बच्चे की गवाही का विशेषज्ञों द्वारा रिकॉर्ड करना

सभी साक्षात्कार और जांच के दौरान, उन बच्चों और पक्षों की मदद करने के लिए जो विभिन्न भाषा बोलते हैं, या जिन्हें संचार में कठिनाई होती है, दुभाषिये और विशेषज्ञ मौजूद रहते हैं। ये लोग उन गवाहों की मदद करने के लिए रहते हैं जिनकी भाषा, उस विशिष्ट राज्य के न्यायालय की भाषा से अलग है। प्रत्येक जिले की ‘बाल संरक्षण इकाइयां’ (चाइल्ड प्रोटेक्शन यूनिट्स) को, पीड़ितों और उससे संबंधित पक्षों को संचार मुद्दों पर मदद करने के लिए दुभाषियों और अनुवादकों को उपलब्ध करना होगा। यदि दुभाषिया उपलब्ध नहीं है, तो किसी गैर-पेशेवर को दुभाषिये के रूप में उपयोग किया जा सकता है लेकिन पुलिस को यह सुनिश्चित करना होगा कि उनके हितों का टकराव (कनफ्लिक्ट ऑफ इंटरेस्ट) ना हो। उदाहरण के लिए, एक पिता अपने बच्चे के लिए दुभाषिये का रोल अदा नहीं कर सकता।

ध्यान रखने योग्य बातें:

  • दुभाषिये को, परिवार के साथ बहुत अधिक घुलमिल जाने की आवश्यकता नहीं है और न ही उसे उनकी तरफ से बात करनी चाहिए। संप्रेषण की कठिनाइयों में मदद करना ही उसका एकमात्र कार्य होना चाहिए।
  • दुभाषिये का परिवार या उस बच्चे के साथ कोई पुराना संबंध नहीं होना चाहिए।
  • पीड़ित और अन्य पक्षों द्वारा दी गई सभी जानकारी बेहद गोपनीय है और किसी भी तरीके से इसका खुलासा नहीं किया जाना चाहिए।

घरेलू हिंसा के लिए परामर्श

परामर्श किसी सलाहकार से पेशेवर मार्गदर्शन के प्रावधान की ओर इशारा करता है, जो आपके द्वारा झेली गई घरेलू हिंसा के मामले को निपटाने में, इस बात की गारंटी दिलाने में कि हिंसा दोहराई नहीं जाएगी, आपकी और आपके उत्पीड़क की मदद करेगा, और घरेलू हिंसा की समस्या का सर्वोत्तम संभव समाधान लेकर आएगा। अदालत या तो उत्पीड़क को या आपको, या तो अकेले या एक साथ, किसी सेवा प्रदाता या कोर्ट द्वारा नियुक्त काउंसलर(परामर्शदाता) से परामर्श करने का आदेश पारित कर सकती है।

 

काउंसलर(परामर्शदाता) नहीं हो सकता हैः

  • कोई ऐसा व्यक्ति जो इस केस से जुड़ा हो, या कोई ऐसा व्यक्ति जो आपका या आपके उत्पीड़क का संबंधी हो जब तक कि आप और उत्पीड़क दोनों ही इसके लिए अपनी सहमति न दे दें1)
  • कोई ऐसा वकील जो इस मामले में उत्पीड़क की ओर से पेश हो चुका है।

 

यदि आप काउंसलर(परामर्शदाता) से किसी कारणवश संतुष्ट नहीं हैं, तो आप अपने वकील से इस बारे में कोर्ट को बताने के लिए कह सकते हैं जो इस मामले को देखेगा।

 

