतम एक वर्ष और अधिकतम पांच वर्ष तक की जेल की सजा है और साथ ही जुर्माना भी है।

इस कानून के तहत क्या-क्या प्रतिबंधित है?

कानून निम्नलिखित गतिविधियों को प्रतिबंधित करता है:

लैंगिक चयन का संचालन

बांझपन विशेषज्ञों सहित कोई भी किसी स्त्री या पुरुष या दोनों पर किसी ऊतक, भ्रूण, गर्भजीव, द्रव या युग्मक का उपयोग करके यौन चयन नहीं कर सकता।

कानून किसी को, जिसमें स्त्री का रिश्तेदार या पति भी शामिल है, दोनों पर या तो लैंगिक चयन प्रक्रियाओं का उपयोग करने या प्रोत्साहन देने पर भी प्रतिबंध लगाता है।

प्रसव पूर्व निदान प्रक्रियाओं का संचालन

कोई भी व्यक्ति पंजीकृत केन्द्र सहित किसी भी स्थान का प्रयोग प्रसव से पूर्व निदान की प्रक्रिया या परीक्षण करने के लिए नहीं कर सकता। यह कानून गर्भवती महिला के रिश्तेदार या पति सहित किसी को भी कुछ अनुमत स्थितियों को छोड़कर प्रसव से पूर्व निदान की प्रक्रियाओं या परीक्षणों का इस्तेमाल करने से रोकता है।

भ्रूण के लिंग का निर्धारण

पंजीकृत केन्द्र सहित कोई भी भ्रूण के लिंग के निर्धारण के लिए प्रसव पूर्व निदान प्रक्रियाओं का इस्तेमाल नहीं कर सकता।

यदि लिंग निर्धारण प्रक्रिया के परिणामस्वरूप बच्चे का गर्भपात हो जाता है, तो यह भ्रूण हत्या का अपराध होगा।

गर्भपात संबंधी कानून के बारे में अधिक जानकारी के लिए कृपया हमारे लेख को पढ़ें।

भ्रूण के लिंग की सूचना देना

कोई भी गर्भवती महिला, उसके रिश्तेदार या किसी अन्य व्यक्ति, शब्दों, चिन्हों या किसी अन्य तरीके से भ्रूण के लिंग की सूचना नहीं दे सकता है।

लिंग निर्धारण के लिए मशीन बेचना

कानून के तहत पंजीकृत कोई भी ऐसी अल्ट्रासाउंड मशीन, इमेजिंग मशीन, स्कैनर या कोई अन्य उपकरण नहीं बेच सकता जो भ्रूण के लिंग का पता लगा सके।

लैंगिक निर्धारण या लैंगिक चयन सुविधाओं का विज्ञापन

कोई भी व्यक्ति गर्भाधान से पहले लिंग या लिंग चयन के पूर्व निर्धारण की सुविधाओं के बारे में ऑनलाइन या ऑफ़लाइन कुछ जारी, प्रकाशित, या वितरित नहीं कर सकता।

किसी को चोरी करने में मदद करना

अगर कोई चोरी करने में किसी की मदद करता है, तो उसे उसी तरह के दंड से दंडित किया जाएगा जैसे उसने खुद ही यह कार्य किया है।

हालाँकि, यदि कोई चोरी करने में किसी की सहायता कर रहा है, और अन्य कार्य भी किया जाता है, तो उसे किए गए कार्य के लिए इस तरह दंडित किया जाएगा, मानो उसने स्वयं वह कार्य किया हो। उदाहरण के लिए, राम ने सीता के घर से चोरी करने का फैसला किया, और श्याम उसकी मदद करने के लिए तैयार हो गया, और चोरी के दौरान, सीता की हत्या कर दी गई, तो श्याम को हत्या और चोरी दोनों के लिए दंड दिया जाएगा।

रैगिंग रोकने के लिए संस्थानों के कर्तव्य

रैगिंग रोकना कॉलेज का कर्तव्य है। सभी कॉलेजों / विश्वविद्यालयों को परिसर के भीतर और बाहर, दोनों जगहों पर रैगिंग खत्म करने के लिए सभी उपाय करने होंगे। कानून के तहत, सभी उप-इकाइयों, जैसे विभाग, कैंटीन, आदि सहित कोई भी कॉलेज या संस्थान, किसी भी तरह से रैगिंग की अनुमति नहीं दे सकता है।

