अधिवक्ता कौन होता है?

आखिरी अपडेट Jul 13, 2022

एक अधिवक्ता वह व्यक्ति है, जो किसी न्यायिक अधिकारी के समक्ष किसी व्यक्ति के पक्ष को रखने के लिए बहस करता है। इसमें एक नागरिक (सिविल) मामला भी हो सकता है, जैसे किसी दो व्यक्तियों के बीच कॉन्ट्रेक्ट संबंधी विवाद हो, या कोई आपराधिक मामला, जिसमें अपराध करने वालों को राज्य जेल की सजा आदि के द्वारा दंडित कर सकता है। भारत के अधिकांश कानूनी पेशेवर अदालतों और अन्य न्यायिक निकायों में अपने मुवक्किलों का प्रतिनिधित्व करते हैं।

एक अधिवक्ता होने के लिए आवश्यक योग्यताएं

एक अधिवक्ता वह व्यक्ति है, जो अधिवक्ता अधिनियम के तहत किसी भी नामांकन सूचि (रौल) में नामांकित है।

नामांकन सूचि (रौल), स्टेट बार काउंसिल द्वारा तैयार की गई एक अनुरक्षित सूची है, जिसमें विशिष्ट परिषद के तहत पंजीकृत सभी अधिवक्ताओं के नाम रहते हैं। संबंधित स्टेट बार काउंसिल का कर्तव्य है कि वह नामांकन सूचि (रौल) तैयार करे और उसे बनाए रखे, और अधिवक्ताओं को सूचि में सूचीबद्ध करे। क्वालिफाई करने के लिए, अधिवक्ता के लिये आवेदन करने वाले व्यक्ति में निम्नलिखित योग्यताएं होनी चाहिए:

  • वह भारत का नागरिक हो। हालांकि, विदेशी नागरिक भी यहां वकालत कर सकते हैं यदि वे उन देशों से
  • आते हैं, जहां भारतीय नागरिक कानूनों का अभ्यास होता है।
  • व्यक्ति की उम्र कम से कम 21 साल हो।
  • कानून में डिग्री

आवेदन करने वाले व्यक्ति के पास कानून की डिग्री होनी चाहिए:

  • 12 मार्च 1967 से पहले, भारत के किसी भी विश्वविद्यालय से (इसमें स्वतंत्रता पूर्व भारत यानी 15 अगस्त 1947 से पहले के सभी विश्वविद्यालय शामिल हैं) होनी चाहिये।
  • 12 मार्च 1967 के बाद, भारत के किसी भी विश्वविद्यालय से, जो बार काउंसिल ऑफ इंडिया द्वारा मान्यता प्राप्त हो, और उसमें कानून में तीन वर्षीय पाठ्यक्रम पढ़ाया जाता हो।
  • बार काउंसिल ऑफ इंडिया द्वारा मान्यता प्राप्त भारत के किसी भी विश्वविद्यालय से शैक्षणिक वर्ष 1967-68 या उसके पहले के किसी भी शैक्षणिक वर्ष से कानून (कम से कम दो शैक्षणिक वर्ष) में पढ़ाई की हो।
  • भारत के बाहर किसी भी विश्वविद्यालय से, जिसकी डिग्री को बार काउंसिल ऑफ इंडिया द्वारा मान्यता प्राप्त है।
  • एक बैरिस्टर के रूप में, जो 31 दिसंबर, 1976 से पहले, बार का सदस्य रहा है।
  • उच्च न्यायालय में एक अधिवक्ता के रूप में नामांकन के लिए, वह बम्बई या कलकत्ता के उच्च न्यायालयों द्वारा निर्दिष्ट परीक्षाओं को पास किया हो।
  • कोई अन्य विदेशी योग्यता जिसे बार काउंसिल ऑफ इंडिया द्वारा मान्यता प्राप्त हो। मान्यता प्राप्त विदेशी विश्वविद्यालयों की सूची के लिए यहां देखें।

अन्य शर्तें

नामांकन के लिए, एक आवेदक को आवश्यक स्टाम्प शुल्क का भुगतान अपने स्टेट बार काउंसिल को करना होगा। आवेदक को बार काउंसिल ऑफ इंडिया को रु.150 का नामांकन शुल्क, और संबंधित स्टेट बार काउंसिल को भी रु. 600 का नामांकन शुल्क भुगतान करना होगा।

इसके अलावा, एडवोकेट के रूप में अपने नामांकन करने के इच्छुक व्यक्तियों को अपने संबंधित स्टेट बार काउंसिलों द्वारा रक्खी गई किसी भी अन्य शर्तों को भी पूरा करना पड़ेगा। उदाहरण के लिए, दिल्ली बार काउंसिल को एडवोकेटों को यह घोषणा करने की आवश्यकता है कि वे किसी अन्य व्यापार, व्यवसाय या पेशे से नहीं जुड़े हैं। यदि वे किसी चीज़ में शामिल हैं, तो उन्हें नामांकन के समय इसके बारे में पूरी जानकारी देनी होगी।

Comments

    Saurabh Milind

    December 9, 2022

    अधिवक्ता का सामाजिक क्षेत्र मे क्या योगदान है .

    ahmad saleem khan

    April 19, 2024

    Very Good Post
    Advocate Ahmad Saleem Khan

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