काउंसलर(परामर्शदाता) की भूमिका

काउंसलर(परामर्शदाता) की भूमिका है कि वहः

  • किसी ऐसी जगह पर आपके साथ अकेले या उत्पीड़क के साथ एक मीटिंग तय करे जो आपके और आपके उत्पीड़क के लिए सुविधाजनक हो2)
  • काउंसलर(परामर्शदाता) को परामर्श देने की कार्यवाहियां इस बात को सुनिश्चित बनाने के उद्देश्य से पूरी करनी पड़ेंगी कि घरेलू हिंसा दोहराई न जाए। काउंसलर(परामर्शदाता) उत्पीड़क से यह कहते हुए एक वचन3) ले सकता है कि वहः
  • आगे कोई घरेलू हिंसा नहीं करेगा।
  • पत्र, टेलीफोन, इलेक्ट्रॉनिक मेल के माध्यम से या जज द्वारा अनुमत तरीके से काउंसलर(परामर्शदाता) की मौजूदगी के अलावा किसी और माध्यम से मिलने या बातचीत करने की कोशिश नहीं करेगा।
  • यदि आप फैसला करते हैं कि आप मामले को निपटाना और केस को खत्म करना चाहते हैं, तो आप काउंसलर(परामर्शदाता) से कह सकते हैं, जो इसमें सम्मिलित हर एक के लिए सर्वोत्तम संभव समाधान पेश करने की कोशिश करेगा।

 

परामर्श देने की प्रक्रिया में, उत्पीड़क को इस बात की अनुमति नहीं है कि वह आपको घरेलू हिंसा का शिकार बनाने के लिए किसी कारण का औचित्य पेश करे। परामर्श की प्रक्रिया पूरी हो जाने के बाद, काउंसलर(परामर्शदाता) को जितना जल्दी हो सके कोर्ट में परामर्श की बैठक (बैठकों) से संबंधित रिपोर्ट जमा करनी होती है ताकि कोर्ट आगे की कार्रवाई कर सके और, 2 महीने के भीतर, केस की सुनवाई के लिए तारीख तय कर सके। यदि निपटारा नहीं हो पाया है, तो काउंसलर(परामर्शदाता) को अदालत के समक्ष इसके कारण बताने होंगे।

पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए गए LGBTQ+ व्यक्ति

जब पुलिस अधिकारी आपको किसी अपराध या किसी अपराध के संदेह के आधार पर गिरफ्तार करना चाहते हैं, तो वे आपके स्थान पर आ सकते हैं, और आपको गिरफ्तार कर सकते हैं। आपको गिरफ्तार करते समय गिरफ्तारी का विवरण, गिरफ्तारी का स्थान, गिरफ्तारी का समय, आदि को एक गिरफ्तारी मेमो में लिखा जाता है। वे निम्नलिखित कदम उठा सकते हैं:

  • आपको वारंट के साथ गिरफ्तार कर सकते हैं
  • आपको बिना वारंट के गिरफ्तार कर सकते हैं
  • थाने में उपस्थित होने के लिए आपको एक नोटिस जारी कर सकते हैं।
  • गिरफ्तार होने के समय सभी को कुछ अधिकार कानून के तहत हैं, जिसका आपके लिंग या आपके यौन अभिविन्यास से कोई संबंध नहीं है।

यदि आप एक महिला या एक पारमहिला (ट्रांसवुमन) हैं, तो कानून के तहत आपकी गिरफ्तारी के समय आपके कुछ विशिष्ट अधिकार हैं। उदाहरण के लिए, जब किसी महिला को गिरफ्तार किया जा रहा हो तो वहां एक महिला सिपाही की उपस्थिति ज़रूरी है।

दहेज हत्या के मामले

शादी के 7 साल के अन्दर जब किसी महिला की अप्राकृतिक मौत (जैसे जलने या चोट लगने के कारण) होती है और वह दहेज की मांग के कारण क्रूरता या उत्पीड़न से भी पीड़ित थी, तब यह माना जाता है कि पति या ससुराल  वालों द्वारा यह क्रूर अपराध किया गया है। 

आत्महत्या को भी अप्राकृतिक मौत का एक रूप माना जाता है। 

अगर ऊपर बताए गए सबूत मौजूद हैं, तो अदालत यह मान लेगी कि आरोपी ने अपराध किया है। इसके बाद आरोपी को यह साबित करना होगा कि उसने अपराध नहीं किया है।