सभी कॉलेजों / विश्वविद्यालयों को ऍडमिशन और नामांकन के समय जैसे अलग-अलग चरणों में रैगिंग रोकने के लिए कदम उठाने होते हैं।

प्रवेश के समय किये जाने वाले उपाय

सभी कॉलेजों / विश्वविद्यालयों को, छात्रों के प्रवेश के समय उपाय करने चाहिए। इनमें से कुछ हैं-

  • एक सार्वजनिक घोषणा (किसी भी प्रारूप में-प्रिंट, ऑडियो विजुअल, आदि) करें कि कॉलेज में रैगिंग पूरी तरह से निषिद्ध है, और जो कोई भी छात्रों की रैगिंग करता पाया जाएगा, उसे कानून के तहत दंडित किया जाएगा।
  • प्रवेश की विवरणिका में रैगिंग के बारे में जानकारी दें। उच्च शिक्षा संस्थानों में रैगिंग के खतरे को रोकने के लिए यूजीसी विनियमनों 2009 (यूजीसी गाइडलाइंस) को मुद्रित किया जाना चाहिए। साथ ही सभी महत्वपूर्ण पदाधिकारियों, जैसे कि प्रमुख, हॉस्टल वार्डन, आदि की संपर्क जानकारी, साथ ही ऍण्‍टी-रैगिंग हेल्पलाइन का नंबर भी छपना चाहिए।
  • आवेदन पत्र के साथ एक शपथ पत्र प्रदान करें। छात्रों और अभिभावकों के लिए ये हलफनामे में लिखा होना चाहिए कि छात्र और माता-पिता ने यूजीसी के दिशानिर्देशों को पढ़ा और समझा है, वे जानते हैं कि रैगिंग निषिद्ध है और आवेदक किसी भी ततरह की रैगिंग में शामिल नहीं होगा, और ऐसे किसी भी व्यवहार में लिप्‍त पाये जाने पर वह सज़ा के लिए उत्तरदायी होगा या होगी। यदि छात्रावास के लिए आवेदन करने पर आवेदक को अतिरिक्त शपथ पत्रों पर हस्ताक्षर करने होंगे।
  • एक दस्तावेज़ प्रदान करें जो आवेदक के सामाजिक व्यवहार पर रिपोर्ट करता है। इस तरह के दस्तावेज़ में किसी भी लिखित कदाचार का उल्‍लेख किया जाएगा और कॉलेज, आवेदक पर नज़र रख सकता है। यह दस्तावेज़ आवेदन पत्र के साथ नत्‍थी होना चाहिए।
  • हॉस्टल वार्डनों, छात्रों, अभिभावकों आदि के प्रतिनिधियों के साथ रैगिंग रोकने के उपायों और कदमों पर चर्चा करें।
  • रैगिंग के लिए दंड-प्रावधानों और यूजीसी के दिशा-निर्देशों और अमल में ला सकने वाले अन्य कानूनी प्रावधानों को विभिन्न स्थानों पर प्रमुखता से डिस्‍पले करें।
  • जिन स्थानों पर रैगिंग होने की संभावना है, उन स्थानों को पहचान कर उन पर कड़ी निगरानी रखें। ऍण्‍टी-रैगिंग स्क्वॅड और संबद्ध
  • वॉलंटियरों को सेमेस्टर के पहले कुछ महीनों के दौरान अप्रत्‍याशित समय-समय पर ऐसे स्थानों का औचक निरीक्षण करना चाहिए।

नामांकन / पंजीकरण के दौरान किये जाने वाले उपाय

सभी कॉलेजों / विश्वविद्यालयों को छात्रों के नामांकन / पंजीकरण के समय कुछ निश्‍चित उपाय करने होंगे। इनमें से कुछ हैं-

