बाल विवाह का प्रतिषेध

आखिरी अपडेट Nov 3, 2022

भारत में बाल विवाह सदियों पुरानी प्रथा है। इस सामाजिक बुराई को खतम करने के लिए, कानून लोगों को बाल विवाह करने से रोकता है और बाल विवाह कराने वालों के लिए दंड का प्रावधान करता है।

हालांकि, अगर किसी बच्चे की शादी हो चुकी है, तो कानून उसे तुरंत अवैध नहीं करता। इस तरह से विवाहित बच्चे के पास विवाह को इसे जारी रखने या रद्द करने का विकल्प होता है।

कुछ व्यक्तिगत कानूनों ( ऐसे कानून जो विभिन धर्मों के अंतर्गत विवाह, तलाक आदि जैसे पहलुओं को नियंत्रित करते हैं) के अनुसार, भारत में बच्चे कोयौवन प्राप्त करने के बाद विवाह की अनुमति दी जा सकती है। लड़कियों के मामले में यौवन 18 वर्ष की उम्र से पहले और लड़को के मामले में यौवन 21 वर्ष की उम्र से पहले भी आ सकता है। कई मामलों में न्यायालयों ने यह माना है कि जहाँ व्यक्तिगत कानूनों के तहत यौवन प्राप्ति पर शादी आयोजित हो गयी हो ऐसी शादी अवैध नहीं होगी। हालांकि बाल विवाह कानून के तहत ऐसी किसी भी शादी को शून्यकरणीय करने का विकल्प विवाहित बच्चे के पास होगा।

परन्तु कुछ परिस्थितियों में, कुछ बाल विवाहों को पूरी तरह से अवैध माना जाता है।

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बाल विवाह की सूचना देना

सहित बाल विवाह की शिकायत कोई भी कर सकता है। बालक/बालिका खुद अपने बाल विवाह की शिकायत दर्ज कर सकते हैं।

बाल विवाह प्रतिषेध अधिकारी

प्रत्येक राज्य में बाल विवाह के मुद्दों को रोकने के लिए राज्य सरकारों द्वारा बाल विवाह प्रतिषेध अधिकारी (सीपीएमओ) नियुक्त किए जाते हैं।

बाल विवाह को रोकने की न्यायालय की शक्ति

आरोपी व्यक्ति इस आदेश को रद्द करने या इसे बदलने के लिए न्यायालय में आवेदन कर सकता है। न्यायालय ऐसी सुनवाई स्वप्रेरणा भी कर सकता है।

बाल विवाह रद्द करना

बाल विवाह में जिस बच्चे का विवाह हुआ है उसके पास अपनी शादी रद्द करने यl उसे अपनी शादी को शून्यकरणीय करने का विकल्प है।

उपभोक्ता शिकायत मंच

उपभोक्ता संरक्षण कानून संबद्ध प्राधिकरणों को निर्दिष्‍ट करता है कि कोई उपभोक्ता-अधिकारों का उल्‍लंघन होने पर उनसे संपर्क कर सकता है।

उपभोक्ता शिकायतों के प्रकार

उपभोक्ता संरक्षण कानून के तहत प्रत्येक व्यक्ति को निम्नलिखित प्रकार की उपभोक्ता शिकायतें दर्ज करने का अधिकार है |