इस अपराध के लिए सजा जुर्माने के साथ 3 साल तक की जेल  है।

चोरी की शिकायत

यदि आप यात्रा के दौरान किसी भी प्रकार की चोरी का सामना करते हैं, जैसे कि निजी सामान की चोरी या सफर के दौरान चोरी, तो आप निकटतम पुलिस स्टेशन में एफआईआर दर्ज कर सकते हैं। पुलिस आवश्यक जांच करेगी।

एफआईआर कैसे दर्ज करें, यह जानने के लिए कृपया यहां देखें।

पुलिस को शिकायत दर्ज करना

जब आप 100 नंबर पर फोन करके या पुलिस स्टेशन पर जाकर पुलिस से संपर्क करते हैं तो निम्नलिखित प्रक्रिया का अनुकरण होगा:

  • वे आपकी शिकायत का एक लिखित रिकॉर्ड बनायेंगे।
  • आपकी रिपोर्ट के आधार पर अगर पुलिस को लगेगा कि बच्चे को तत्काल देखभाल करने और ध्यान देने की जरूरत है, तो वे बच्चे को तुरंत अस्पताल में, या आश्रय गृह (शेल्टर होम) में स्थानांतरित कर देंगेे।

जब आपने नेक नीयत से अपराध की रिपोर्ट की है तो आपको यह चिंता करने की जरूरत नहीं है कि आपको अदालत के चक्कर लगाने पड़ेंगे जब तक कि अपराधी को दोषी नहीं ठहराया जाता।

घरेलू हिंसा के लिए आपराधिक शिकायत

घरेलू हिंसा के लिए केस दर्ज करने के अलावा, जब आप, अन्य चीजों के साथ, सुरक्षा या मौद्रिक राहत की मांग कर सकते हैं, आप तब भी1) उत्पीड़क के खिलाफ कोर्ट में आपराधिक मामला दर्ज करा सकते हैं यदि आपने जिस हिंसा का सामना किया है वह कष्टदायक हो। आपराधिक मामला दर्ज कराने से, उत्पीड़क को हिंसक कार्य के लिए कारावास और जुर्माने के रूप में सजा दी जाएगी। आपके वकील को चाहिए कि वह अदालत को सूचित करे कि दोनों मामले दायर किए जा चुके हैं2)

आपराधिक मामला दायर करने से पहले, आपको पुलिस स्टेशन जाकर एफ.आई.आर दर्ज करानी होगी। आप भारतीय दंड संहिता, 1860 की धारा 498ए का उपयोग करते हुए पुलिस में एफ.आई.आर दर्ज करा सकती हैं।

एक आपराधिक मामला निम्नलिखित कारणों के लिए दायर किया जा सकता है3):

  • यदि उत्पीड़क किसी महिला को आत्महत्या करने के लिए उकसाता है4)
  • यदि उत्पीड़क महिला को गंभीर चोट पहुंचाता है या पहुंचाने की कोशिश करता है या महिला के जीवन या स्वास्थ्य के लिए खतरा बनता है।
  • यदि उत्पीड़क महिला के मानसिक स्वास्थ्य को इस हद तक प्रभावित करता है कि यह उसके जीवन के लिए खतरा बन चुका है।
  • यदि उत्पीड़क महिला के लिए शब्दों से या शारीरिक क्रियाओं द्वारा कोई मानसिक तनाव या मनोवैज्ञानिक संकट पैदा करता है5)
  • यदि उत्पीड़क महिला को दहेज के लिए मजबूर करता है या किसी संपत्ति या कीमती चीज़ की गैरकानूनी मांग करता है।

 

ऊपर दिए गए किसी भी अपराध के लिए कोर्ट के द्वारा दोषी पाए जाने पर, उत्पीड़क को अदालत में जुर्माना भरना पड़ेगा और 3 वर्ष तक के लिए जेल जाना होगा।