  • कॉलेज के प्रत्येक नये छात्र को एक पर्चा दिया जाना चाहिए जो यह निर्दिष्ट करेगा-
    • रैगिंग के दौरान और प्रकरण में जिन व्यक्तियों से संपर्क साधा जा सकता है, जैसे ऍण्‍टी-रैगिंग हेल्पलाइन नंबर, हॉस्टल वार्डन, स्थानीय पुलिस आदि जैसे व्यक्तियों की संपर्क जानकारी।
    • नये छात्रों को बातचीत करने और वरिष्ठ छात्रों के साथ मिलने-जुलने में सक्षम बनाने के लिए जो समावेशन कार्यक्रम आयोजित किये जाएंगे।
    • संबद्ध कॉलेज के छात्र के बतौर मिले अधिकार।
    • निर्देश कि छात्र को किसी भी प्रकार की रैगिंग में शामिल नहीं होना चाहिए, भले ही सीनियर छात्रों द्वारा ऐसा करने को बोला जाये, और यह कि रैगिंग के हर प्रकरण को तुरंत रिपोर्ट किया जाएगा।
    • शैक्षणिक परिवेश के साथ-साथ फ्रेशर्स की पहचान की सुविधा के लिहाज़ से बनीं सभी गतिविधियों वाला एक कैलेंडर।
  • छात्रों को रैगिंग की रिपोर्ट करने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। यदि वे पीड़ित हैं या वे किसी अन्य छात्र की ओर से शिकायत करते हैं, तो उनकी पहचान सुरक्षित और गुप्‍त रखी जाएगी, और उन्हें केवल उस घटना की रिपोर्ट करने के लिए कोई भी प्रतिकूल परिणाम भुगतना नहीं पड़ेगा।
  • फ्रेशर्स / नये छात्रों की बैच को छोटे-छोटे समूहों में विभाजित किया जाएगा, और प्रत्येक समूह में एक शिक्षक होगा जो छात्रों की समस्याएं समझने के लिए उनके साथ रोज़ बातचीत करेगा।
  • हॉस्टलों में फ्रेशर्स को सीनियर्स से अलग रखा जाना चाहिए। ऐसी परिस्थितियों में जहां यह संभव नहीं है, सीनियर छात्रों की जूनियर छात्रों तक पहुंच की निगरानी वार्डन / छात्रावास सुरक्षा द्वारा की जानी चाहिए।
  • कॉलेज के प्रमुख को शैक्षणिक वर्ष के अंत में प्रथम वर्ष के छात्रों के माता-पिता को एक पत्र भेजना चाहिए, ताकि उन्हें रैगिंग और उसके दंड-प्रावधानों के बारे में बताया जा सके। पत्र में माता-पिता से यह भी आग्रह करना चाहिए कि वे अपने बच्चों को रैैगिंग जैसे किसी भी व्यवहार में शामिल न होने के लिए कहें।

सामान्य उपाय

ऊपर दिये गये उपायों के अलावा, हरेक कॉलेज को कुछ सामान्य उपाय करने होंगे। इनमें से कुछ हैं-

  • कॉलेज को ऍण्‍टी-रैगिंग कमेटी, ऍण्‍टी-रैगिंग स्क्वॅड, मेंटरिंग सेल और मॉनिटरिंग सेल जैसे प्राधिकरणों का गठन करना चाहिए।
  • हरेक छात्रावास में एक पूर्णकालिक वार्डन होना चाहिए, जिसकी योग्यताओं में ये शामिल हों-छात्रों को अनुशासित कर सकना, रैगिंग को रोकने और छात्रों से संवाद / परामर्श करने की क्षमता।
  • वार्डन को हर समय उपलब्ध होना चाहिए, कॉलेज द्वारा प्रदत्त उसका एक टेलीफोन नंबर अच्छी तरह से प्रसारित होना चाहिए।
  • कॉलेज को ऑडियो-विजुअल सामग्री, काउंसलिंग सत्र, कार्यशालाओं आदि के माध्यम से रैगिंग के खिलाफ प्रचार के लिए व्यापक उपाय करने होंगे।
  • कॉलेजों / विश्वविद्यालयों को कक्षाओं / पुस्‍तकालयों के अलावा छात्रों को ऍण्‍टी-रैगिंग स्क्वॅड से रैगिंग की शिकायत करने के लिहाज़ से संबद्ध मोबाइल फोनों पर बेरोक और आसान पहुंच मुहैया करानी चाहिए।
  • परा-शिक्षण स्‍टाफ सहित कॉलेज के सभी संकायों को रैगिंग के मुद्दे पर संवेदनशील बनाया जाएगा।

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