जो लोग जेल में हैं, और उनके खिलाफ मुकदमे चल रहे हैं तो उन्हें अंडर-ट्रायल कैदी कहा जाता है। चूंकि भारत में मुकदमें कई वर्षों तक चलते रहते हैं, इसलिए अंडर-ट्रायल कैदियों को, अपराध के लिये दोषी सिद्ध हुए बिना, लंबे समय तक जेल में रहने से, उन्हें बचाया जाना चाहिए। कानून में अंडर-ट्रायल कैदियों की रक्षा के लिए जमानत के प्रावधान हैं।
अगर एक व्यक्ति को किसी अपराध के लिए गिरफ्तार किया गया है और वह उस अपराध के लिए निर्दिष्ट कारावास की अधिकतम सीमा से आधे समय तक जेल में रह चुका है, तो न्यायालय को उन्हें रिहा करने का आदेश जरूर देना चाहिये।
फिर भी, यदि न्यायालय को पर्याप्त कारण मिलते हैं तो वह अंडर-ट्रायल कैदी की निरंतर हिरासत में रखने का आदेश दे सकता है, यद्यपि वे सजा के अधिकतम सीमा के आधे समय से अधिक तक जेल में रह चुके हैं।


Taiyab
March 27, 2026
1 sal se jail mein Rakha hua hai use Bahar nahin nikala ja raha hai
Sikha
July 18, 2026
Query Not Complete. अगर किसी व्यक्ति को 1 साल से जेल में रखा गया है और उसे जमानत या रिहाई नहीं मिल रही है, तो पहले यह समझना जरूरी है कि मामला किस stage पर है।
संभव स्थितियाँ:
* केस चल रहा है और अभी trial पूरा नहीं हुआ।
* जमानत (bail) नहीं मिली।
* सजा हो चुकी है।
* गरीब होने या वकील न होने के कारण पैरवी ठीक से नहीं हो पा रही।
ऐसी स्थिति में ये कदम उठाए जा सकते हैं:
1. Case की जानकारी निकालें
* कौन-सी धारा लगी है?
* किस कोर्ट में मामला चल रहा है?
* charge sheet दाखिल हुई या नहीं?
* पहले bail application लगी थी या नहीं?
2. Regular Bail / Default Bail
अगर लंबे समय से जेल में है और:
* पुलिस समय पर charge sheet नहीं दे पाई,
* या trial बहुत लंबा चल रहा है,
तो जमानत का अधिकार बन सकता है।
3. High Court में Bail Petition
Sessions Court से bail reject होने पर High Court में जमानत याचिका दाखिल की जा सकती है।
4. Legal Services Authority से मुफ्त वकील
अगर परिवार आर्थिक रूप से कमजोर है तो:
National Legal Services Authority या जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (DLSA) से मुफ्त वकील मिल सकता है।
5. Speedy Trial का अधिकार
भारत के संविधान के अनुसार बहुत लंबे समय तक बिना trial पूरा किए जेल में रखना गलत माना जा सकता है। ऐसे मामलों में High Court में petition दायर की जा सकती है।
जरूरी दस्तावेज:
* FIR number
* थाना
* Case number
* जेल का नाम
* किस कोर्ट में मामला है
* आदेश की कॉपी (यदि उपलब्ध हो)