वायु प्रदूषण कई क्षेत्रों जैसे बिजली, परिवहन, उद्योग, घर, निर्माण और कृषि से जुड़ा है।
वायु प्रदूषण के स्रोत
जीवाश्म ईंधन और उत्सर्जन का जलना
ज्यादातर वायु प्रदूषण ऊर्जा के इस्तेमाल से होता है, जैसे जीवाश्म ईंधन का जलना जो जहरीली गैसों और रसायनों को हवा में छोड़ता है। कोयले और प्राकृतिक गैसों जैसे जीवाश्म ईंधन के जलने से दो सबसे आम तरह के वायु प्रदूषण धुंध (स्माॅग) और कालिख होते हैं। धुंध और कालिख में मौजूद हवा में उड़ने वाले छोटे कण बहुत खतरनाक होते हैं, क्योंकि वे फेफड़ों और खून में प्रवेश कर जाते हैं और इससे ब्रोंकाइटिस और दिल की खतरनाक बीमारियां हो सकती है।
हानिकारक वायु प्रदूषकों के दूसरे स्रोत जैसे उद्योग, वाहन, सड़क और निर्माण क्षेत्र, कचरा जलाने से निकालने वाला धुंआ, घरों और डीजल जनरेटर सेटों से निकलने वाला धुंआ आदि हैं।
एयर कंडीशनर (एसी) का इस्तेमाल
एसी के बढ़ते इस्तेमाल से बिजली की बढ़ती मांग पर सीधा असर पड़ता है। बिजली की यह बढ़ती मांग सामूहिक ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता को बढ़ाती है। बिजली क्षेत्र, प्रदूषणकारी ग्रीनहाउस गैस के उत्सर्जन को सबसे ज्यादा बढ़ावा देता है। जलवायु परिवर्तन और वायु प्रदूषण के लिए ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन का बढ़ता स्तर जिम्मेदार है। इस कारण से एसी का बढ़ता इस्तेमाल वायु प्रदूषण के कई कारणों में से एक है। वहीं एसी का इस्तेमाल सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए खतरा भी है।
हालांकि, इस तरह के प्रदूषण को बढ़ाने के लिए किसी एक व्यक्ति के खिलाफ मामला दर्ज नहीं किया जा सकता है, क्योंकि कोई भी व्यक्ति ऊर्जा या वायु प्रदूषण को बढ़ाने के लिए अकेले जिम्मेदार नहीं है। यह एक समुदाय में एसी के बढ़ते इस्तेमाल के कारण वायु प्रदूषण को बढ़ा रहा है।
वाहन प्रदूषण
वाहनों से होने वाला प्रदूषण कुल वायु प्रदूषण का 60-70% भाग है। सरकार सख्त जन उत्सर्जन मानकों और प्रोटोकॉल, पुराने वाहनों को एक समय सीमा के बाद हटाने, वाहनों के रखरखाव और लेन अनुशासन के बारे में जागरूकता बढ़ाने, वैकल्पिक ईंधन के इस्तेमाल जैसे उपायों द्वारा इस प्रदूषण को नियंत्रित कर रही है। साथ ही सरकार द्वारा इलेक्ट्रिक और हाइब्रिड वाहनों की संख्या और मेट्रो, ई-रिक्शा जैसे सार्वजनिक परिवहन के इस्तेमाल को बढ़ावा दिया जा रहा है।
वायु प्रदूषण के प्रभाव
जलवायु परिवर्तन
वायु प्रदूषण जलवायु परिवर्तन का कारण और प्रभाव दोनों है। कार्बन डाइऑक्साइड और मीथेन के उत्सर्जन से पृथ्वी का तापमान बढ़ जाता है। इसके कारण बढ़ी हुई गर्मी से स्मॉग (धुंआ और कोहरा) और यूवी विकिरण में वृद्धि हो जाती है।
स्वास्थ्य प्रभाव
वायु प्रदूषण का मानव स्वास्थ्य पर बहुत बुरा प्रभाव पड़ता है। हालांकि, वायु प्रदूषण का बुरा प्रभाव केवल स्वास्थ्य तक ही नहीं है, बल्कि कृषि, मानव, पौधे और पशु जीवन पर भी पड़ता है। वायु प्रदूषण के स्वास्थ्य पर प्रभावों के कारण आंख और गले में जलन, फेफड़ों को नुकसान व एलर्जी और अस्थमा के दौरे भी पड़ सकते हैं। प्रदूषित हवा में लंबे समय तक रहने से त्वचा और लीवर से जुड़ी बीमारियां व प्रजनन अंगों को नुकसान हो सकता है। हवा में सीसा और मरकरी जैसे खतरनाक रसायनों के होने से बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव पड़ता है। फेफड़ों और दिल की बीमारियों के रोगियों के लिए भी वायु प्रदूषण बहुत हानिकरक होता है।
