दहेज की मांग से जुड़ी क्रूरता और मौतें

आखिरी अपडेट Mar 11, 2026

 2019 में दर्ज किए गए दहेज हत्या के 7,141 मामलों की तुलना में कोविड-19 महामारी के बावजूद 2020 में दहेज हत्या के मामलों में केवल 6,966 की मामूली कमी देखी गई।
भारतीय कानून दहेज की मांग के कारण होने वाली क्रूरता और मौत को अपराध मानता है। इसे दहेज हत्या कहा जाता है। अगर पत्नी की मौत दहेज की मांग के उत्पीड़न की वजह से हुई है, तो महिला के पति और ससुराल वालों को सजा दी जा सकती है।
दहेज से जुड़ी क्रूरता और उत्पीड़न के मामलों में, आप पुलिस स्टेशन जाकर एफआईआर दर्ज करके इसकी रिपोर्ट कर सकते हैं।
दोषी पाए जाने पर पति और ससुराल वालों को 7 साल से लेकर उम्रकैद तक की सजा हो सकती है।

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उपभोक्ता संरक्षण कानून के तहत प्रत्येक व्यक्ति को निम्नलिखित प्रकार की उपभोक्ता शिकायतें दर्ज करने का अधिकार है |

उपभोक्ता शिकायत मंच

उपभोक्ता संरक्षण कानून संबद्ध प्राधिकरणों को निर्दिष्‍ट करता है कि कोई उपभोक्ता-अधिकारों का उल्‍लंघन होने पर उनसे संपर्क कर सकता है।

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शिकायत दर्ज करने की प्रक्रिया

इस सबके बावजूद, शिकायत का समाधान न होने पर, आप उपभोक्ता मंचों से संपर्क हेतु किसी वकील की मदद ले सकते हैं।

उपभोक्ता अधिकारों के उल्‍लंघन के लिए दंड

उपभोक्ता अधिकारों के उल्‍लंघन के लिए किसी व्यक्ति या संस्था को दंडित करने की शक्ति केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण के पास होती है।

ग्राहक दायित्व

ग्राहक को किसी तीसरे पक्ष के साथ भुगतान क्रेडेंशियल प्रकट नहीं करना चाहिए। यदि कोई ग्राहक ऐसा करता है तो लापरवाह के कारण देनदारी बढ़ जाएगी।