भारत में अंतर्जातीय विवाह पर प्रतिबंध लगाने वाला कोई कानून नहीं है।

हिंदू जीवन साथी

आखिरी अपडेट Jul 12, 2022

यदि आप यह देखना चाहते हैं कि क्या आपने अपने ऊपर लागू होने वाले अधिनियम की बुनियादी शर्त को पूरा कर लिया है, तो आपको निम्नलिखित व्यक्तियों के समूह में से एक होना पड़ेगाः

  • कोई भी व्यक्ति जो धर्म से हिंदू हो और वीरशैव, लिंगायत में भी शामिल हो सकता है या ब्रह्म, प्रार्थना, या आर्य समाज का अनुयायी हो सकता है।
  • कोई भी व्यक्ति जो धर्म से बौद्ध, जैन या सिख हो।
  • कोई अन्य व्यक्ति जिस पर यह अधिनियम लागू होता हो और जो धर्म से मुस्लिम, ईसाई, पारसी, या यहूदी न हो। हालांकि यदि आप यह साबित कर सकते हों कि कोई हिंदू कानून या उस कानून के हिस्से के तौर पर कोई रीति या प्रथा उस समाज/कबीला/जाति को संचालित करती है, तो आप हिंदू विवाह अधिनियम के अंतर्गत शादी कर सकते हैं।

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हिंदू विवाह का पंजीकरण

हिंदू विवाह अधिनियम, धारा 8 में हिंदू कानून कहता है कि राज्य सरकार विवाहों के पंजीकरण से संबंधित नियम बना सकती है।

हिंदू विवाह कानून के अंतर्गत शून्यकरणीय विवाह

हिंदू विवाह अधिनियम के तहत, कुछ परिस्थितियां विवाह को शून्यकरणीय बनाती हैं।यदि विवाह की शर्तें पूरी नहीं की गई हैं।

कानूनी हिंदू विवाह

किसी शादी को हिंदू विवाह के रूप में कानूनी मान्यता देने के लिए, निम्नलिखित शर्तें जरूर पूरी की जानी चाहिए|

अमान्य/निरस्त हिंदू विवाह

विवाह जब निरस्त हो जाता है, तो इसका मतलब यह होता है कि इसे बिल्कुल शुरू से ही स्वतः अमान्य विवाह मान लिया गया है |

रिश्ते की स्थिति और हिंदू विवाह कानून

आपका जीवन साथी ऐसा नहीं होना चाहिए जिसने अपनी पिछली जीवन साथी को तलाक नहीं दिया है। विवाह के समय किसी भी पक्ष का जीवन साथी नहीं होना चाहिए।

सपिंदा और हिंदू विवाह

विवाह अनुमत हो सकता है यदि यह दिखाया गया हो कि आपके समाज/जाति/कबीले में एक स्थापित प्रथा या प्रचलन है जो सपिंदा के बीच विवाह की अनुमति देता है।