गिरफ्तारी के समय LGBTQ+ व्यक्तियों के कुछ खास अधिकार

आपके यौन अभिविन्यास या आपकी लिंग पहचान के आधार पर गिरफ्तारी के दौरान पुलिस अधिकारी आपके साथ गलत व्यवहार नहीं कर सकते हैं। आपके लिए यह उपयोगी होगा कि कानून के तहत जो 5 अधिकारें आपके पास हैं, उन्हें जानें:

पुलिस को उनके स्वयं की पहचान साबित करने के लिये कहें

आप पुलिस को उनके स्वयं की पहचान साबित करने के लिए पहचान पत्र (आईडी प्रूफ) दिखाने को कहें, जो उनके नाम, पदनाम, आदि जानकारी को सही और स्पष्ट तौर पर दर्शाता हो।

उनसे गिरफ्तारी का कारण पूछें

अगर पुलिस को आपकी गिरफ्तारी के लिए वारंट की जरूरत नहीं है, फिर भी यह जानना आपका अधिकार है कि आपको क्यों गिरफ्तार किया जा रहा है, और यह बताना पुलिस अधिकारियों का कर्तव्य है।

पुलिस से अपने परिवार और दोस्तों को सूचित करने के लिए कहें

जब आपको गिरफ्तार किया जा रहा है, तो आपको पुलिस स्टेशन में ले जाने से पहले, आप अपने परिवार के एक सदस्य या एक मित्र को चुन सकते हैं, जिसे पुलिस आपकी गिरफ्तारी के बारे में, और हिरासत में आपको कहां रखा गया है, इसके बारे में सूचित करेंगे। पुलिस का यह कर्तव्य है कि वह आपके परिवार या दोस्तों को आपकी गिरफ्तारी के बारे में बताए। उन्हें इस व्यक्ति का विवरण एक प्रविष्टि के रूप में पुलिस डायरी और गिरफ्तारी ज्ञापन (अरेस्ट मेमो) में दर्ज करना होगा।

एक वकील की मांग करें

आप पुलिस से अपने वकील को बुलाने के लिए कह सकते हैं। यदि आपके पास अपना कोई वकील नहीं है, या आप वकील नहीं कर सकते हैं, तो आप अदालत से अपने लिए एक वकील नियुक्त करने के लिए कह सकते हैं।

अपनी मेडिकल जांच के लिए माग करे

  • पुलिस अधिकारियों की ज़िम्मेदारी है कि हिरासत में वे हर 48 घंटे में आपकी चिकित्सीय जांच कराएं।
  • आप एक प्रशिक्षित चिकित्सक द्वारा अपने शरीर पर बड़ी और छोटी चोटों की जांच कराने के लिए मांग कर सकते हैं।
  • शारीरिक परीक्षण को निरीक्षण मेमो में दर्ज किया जाना चाहिए और वह एक पुलिस अधिकारी द्वारा हस्ताक्षरित होना चाहिए। जब आप उनकी हिरासत में हैं तो यह सभी पुलिस द्वारा की जाने वाली हिंसा को रोकने के लिए किया जाता है।

बच्चे द्वारा चोरी

अगर कोई बच्चा चोरी करता है, तो उसके लिए सजा एक बालिग व्यक्ति की सजा से हल्की होती है। जब कोई बच्चा चोरी करता है तो आमतौर पर ऐसा होता है:

• एक बच्चे को गिरफ्तार किया जा सकता है, लेकिन उसे जेल में नहीं रखा जा सकता है- पुलिस को बच्चे को 24 घंटे के भीतर किशोर न्याय बोर्ड (जेजेबी) के सामने पेश करना होगा।

• अगर पुलिस तुरंत बंदी को जमानत पर रिहा नहीं करती है, तो बच्चे को केवल तब तक ऑब्जर्वेशन होम में रखा जा सकता है जब तक कि उसे जेजेबी (24 घंटे के भीतर) नहीं ले जाया जाता।

• पुलिस को एक बाल कल्याण अधिकारी को सूचित करना होता है जो बच्चे के साथ पहली सुनवाई के लिए जेजेबी में जाता है।

