न्यायालयों की भूमिका

आखिरी अपडेट Sep 28, 2026

गोद लेने की प्रक्रिया में कोर्ट की बहुत महत्वपूर्ण भूमिका होती है।गोद लेने  के दौरान कोर्ट कई ज़रूरी काम करते हैं। उनमें से कुछ प्रमुख काम नीचे दिए गए हैं:

गोद लेने का आदेश (गैर-धार्मिक कानून के तहत)

गैर-धार्मिक कानून के तहत, गोद लेने के लिए विशेष दत्तक ग्रहण एजेंसी (SAA) बच्चे के ज़रूरी कागज़ात कोर्ट  में जमा करती है। कोर्ट इन कागज़ात को देखकर तय करती है कि बच्चे को गोद देने की अनुमति दी जाए या नहीं। आवेदन में ये सभी होना चाहिए:

• विशेष दत्तक ग्रहण एजेंसी (SAA) और साथ में आवेदन करने वाली संस्था (अगर कोई हो), जैसे बाल देखभाल संस्थान की जानकारी

• गोद लेने वाले माता-पिता की जानकारी, जैसे उनका नाम और CARA में किया गया रजिस्ट्रेशन नंबर

• गोद लिए जाने वाले बच्चे की जानकारी

• यह जानकारी कि कानून के अनुसार अब बच्चे को गोद दिया जा सकता है, उसका प्रमाण या सबूत

• यह जानकारी कि गोद लेने वाले माता-पिता ने ऐसा शपथपत्र दिया है, जिससे SAA और DCPU (जिला बाल संरक्षण इकाई) के सामाजिक कार्यकर्ता ज़रूरत पड़ने पर उनके घर का दौरा कर सकें

• दत्तक ग्रहण समिति के फैसले की कॉपी

आवेदन में और कौन-कौन सी जानकारी होती है, इसे समझने के लिए आवेदन का नमूना को यहां पढ़ें। अगर कोर्ट  सभी ज़रूरी बातों से संतुष्ट होती है, तो वह गोद लेने का आदेश जारी करती है। इस आदेश के बाद बच्चे को कानूनी रूप से गोद लेने की अनुमति मिल जाती है।

गोद लेने का आदेश देने से पहले कोर्ट  इन बातों को ध्यान रखती है:

• कि बच्चे की भलाई के लिए उसे गोद लिया जा रहा हो।

• कि बच्चे की उम्र और समझ के अनुसार उसकी इच्छाओं को ध्यान में रखा जाए।

• कि गोद लेने वाले माता-पिता ने गोद लेने के बदले किसी तरह के पैसे या इनाम लेने की सहमति न दी हो और न लिया हो।

• कि गोद लेने की सुनवाई बंद कमरे में हो

गोद लेने की अनुमति (हिंदू कानून)

हिंदू कानून के तहत, कुछ मामलों में अभिभावक को किसी बच्चे को गोद लेने या उसे गोद देने से पहले अदालत से अनुमति लेनी होती है, जो इस प्रकार हैं:

• जब बच्चे के माता-पिता दोनों की मृत्यु हो चुकी हो

• जब बच्चे के माता-पिता दोनों ने संन्यास लेकर हमेशा के लिए सांसारिक जीवन छोड़ दिया हो

• जब बच्चे के माता-पिता दोनों ने बच्चे को छोड़ दिया हो

• जब कोर्ट ने यह घोषित किया हो कि बच्चे के माता-पिता दोनों मानसिक रूप से स्वस्थ नहीं हैं

• जब बच्चे के माता-पिता कौन हैं, यह पता न हो

अपील (गैर-धार्मिक कानून और हिंदू कानून के तहत)

अगर गैर-धार्मिक कानून के तहत गोद लेने के मामले में अधिकारियों के फैसले से आप सहमत नहीं हैं या आपका आवेदन खारिज हो गया है, तो आप उस फैसले के 30 दिनों के भीतर बच्चों की कोर्ट में अपील कर सकते हैं।

अगर किसी वजह से 30 दिनों के भीतर अपील नहीं कर पाए, तो भी आप अपील कर सकते हैं। अगर कोर्ट को आपकी वजह सही लगे, तो वह आपकी अपील पर सुनवाई करेगी।

अगर बच्चों की कोर्ट के फैसले से भी आप संतुष्ट नहीं हैं, तो आप अपने राज्य के हाई कोर्ट में अपील कर सकते हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

क्या आपके पास कोई कानूनी सवाल है जो आप हमारे वकीलों और वालंटियर छात्रों से पूछना चाहते हैं?

Related Resources

भारत में ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के अधिकारों पर गाइड

गाइड में किन कानूनों पर बात होगी? इस गाइड में, भारत के संविधान में शामिल ट्रांसजेंडर व्यक्ति (अधिकारों का संरक्षण) अधिनियम, 2019 और ट्रांसजेंडर व्यक्ति (अधिकारों का संरक्षण) नियम 2020 के प्रावधानों पर बात होगी। ऐसे कानून क्यों बनाए गए? सामाजिक स्वीकृति की कमी के कारण ट्रांसजेंडर व्यक्तियों को समाज का हिस्सा नहीं माना जाता […]
citizen rights icon

हिंदू विवाह कानून के तहत तलाक की कार्यवाही के दौरान सुलह

सभी पारिवारिक कानूनी मामलों में, न्यायालय पति-पत्नी के बीच सुलह के प्रयास को प्रोत्साहित करते हैं।

ऑनलाइन बैंक धोखाधड़ी को रोकने के लिए बैंकों की जिम्मेदारी

बैंकों को अपने ग्राहकों को इलेक्ट्रॉनिक बैंकिंग लेनदेन के लिए अनिवार्य रूप से एसएमएस अलर्ट के लिए पंजीकरण करने के लिए कहना चाहिए।

ग्राहक दायित्व

ग्राहक को किसी तीसरे पक्ष के साथ भुगतान क्रेडेंशियल प्रकट नहीं करना चाहिए। यदि कोई ग्राहक ऐसा करता है तो लापरवाह के कारण देनदारी बढ़ जाएगी।

उपभोक्ता अधिकारों के उल्‍लंघन के लिए दंड

उपभोक्ता अधिकारों के उल्‍लंघन के लिए किसी व्यक्ति या संस्था को दंडित करने की शक्ति केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण के पास होती है।

उपभोक्ता शिकायतों के प्रकार

उपभोक्ता संरक्षण कानून के तहत प्रत्येक व्यक्ति को निम्नलिखित प्रकार की उपभोक्ता शिकायतें दर्ज करने का अधिकार है |