अंतर-धार्मिक विवाह के लिए शर्तें

आखिरी अपडेट Jul 12, 2022

शादी के समय आपको निम्नलिखित परिस्थितियों को ध्यान में रखना होगा:

  • दम्पति में से कोई भी व्यक्ति पहले से शादी-शुदा न हो।
  • दम्पति में से कोई भी व्यक्ति:
    • के मन में किसी भी प्रकार की बेरुखी नहीं होनी चाहिए, जिसके परिणामस्वरूप विवाह को वैध सहमति देने में असमर्थता पैदा हो।
    • हालांकि, वैध सहमति देने में सक्षम होने के बावजूद कोई भी व्यक्ति मानसिक विकार से पीड़ित न हो, जिससे वे शादी और बच्चे पैदा करने में अयोग्य साबित हों।
    • किसी भी व्यक्ति को बार-बार पागलपन या मिर्गी के दौरें न पड़ते हों।
  • पुरुष की उम्र कम से कम 21 वर्ष और महिला की आयु कम से कम 18 वर्ष होनी चाहिए।
  • कोई भी पक्ष प्रतिबंधित संबंध की डिग्री के भीतर न हों।

रीति-रिवाजों से होने वाली शादियां

ऐसे मामलों में जहां कोई जनजाति, समुदाय, समूह, या परिवार से संबंधित व्यक्ति के लिए रीति-रिवाज शामिल हैं, राज्य सरकार उन्हें नियमित करने और विवाह को विधिपूर्वक पूरा करने के नियम बना सकती है। यह उन मामलों में ज़रूरी नहीं है जहां:

  • इस तरह के रिवाज सदस्यों के बीच लंबे समय से लगातार देखे गए हों।
  • रीति-रिवाज़ या नियम सार्वजनिक नीति के खिलाफ न हों।
  • रीति-रिवाज या नियम, जो केवल एक परिवार पर लागू होते हैं और परिवार अभी भी इस प्रथा को जारी रखे हुए है।

ऐसे मामलों में, जहां विवाह को जम्मू और कश्मीर राज्य में विधिपूर्वक पूरा किया गया है। इसके लिए दोनों पक्षों को भारत का नागरिक होना चाहिए और उन क्षेत्रों का निवासी होना चाहिए, जहां तक अधिनियम लागू होता है।

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विशेष विवाह के लिए पंजीकरण की प्रक्रिया इस प्रकार है:

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नागरिक विवाह, जिन्हें आमतौर पर ‘विशेष विवाह’ या ‘अंतर-धार्मिक विवाह’ भी कहा जाता है, दम्पति के धर्म पर निर्भर नहीं करते हैं।

अंतर-धार्मिक विवाह की घोषणा करना

विशेष विवाह अधिनियम के तहत शादी के लिए कोई विशिष्ट रूप या आवश्यक समारोह निर्धारित नहीं है, लेकिन दो संभावनाएं हैं:

भारत के प्रवासी नागरिक (ओ.सी.आई) या भारत में रहने वाला एक विदेशी नागरिक द्वारा गोद लेने की प्रक्रिया (गैर-धार्मिक कानून)।

अगर आप भारत के प्रवासी नागरिक (ओ.सी.आई) हैं या आप विदेशी हैं और भारत में हमेशा से रहते आ रहें हैं, तो बच्चे को गोद लेने के लिए नीचे दिए गए चरणों का पालन करें |

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ध्वनि प्रदूषण काफी हद तक औद्योगीकरण, शहरीकरण और आधुनिक सभ्यता की उपज है। ध्वनि प्रदूषण के दो स्रोत हैं-पहला: औद्योगिक और दूसरा: गैर-औद्योगिक। औद्योगिक स्रोत में विभिन्न उद्योगों से होने वाला शोर और बहुत तेज़ गति एवं तेज़ आवाज़ से काम करने वाली बड़ी मशीनें शामिल हैं।  गैर-औद्योगिक स्रोत में परिवहन, विभिन्न प्रकार के वाहन, […]

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