वसीयत बदलना

आखिरी अपडेट Jul 12, 2022

आप अपनी इच्छानुसार जितनी बार चाहें अपनी वसीयत को बदल सकते हैं। वसीयत के पंजीकृत होने के बाद भी, आप के द्वारा इसमें परिवर्तन करना संभव है।

यदि आप अपनी इच्छाओं को सही तरीके से व्यक्त करने के लिए अपनी वसीयत में बड़ा परिवर्तन कर रहे हैं, तो आपको आदर्श रूप से एक ‘कोडिसिल’ को निष्पादित करना चाहिए। ‘कोडिसिल’ एक लिखित बयान है, जो मौजूदा वसीयत के पूरक के रूप में होता है, या इसे संशोधित करता है। इसे, मूल वसीयत की भांति ही निष्पादित किया जाना चाहिए।

आप अपनी वसीयत में परिवर्तन करने के लिये, उसमें से कुछ हटा सकते हैं, कुछ संशोधित कर सकते हैं, या नई बात जोड़ सकते हैं। परन्तु आपको इन परिवर्तनों के समीप हाशिये में या वसीयत के अन्त में अपने, इनका हवाला देते हुए हस्ताक्षर करने होंगे और अपने गवाहों के हस्ताक्षर करवाने होंगे। पहले से निष्पादित वसीयत में कोई परिवर्तन नहीं किए जा सकते हैं (सिवाय इसे ज्यादा स्पष्ट करने या समझने योग्य बनाने के लिए)

Comments

    दयानन्द

    September 9, 2023

    मैने 2013 में अपने एक इकलौते पुत्र के नाम से अपने मकान की रजिस्टर्ड वसीयत कराई थी अब मैं उस वसीयत में अपनी दो पुत्रियों को भी समान हिस्सेदार बनाना चाहता हूं तो कैसे करुं ।

    Shelly Jain

    February 21, 2024

    आपको अपनी पूर्व वसीयत को संशोधित करने की आवश्यकता होगी। इसके लिए आपको एक नया वसीयत दर्ज करने की जरूरत होगी जिसमें आप अपनी दो पुत्रियों को समान हिस्सेदार बना सकते हैं। इसके लिए आप अपने क्षेत्रीय कोर्ट या अधिकारी से संपर्क करके वसीयत को संशोधित करने की प्रक्रिया के बारे में पूरी जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

    सतीश

    June 25, 2024

    बुआ की अपनी संपत्ति एक भतीजे के नाम से वसीयत राजिस्टेड है पैरोवेट के लिए कॉर्ट फाइल किया है या दूसरे भतीजा पाटनेर पेशिशन दिया है

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विल का पंजीकरण

विल का पंजीकृत करना अनिवार्य नहीं है।

प्रोबेट की प्रक्रिया

कुछ मामलों में आपको, एक वसीयत के लाभार्थी के रूप में अपना अधिकार स्थापित करने के लिए, उस वसीयत के ‘प्रोबेट’ को प्राप्त करना आवश्यक है।

वसीयत के लिये एक निष्पादक (Executor) की नियुक्ति

जिस व्यक्ति को आप अपनी मृत्यु के बाद, वसीयत में दिए गए अनुदेशों को निष्पादित करने अथार्त लागू करने का दायित्व सौंपते हैं, उसे आपकी विल का निष्पादक कहा जाता है।

मृत्यु के बाद भी भरण-पोषण का उत्तरदायित्व

माता-पिता के भरण-पोषण का कर्तव्य किसी व्यक्ति के लिये, स्वयम् के मृत्यु के बाद भी रहती है।