अमान्य/निरस्त हिंदू विवाह

आखिरी अपडेट Jul 12, 2022

हिंदू विवाह अधिनियम, धारा 11 के तहत कुछ परिस्थितियां बताई गई हैं जब विवाह निरस्त हो जाता है। विवाह जब निरस्त हो जाता है, तो इसका मतलब यह होता है कि इसे बिल्कुल शुरू से ही स्वतः अमान्य विवाह मान लिया गया है और इसे रद्द करने की कोई आवश्यकता नहीं है। इसकी परिस्थितियां निम्नलिखित हैं:

  • दोनों पक्षों में से एक का जीवन साथी विवाह के समय जीवित हो।
  • यदि पक्ष निषिद्ध संबंध की सीमाओं के भीतर हैं, सिर्फ तब, जब कुछ रिवाज इसकी अनुमति दें। उदाहरण- कुछ बिरादरियों में, उनकी रीतियों की विशेषता के कारण निषिद्ध रिश्तों की सीमा के भीतर विवाहों की अनुमति दी जाती है।
  • पक्ष एक दूसरे के सपिंदा हैं, सिर्फ उन मामलों के जहां कुछ रीतियां इसकी अनुमति देती हैं।

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हिंदू विवाह का पंजीकरण

हिंदू विवाह अधिनियम, धारा 8 में हिंदू कानून कहता है कि राज्य सरकार विवाहों के पंजीकरण से संबंधित नियम बना सकती है।

हिंदू विवाह कानून के अंतर्गत शून्यकरणीय विवाह

हिंदू विवाह अधिनियम के तहत, कुछ परिस्थितियां विवाह को शून्यकरणीय बनाती हैं।यदि विवाह की शर्तें पूरी नहीं की गई हैं।

कानूनी हिंदू विवाह

किसी शादी को हिंदू विवाह के रूप में कानूनी मान्यता देने के लिए, निम्नलिखित शर्तें जरूर पूरी की जानी चाहिए|

रिश्ते की स्थिति और हिंदू विवाह कानून

आपका जीवन साथी ऐसा नहीं होना चाहिए जिसने अपनी पिछली जीवन साथी को तलाक नहीं दिया है। विवाह के समय किसी भी पक्ष का जीवन साथी नहीं होना चाहिए।

हिंदू धर्म से धर्म परिवर्तन

आप तलाक के लिए केस फाइल कर सकते हैं यदि आपके पति या पत्नी ने दूसरे धर्म में धर्म परिवर्तन कर लिया हो और हिंदू नहीं रह गया हो।

सपिंदा और हिंदू विवाह

विवाह अनुमत हो सकता है यदि यह दिखाया गया हो कि आपके समाज/जाति/कबीले में एक स्थापित प्रथा या प्रचलन है जो सपिंदा के बीच विवाह की अनुमति देता है।