जेजेबी को 4-6 महीने के भीतर जांच पूरी करनी होती है, और यदि मामला इससे आगे बढ़ता है तो मामला समाप्त कर दिया जाता है।

यदि किसी बच्चे ने आपसे चोरी की है, तो शिकायत करने के लिए आप जो कदम उठा सकते हैं, उन्हें समझने के लिए यहां पढ़ें।

बाल-अनुकूल न्यायालय प्रक्रिया

इस तरह की मुद्दे की संवेदनशीलता के कारण बाल यौन उत्पीड़न से निपटने के लिए ‘विशिष्ट न्यायालय’ (स्पेशल कोर्ट्स) स्थापित किए गए हैं। सामान्य न्यायालयों के विपरीत, इन न्यायालयों को ऐसी प्रक्रिया का पालन करना होता है जो यह सुनिश्चित करने के लिए बनाया गया है ताकि बच्चा सुरक्षित और सहज महसूस कर सके।

यदि कोई बच्चा यौन हमले का शिकार है, तो विशिष्ट न्यायालय को, उसके लिए कुछ बाल-अनुकूल प्रक्रिया सुनिश्चित करना होगा।

यह विशिष्ट न्यायालय:

कानूनी प्रक्रिया के माध्यम से, परिचित लोगों की उपस्थिति सुनिश्चित करेगा

  • मुकदमें के दौरान बच्चे के परिवार के सदस्य / रिश्तेदार / मित्र या अभिभावक को उसके साथ उपस्थित रहने देगा।

सुनिश्चित करेगा कि कानूनी प्रक्रिया बच्चे के लिए ज्यादा परेशानी वाला नहीं हो।

  • मुकदमे के दौरान बच्चे काे बार-बार विराम देने की अनुमति देगा।
  • गवाही देने के लिए बच्चे को बार-बार अदालत नहीं बुलाया जायेगा।
  • विशेष परिस्थितियों में, बयान देने के लिये बच्चे को न्यायालय में आने की जरूरत नहीं होगी। न्यायालय, बच्चे की जांच करने के लिए उसके घर पर, एक अधिकारी को भेजेगा। बच्चे की गवाही को दर्ज करते समय, न्यायालय एक योग्य अनुवादक, दुभाषिये या विशेष शिक्षक की मदद ले सकता है।
  • कोशिश और सुनिश्चित करेगा कि गवाही 30 दिनों के भीतर दर्ज कर लिया गया है, और मुकदमा एक वर्ष के भीतर पूरा हो जाय।

बच्चे को आरोपित व्यक्ति और जनता से सुरक्षित रक्खे

  • सुनिश्चित करें कि मुकदमे के दौरान बच्चा किसी भी तरह से आरोपी के संपर्क में नहीं आ रहा है। हालांकि, अदालत को यह भी सुनिश्चित करना है कि आरोपी बच्चे के बयान सुन सके। ऐसा एकतरफा दर्पण, पर्दा या वीडियो कॉल की मदद से किया जा सकता है।
  • निजी अदालत में कार्यवाही करें जिससे मीडिया, अदालत में होने वाली घटनाओं के बारे में रिपोर्ट नहीं कर सके।

बच्चे से पूछताछ की प्रक्रिया

कानून ने, आरोपी के वकील के लिये कुछ कर्तव्यों को निर्धारित किया है। इस मुद्दे की संवेदनशीलता और बच्चे की सुरक्षा को हित में रखते हुए, वकील से अदालत की प्रक्रिया को एक खास तरीके से करने की अपेक्षा की जाती है।

  • वकील सीधे बच्चे से सवाल नहीं कर सकता है। वकील, बच्चे को पूछे जाने वाले प्रश्नों को ‘विशेष अदालत’ में पेश करेगा, और तब वे उन प्रश्नों को बच्चे से पूछेंगे।
  • वकील, बच्चे के चरित्र पर यह कहकर लांक्षण नहीं लगा सकता कि बच्चे का अपने माता-पिता के साथ झूठ बोलने का इतिहास है।