वातावरण में धूल, धुएं, गैस, धुंध, गंध और वाष्प आदि के होने को वायु प्रदूषण कहा जाता है। वायु प्रदूषण मानव, पौधे, पशु जीवन और पर्यावरण को नुकसान पहुंचाता है।
वायु प्रदूषण को समझने के लिए वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) को समझना भी जरूरी है। AQI एक क्षेत्र में वातावरण में नीचे बताए प्रदूषकों की मात्रा को मापता है,
जो इस प्रकार हैंः
1. ठोस वायु प्रदूषक- जलाऊ लकड़ी, फसल अवशेष, गोबर के उपले, कोयला, लिग्नाइट और चारकोल जैसे ठोस ईंधन को जलाने से निकालने वाला धुंआ।
2. तरल वायु प्रदूषक- घरों में गैसोलीन, मिट्टी के तेल और डीजल के इस्तेमाल से निकालने वाला धुंआ।
3. गैसीय वायु प्रदूषक- सल्फर डाइऑक्साइड, कार्बन मोनोऑक्साइड और नाइट्रोजन जैसी गैसें।
4. ध्वनि (शोर) प्रदूषक- गाड़ी, इंजन, जनरेटर और पटाके आदि से निकलने वाली तेज आवाजें।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा निर्धारित राष्ट्रीय परिवेशी वायु गुणवत्ता मानकों सल्फर डाइऑक्साइड, नाइट्रोजन डाइऑक्साइड, ट्राइऑक्सीजन, सीसा, कार्बन मोनोऑक्साइड, अमोनिया, बेंजीन, आर्सेनिक, निकल और कण पदार्थ जैसे बारह प्रदूषकों को तय सीमा से नीचे रखना होता है। ये तय सीमाएं औद्योगिक, आवासीय, ग्रामीण, पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील क्षेत्रों और केंद्र सरकार द्वारा बनाए गए दूसरे क्षेत्रों के लिए अलग-अलग होती हैं।
स्वच्छ पर्यावरण का अधिकार
स्वच्छ पर्यावरण का अधिकार, सभी भारतीयों को मिलने वाला अधिकार है। भारतीय संविधान का अनुच्छेद 21, जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार देता है, जिसमें प्रदूषण मुक्त हवा और स्वच्छ पर्यावरण का अधिकार शामिल है। अनुच्छेद 51ए (जी) पर्यावरण की रक्षा और संरक्षण के लिए हर नागरिक के कर्तव्य को भी बताता है।
अगर कोई व्यक्ति वायु प्रदूषण के कारण स्वास्थ्य से जुड़ी किसी परेशानी से पीड़ित है, तो उसे कानूनी रूप से शिकायत करने का अधिकार है। इस लेख में पढ़ें “आप वायु प्रदूषण पर कानूनी शिकायत किससे कर सकते हैं?”
