आरोप पत्र

आखिरी अपडेट Sep 9, 2022

एक बार जब आपने अपराध की सूचना एफआइआर दर्ज करके दे दी, तो इसके बाद प्रभारी अधिकारी को यह रिपोर्ट मजिस्ट्रेट को भेजनी होगी, जो बिना किसी अनावश्यक देरी के मामले पर ध्यान देंगे और जांच को आगे बढ़ाएंगे। यह अनिवार्य कदम है जिसका पालन पुलिस को करना होगा, क्योंकि इसके चलते मजिस्ट्रेट को जांच अपने नियंत्रण में लेने की अनुमति मिलती है और यदि आवश्यक हो तो वे इसपर पुलिस को उचित दिशा-निर्देश देते हैं।

पुलिस मामले के तथ्यों और स्थितियों की जांच करेगी, और यदि आवश्यक पड़ी तो अपराध करने वाले व्यक्ति की पहचान करके उसे गिरफ्तार करने की कोशिश करेगी।

यदि पुलिस अधिकारी को लगता है कि मामला गंभीर प्रकृति का नहीं है तो वह जांच करने के लिए एक अधीनस्थ अधिकारी को निर्धारित कर सकता है। साथ ही यदि उन्हें ऐसा लगता है कि आगे जांच के लिए पर्याप्त आधार नहीं हैं तो वे कुछ भी नहीं करेंगे।

जब पुलिस जांच की कार्रवाई पूरी कर लेती है और उसे आपराधिक मामला को आगे बढ़ाने के लिये पर्याप्त सबूत मिल जाते हैं तो वे आरोप पत्र दाखिल करते हैं। यदि जांच के बाद उन्हें उस अपराध को साबित करने का कुछ नहीं मिलता है तो वे मजिस्ट्रेट के समक्ष ‘समापन (क्लोज़र) रिपोर्ट’ दाखिल कर, मामले को बंद करने का सुझाव देंगे।

आरोप पत्र का दाखिल होने के साथ ही किसी आपराधिक मुकदमें की शुरूआत होती है। पुलिस के पास आरोप पत्र या समापन रिपोर्ट दाखिल करने के लिये कोई समय सीमा नहीं होती है। यहां तक कि मजिस्ट्रेट भी किसी विशेष अवधि के अंदर आरोप पत्र दाखिल करने के लिए पुलिस को बाध्य नहीं कर सकता है। लेकिन यदि कोई अभियुक्त जेल में है तो उसके पास आरोप पत्र दाखिल करने के लिए या तो 60 दिन (जहां अपराध की सजा 10 साल से कम हो), या 90 दिन (जहां अपराध की सजा 10 साल से अधिक हो) का समय है।

Leave a Reply

Your email address will not be published.

क्या आपके पास कोई कानूनी सवाल है जो आप हमारे वकीलों और वालंटियर छात्रों से पूछना चाहते हैं?

Related Resources

एफआइआर कैसे दर्ज करें

यदि कोई अपराध हुआ हो तो:

कौन एफआइआर दर्ज कर सकता है

आप एफआइआर दर्ज कर सकते हैं यदि आप:

एफ़आईआर कहां दर्ज की जा सकती है

किसी भी पुलिस थाने में एफआइआर दर्ज की जा सकती है।