क्रूर व्यवहार और हिंदू विवाह कानून

आखिरी अपडेट Sep 29, 2022

क्रूर व्यवहार करना हिंदू विवाह कानून के तहत तलाक का कारण है। क्रूरता वह व्यवहार या आचरण है जो आपको परेशान करता है। क्रूरता दो रूपों में हो सकती है:

शारीरिक 

• अगर आपका जीवनसाथी आपको कोई शारीरिक नुकसान पहुंचाकर शारीरिक रूप से आहत करता है, तो आप तलाक के लिए कोर्ट में जा सकते हैं। इस तरह का व्यवहार शारीरिक क्रूरता की श्रेणी में आता है। कोर्ट में इसे साबित करना आसान होता है।

मानसिक

• यदि आपका जीवनसाथी अपने आचरण या शब्दों के कारण आपको मानसिक रूप से परेशान कर रहा है, तो इस प्रकार का व्यवहार मानसिक क्रूरता की श्रेणी में आता है। उदाहरण के लिए, यदि आपका जीवनसाथी आपको गाली देता है या आपका जीवनसाथी आपके दोस्तों और सहकर्मियों आदि के सामने आपकी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाता है। मानसिक क्रूरता को शारीरिक क्रूरता की तुलना में न्यायालय में साबित करना अधिक कठिन है।

क्रूरता का कार्य लिंग-तटस्थ है, जिसका अर्थ है कि पति पत्नी के खिलाफ क्रूरता का मामला दर्ज कर सकता है और इसके विपरीत भी हो सकता है।

 

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शिकायत दर्ज करने की प्रक्रिया

इस सबके बावजूद, शिकायत का समाधान न होने पर, आप उपभोक्ता मंचों से संपर्क हेतु किसी वकील की मदद ले सकते हैं।

उपभोक्ता शिकायतों के प्रकार

उपभोक्ता संरक्षण कानून के तहत प्रत्येक व्यक्ति को निम्नलिखित प्रकार की उपभोक्ता शिकायतें दर्ज करने का अधिकार है |

पीड़ितों और गवाहों के अधिकार

यह विशेष कानून पीड़ितों, उनके आश्रितों और इस कानून के तहत दायर शिकायतों के गवाह के रूप में कार्य करने वालों को कुछ अधिकारों की गारंटी देता है।
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राज्यों द्वारा उठाए जाने वाले एहतियाती और निवारक उपाय

अनुसूचित जातियों के सदस्यों के खिलाफ अत्याचारों को रोकने के लिए कानून को राज्य सरकारों द्वारा विशेष उपाय करने की आवश्यकता है
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उपभोक्ता कल्याण कोष

समग्र उद्देश्य उपभोक्ताओं के कल्याण को बढ़ावा देने और देश में उपभोक्ता आंदोलन को मज़बूत करने के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करना है।

उपभोक्ता शिकायत मंच

उपभोक्ता संरक्षण कानून संबद्ध प्राधिकरणों को निर्दिष्‍ट करता है कि कोई उपभोक्ता-अधिकारों का उल्‍लंघन होने पर उनसे संपर्क कर सकता है।